अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड कर रहा हड्डियों को कमजोर, हिप फ्रैक्चर का खतरा; कई गंभीर बीमारियों का भी बन रहा कारण

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अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड कर रहा हड्डियों को कमजोर, हिप फ्रैक्चर का खतरा; कई गंभीर बीमारियों का भी बन रहा कारण: ताजा अपडेट

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अल्ट्रा-प्रोसेस्ड: मुख्य समाचार और अपडेट

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड: रोजमर्रा की थाली में बढ़ती अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की हिस्सेदारी इसकी मुख्य वजह है। फ्लेवर्ड दही, फ्रोजन पिज्जा, ब्रेकफास्ट सीरियल और इंस्टेंट ओट्स जैसे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ तेजी से लोगों के दैनिक आहार का हिस्सा बनते जा रहे हैं। इन्हें तैयार करना आसान होता है, ये जल्दी उपलब्ध हो जाते हैं और कई बार अपेक्षाकृत सस्ते भी होते हैं। यही वजह है कि व्यस्त जीवनशैली में लोग तेजी से इन पर निर्भर होते जा रहे हैं।हाल के वर्षों में कई शोध यह चेतावनी दे चुके हैं कि ऐसे खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन मधुमेह, हृदय रोग और कुछ मामलों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकता है। अब नए अध्ययन से संकेत मिला है कि इनका असर हड्डियों की सेहत पर भी पड़ता है। अमेरिका के तुलाने विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में यूके बायोबैंक डेटाबेस से जुड़े 1.6 लाख से अधिक लोगों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इस शोध के नतीजे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका द ब्रिटिश जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में प्रकाशित हुए हैं।अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड आमतौर पर औद्योगिक स्तर पर तैयार किए जाते हैं और इनमें नमक, चीनी, कृत्रिम मिठास और अस्वास्थ्यकर वसा की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है। इनमें ऊर्जा तो काफी होती है, लेकिन प्राकृतिक और पोषक तत्वों से भरपूर असली खाद्य पदार्थों की मात्रा बहुत कम या लगभग नहीं के बराबर होती है। विशेषज्ञों के अनुसार इन खाद्य पदार्थों का सेवन कम और मध्यम आय वाले परिवारों में अधिक देखा जाता है। आंकड़ों के मुताबिक 2023 तक युवाओं और वयस्कों द्वारा ली जाने वाली कुल कैलोरी का लगभग 55 फीसदी हिस्सा इन्हीं खाद्य पदार्थों से आता है।अक्तूबर 2023 में द ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में सामने आया कि दुनिया में करीब 14 फीसदी वयस्क और 12 फीसदी बच्चे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की लत के शिकार हो चुके हैं। चिंता की बात यह है कि लोगों में इन खाद्य पदार्थों के प्रति आकर्षण कुछ हद तक शराब और तंबाकू जैसी आदतों के बराबर बढ़ चुका है। जनवरी 2025 में जर्नल ऑफ ओबेसिटी एंड मेटाबॉलिक सिंड्रोम में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन के अनुसार अमेरिका में कुल ऊर्जा सेवन का 57.5 फीसदी हिस्सा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से आता है, जबकि ब्रिटेन में यह 56.8 फीसदी, कनाडा में 46.8 फीसदी और ऑस्ट्रेलिया में करीब 42 फीसदी है। भारत और अन्य विकासशील देशों में भी इन खाद्य उत्पादों की खपत लगातार बढ़ रही है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि 65 वर्ष से कम उम्र के लोगों और कम वजन वाले व्यक्तियों में इसका असर अधिक स्पष्ट दिखता है।

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