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Meta Description: यूपी: News: यूपी: पीठासीन सम्मेलन में बोले सीएम योगी- पीठ द्वारा विपक्ष को ज्यादा मौका देने पर नाराज नहीं होती सरकार – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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यूपी:: मुख्य समाचार और अपडेट
यूपी:: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधायी संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य विधानमंडलों में प्रति वर्ष कम से कम 30 बैठकें अवश्य होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सदन जितना अधिक चलेगा, उतनी ही सार्थक चर्चा होगी और लोकतंत्र मजबूत होगा। नियोजित तरीके से सदन में बाधा डालना एक गलत परंपरा है, जिससे सबसे अधिक नुकसान आम नागरिक का होता है, जिसकी समस्याओं पर चर्चा होनी होती है।
लोकसभा अध्यक्ष 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के समापन के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन विरोध का सबसे उचित मंच सदन है, जहां शब्दों और तर्कों के माध्यम से अपनी बात रखी जानी चाहिए। इससे जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास बना रहता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रयास होना चाहिए कि सदन एक घंटे के लिए भी बाधित न हो, क्योंकि जनप्रतिनिधि हर क्षण जनता के प्रति जवाबदेह हैं।
ओम बिरला ने जानकारी दी कि यह सम्मेलन छह महत्वपूर्ण संकल्पों के साथ संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि लोकसभा को इस वर्ष आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स से लैस किया जा रहा है और भविष्य में सभी राज्यों की विधानसभाओं में भी इसे लागू किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सभी विधानसभाओं को मानक तय करने होंगे। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही सभी राज्यों की विधानसभा की कार्यवाही एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। लोकसभा अध्यक्ष ने यह भी घोषणा की कि विधायिका को अधिक प्रभावी, जनोपयोगी और उत्तरदायी बनाने के उद्देश्य से एक ‘राष्ट्रीय विधायी सूचकांक’ (नेशनल लेजिसलेटिव इंडेक्स) तैयार किया जाएगा। इससे विधानमंडलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, संवाद की गुणवत्ता और कार्यकुशलता में वृद्धि होगी। इसके मानक तय करने के लिए एक सप्ताह के भीतर समिति गठित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि राज्य विधानमंडल स्वायत्त होते हैं और नियम सदन द्वारा ही तय किए जाते हैं, लेकिन लोकसभा इस वर्ष ‘मॉडल यूनिफॉर्म रूल्स’ तैयार करने की दिशा में काम कर रही है, जिसे राज्यों की विधानसभाओं से अनुमोदित कराना होगा। कार्यपालिका की जवाबदेही पर उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि नियमों और तथ्यों से परिचित हों तो वे कार्यपालिका को प्रभावी ढंग से जवाबदेह बना सकते हैं। इस दिशा में स्थायी समितियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। कुछ अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों से फोन पर हुई बातचीत को सोशल मीडिया पर साझा किए जाने पर उन्होंने इसे अनुचित परंपरा बताया और कहा कि इसके लिए सदनों में विशेषाधिकार का प्रावधान है, जिसमें दंड का भी प्रावधान है।
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