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Meta Description: अमर उजाला News: अमर उजाला शब्द सम्मान: उस्ताद शुजात हुसैन खान ने भगवान शंकर पर बंदिश गाई, कहा- शब्द संगीत को बहुत उभार देता है – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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कार्यक्रम में उस्ताद शुजात हुसैन खान ने भगवान शंकर पर लिखी गई बंदिश ‘दर्शन देहो शंकर महादेव’ को न केवल गाया, बल्कि बंदिश के सुरों को सितार के गायकी अंग के साथ पिरोया भी। उस्ताद शुजात हुसैन खान ने कृष्ण बिहारी नूर की गजल ‘जिंदगी से बड़ी सजा ही नहीं, जुर्म क्या है पता ही नहीं’ गाकर भी सभागार को झूमने पर मजबूर कर दिया। विज्ञापन विज्ञापन
इससे पहले उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “शब्द के बारे में मुझे ज्यादा समझ नहीं है, लेकिन मैं यह जानता हूं कि संगीत में भी वो ताकत नहीं, जो अल्फाजों में है। संगीत शब्द को और शब्द संगीत को बहुत उभार देता है।” कार्यक्रम में उस्ताद शुजात हुसैन खान ने भगवान शंकर पर लिखी गई बंदिश ‘दर्शन देहो शंकर महादेव’ को न केवल गाया, बल्कि बंदिश के सुरों को सितार के गायकी अंग के साथ पिरोया भी। उस्ताद शुजात हुसैन खान ने कृष्ण बिहारी नूर की गजल ‘जिंदगी से बड़ी सजा ही नहीं, जुर्म क्या है पता ही नहीं’ गाकर भी सभागार को झूमने पर मजबूर कर दिया।इससे पहले उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “शब्द के बारे में मुझे ज्यादा समझ नहीं है, लेकिन मैं यह जानता हूं कि संगीत में भी वो ताकत नहीं, जो अल्फाजों में है। संगीत शब्द को और शब्द संगीत को बहुत उभार देता है।”
अमर उजाला शब्द सम्मान 2025 का बुधवार (11 फरवरी) को दिल्ली में आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान पूरी दुनिया में मशहूर सितार वादक उस्ताद शुजात हुसैन खान ने मुख्य अतिथि के तौर पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा मंच को सुशोभित किया। उन्होंने अमर उजाला शब्द सम्मान के विजेताओं को अलंकृत किया और इसके बाद अपने सितार की धुनों से कार्यक्रम में समां बांधा और दर्शकों को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया।
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