तमिलनाडु सरकार का बड़ा फैसला: वन्यजीव सुरक्षा के लिए बनाया डार्क स्काई पार्क, जानें क्या होंगे इसके फायदे

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तमिलनाडु सरकार का बड़ा फैसला: वन्यजीव सुरक्षा के लिए बनाया डार्क स्काई पार्क, जानें क्या होंगे इसके फायदे: ताजा अपडेट

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तमिलनाडु: मुख्य समाचार और अपडेट

तमिलनाडु: रोशनी के प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।

तारों और ग्रहों को साफ देखने की सुविधा मिलेगी।

तमिलनाडु: घटना का पूरा विवरण

एस्ट्रो-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।

स्थानीय पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ेगी।

वैज्ञानिक अध्ययन और खगोल विज्ञान में रुचि बढ़ेगी।

राज्य के पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुप्रिया साहू ने बताया कि सरकार अब तकनीक और समुदाय की भागीदारी के साथ संरक्षण की नई रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा में स्थानीय लोगों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसी सोच के तहत कई नई योजनाएं शुरू की गई हैं, जिनसे पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों को भी लाभ मिल रहा है।तमिलनाडु के नामक्कल जिले की कोल्ली हिल्स स्थित अरियूर शोला में राज्य का पहला डार्क स्काई पार्क बनाया गया है। लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस पार्क का उद्देश्य रोशनी के प्रदूषण को कम करना और एस्ट्रो-टूरिज्म को बढ़ावा देना है। यहां आधुनिक टेलिस्कोप लगाए गए हैं, जिनकी मदद से लोग तारों और आकाशीय पिंडों को साफ देख सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और लोगों में विज्ञान और प्रकृति के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।वन्यजीवों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कोयंबटूर के मदुक्कराई क्षेत्र में एआई आधारित ड्रोन निगरानी यूनिट शुरू की गई है। करीब 8.67 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को तमिलनाडु अनमैन्ड एरियल व्हीकल कॉरपोरेशन के साथ मिलकर तैयार किया गया है। इस तकनीक के जरिए हाथियों की आवाजाही पर नजर रखी जाएगी। इसका उद्देश्य हाथियों और ट्रेनों की टक्कर को रोकना और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है।तमिलनाडु सरकार ने जंगल संरक्षण में स्थानीय समुदायों को भी महत्वपूर्ण भूमिका दी है। ‘ट्रेक तमिलनाडु’ पहल के तहत अक्टूबर 2024 से अब तक करीब 3.16 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है। इसमें से 73 लाख रुपये से अधिक राशि ईको-डेवलपमेंट कमेटियों को दी गई है। इन समितियों में आदिवासी और जंगल के आसपास रहने वाले लोग शामिल हैं, जो जंगलों की रक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं।सरकार मैंग्रोव जंगलों के संरक्षण के लिए पारंपरिक फिश-बोन कैनाल मॉडल को भी बढ़ावा दे रही है। इस मॉडल में मुख्य गहरी नहर और उससे जुड़ी छोटी शाखाओं के जरिए समुद्री पानी का प्रवाह बेहतर बनाया जाता है, जिससे मिट्टी की लवणता कम होती है और मैंग्रोव जंगलों का पुनरुत्थान होता है। इसके अलावा कर्नाटक और तमिलनाडु के जंगलों से केरल की ओर होने वाले हाथियों के वार्षिक प्रवास पर भी विभाग नजर रख रहा है ताकि उनके पारंपरिक रास्तों को सुरक्षित रखा जा सके।

संबंधित जानकारी (Background):
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