चिंताजनक: ई-वेस्ट कुप्रबंधन से पर्यावरण ही नहीं कीमती खनिज भी हो रहे नष्ट, समुचित डाटा भी सार्वजनिक नहीं

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चिंताजनक: ई-वेस्ट कुप्रबंधन से पर्यावरण ही नहीं कीमती खनिज भी हो रहे नष्ट, समुचित डाटा भी सार्वजनिक नहीं: ताजा अपडेट

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Meta Description: चिंताजनक: News: चिंताजनक: ई-वेस्ट कुप्रबंधन से पर्यावरण ही नहीं कीमती खनिज भी हो रहे नष्ट, समुचित डाटा भी सार्वजनिक नहीं – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।

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चिंताजनक:: मुख्य समाचार और अपडेट

चिंताजनक:: इलेक्ट्रॉनिक कचरा या ई-कचरा उन सभी विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तथा उनके हिस्सों से बनता है, जिन्हें उपयोग के बाद फेंक दिया जाता है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, टीवी, घरेलू उपकरण और औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स इसके प्रमुख स्रोत हैं। इनमें मौजूद कीमती धातुएं और खनिज यदि वैज्ञानिक तरीके से पुनर्प्राप्त न किए जाएं, तो वे पर्यावरणीय जोखिम पैदा करने के साथ आर्थिक नुकसान का कारण भी बनते हैं।रिपोर्ट के अनुसार ईपीआर मॉडल को ई-वेस्ट प्रबंधन की आधारशिला माना जाता है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था केवल चार धातुओं सोना, तांबा, लोहा और एल्युमिनियम की रिकवरी को अनिवार्य बनाती है। इसके चलते नियोडिमियम, डिस्प्रोसियम और लिथियम जैसी कई महत्वपूर्ण और महंगी धातुएं प्रणाली से बाहर रह जाती हैं और अंततः नष्ट हो जाती हैं। ये वही खनिज हैं जो बैटरी निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहनों और नवीकरणीय ऊर्जा तकनीकों के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं।टॉक्सिक लिंक का आकलन है कि इस अधूरे रिकवरी फ्रेमवर्क के कारण भारत अपने ही ई-वेस्ट से भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक संसाधन वापस हासिल नहीं कर पा रहा। अध्ययन में ई-वेस्ट नियमों की समीक्षा करते हुए उनके प्रभावी क्रियान्वयन में आ रही व्यावहारिक बाधाओं को रेखांकित किया गया है। उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी, ई-वेस्ट से जुड़े वित्तीय प्रवाह का सही हिसाब न होना और कमजोर निगरानी व्यवस्था जैसी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं।रिपोर्ट के अनुसार, ईपीआर पोर्टल पर समुचित डाटा उपलब्ध नहीं है। छोटे निर्माताओं, ऑनलाइन विक्रेताओं और ग्रे-मार्केट आयातकों को प्रणाली से बाहर रखा गया है, जिससे पूरे सेक्टर की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आ पाती। वित्त वर्ष 2023–24 और 2024–25 में अनुपालन न करने पर लगाए गए जुर्माने और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति से संबंधित जानकारी भी नहीं है।टॉक्सिक लिंक के एसोसिएट डायरेक्टर सतीश सिन्हा ने कहा कि ईपीआर भारत के ई-वेस्ट प्रबंधन ढांचे की बुनियाद जरूर है, लेकिन केवल सिद्धांत से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सकते। उनके अनुसार इसके साथ एक मजबूत कचरा संग्रह प्रणाली, अनौपचारिक क्षेत्र का एकीकरण, उच्च-तकनीक रीसाइक्लिंग सुविधाओं का विकास और व्यापक जन-जागरूकता अभियान जरूरी हैं, ताकि पूरे सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही लाई जा सके।

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