चिंताजनक: ग्रीन हाउस उत्सर्जन नहीं थमा तो भयावह संकट से जूझेगी दुनिया, 1.16 अरब लोग पर जोखिम

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चिंताजनक: ग्रीन हाउस उत्सर्जन नहीं थमा तो भयावह संकट से जूझेगी दुनिया, 1.16 अरब लोग पर जोखिम: ताजा अपडेट

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चिंताजनक:: मुख्य समाचार और अपडेट

चिंताजनक:: साल 2025 में ही दुनिया भर में 29.5 करोड़ से अधिक लोग भूख और भुखमरी का सामना कर चुके हैं। इसके पीछे युद्ध, विस्थापन, आर्थिक संकट और जलवायु परिवर्तन जैसे कारण रहे। लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि यह मौजूदा संकट आने वाले समय की तुलना में छोटा साबित हो सकता है। यदि मौजूदा उत्सर्जन रुझान जारी रहे, तो यह संकट केवल वर्तमान पीढ़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इस सदी के अंत तक पैदा होने वाले करोड़ों बच्चों और आने वाली पीढ़ियों को भी प्रभावित करेगा। यह शोध जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित हुआ है। इसमें एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई मॉडल का इस्तेमाल किया गया, जिसे अकाल पूर्व चेतावनी प्रणाली नेटवर्क से प्राप्त ऐतिहासिक खाद्य असुरक्षा आंकड़ों से प्रशिक्षित किया गया।जलवायु संबंधी जानकारी के लिए मासिक तापमान डेटा राष्ट्रीय समुद्री और वायुमंडलीय संचालन से लिया गया, जबकि वर्षा के आंकड़े क्लाइमेट हजार्डस सेंटर से जुटाए गए। मॉडल ने तापमान और बारिश में बदलाव को खाद्य संकट से जोड़ते हुए भविष्य का अनुमान लगाया। आम तौर पर ऐसे पूर्वानुमानों में आय, खाद्य कीमतें और सरकारी नीतियां भी शामिल की जाती हैं, लेकिन इस अध्ययन में मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन के सीधे प्रभाव पर फोकस किया गया।शोध के सबसे चिंताजनक निष्कर्षों में बच्चों की स्थिति सामने आई है। अनुमान है कि 2100 तक 60 करोड़ से अधिक बच्चे पांच साल की उम्र से पहले खाद्य असुरक्षा का अनुभव कर सकते हैं। इनमें से 20 करोड़ से ज्यादा नवजात शिशु अपने पहले ही साल में गंभीर जोखिम में होंगे। वैज्ञानिकों के अनुसार जिन क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन का असर सबसे तेज होगा, वहीं जनसंख्या वृद्धि भी अधिक है, जिससे बच्चों पर संकट कई गुना बढ़ जाता है।अध्ययन के मुताबिक अफ्रीका सबसे ज्यादा प्रभावित महाद्वीप होगा। साल 2099 तक अकेले अफ्रीका में लगभग 17 करोड़ लोग गंभीर भुखमरी और खाद्य संकट के खतरे में होंगे, जो इटली, फ्रांस और स्पेन की मौजूदा संयुक्त आबादी के बराबर है। अफ्रीका का हॉर्न क्षेत्र और साहेल जैसे इलाके विशेष रूप से संवेदनशील बताए गए हैं जहां सूखा, अनियमित बारिश और बढ़ता तापमान खेती और पशुपालन को बुरी तरह नुकसान पहुंचा सकते हैं।उत्सर्जन घटा तो बच सकते हैं करोड़ों लोग रिपोर्ट में साफ किया गया है कि हालात पूरी तरह हमारे हाथ में हैं। यदि देश जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल कम करें, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दें तो 2100 तक करीब 78 करोड़ लोगों को खाद्य संकट से बचाया जा सकता है। आक्रामक डिकार्बोनाइजेशन की स्थिति में 2090 से 2100 के बीच हर साल प्रभावित होने वाली औसत आबादी 8.9 करोड़ से घटकर 4.2 करोड़ रह सकती है। यानी सही नीतिगत फैसलों से वार्षिक संकट लगभग आधा किया जा सकता है।

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