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Focus Keyword: पाकिस्तान
Meta Description: पाकिस्तान News: पाकिस्तान की AI साजिश बेनकाब: डीपफेक से भारत की छवि बिगाड़ने की कोशिश, बद्री 313 साइबर नेटवर्क का खुलासा – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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पाकिस्तान: मुख्य समाचार और अपडेट
पाकिस्तान: हाल में सोशल मीडिया पर सैन्य अधिकारियों के एआई उत्पन्न फोटो वीडियो की बाढ़ देखी गई है। इनमें सेना और वायुसेना प्रमुख समेत कई अधिकारियों को डीपफेक तकनीक से बने ऐसे बयान देते हुए दिखाया गया, जिनसे जनता के बीच भ्रम, असंतोष और संस्थाओं पर अविश्वास पैदा हो।
खुफिया जांच में सामने आया है कि पाकिस्तानी सेना की मीडिया इकाई डीजी-आईएसपीआर ने जनसंपर्क से आगे बढ़कर अत्याधुनिक डिजिटल प्रोपेगेंडा तंत्र शुरू किया है। अमर उजाला के पास पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के संरक्षण में चलने वाले गिरोह के प्रमुख सदस्यों के नाम, मोबाइल नंबर, फोटो, पते और कार्यप्रणाली का पूरा ब्यौरा है।पाकिस्तान के डिजिटल ऑपरेटिव गिरोह के प्रमुख सदस्यों में नूर अब्बास मिर्जा, हफसा मलिक, मोहसिन अली, जुनैद मुख्तार, वालिद चौधरी, शहीर हैदर जैसे कुछ नाम हैं। इनका काम समन्वित तरीके से भारत विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देना, फर्जी या एडिटेड वीडियो बनाकर भारतीय सैन्य अभियानों को गलत ढंग से पेश करना, आतंकी घटनाओं को उचित ठहराना, पुरानी फुटेज को नए घटनाक्रम से जोड़ना और जम्मू-कश्मीर पर भ्रामक सामग्री फैलाना है।पाकिस्तानी खुफिया तंत्र के संरक्षण में बद्री 313 साइबर फोर्स नाम का नेटवर्क भी बनाया गया है। यह नेटवर्क पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान की आलोचना करने वाले पत्रकारों, राजनीतिक टिप्पणीकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए समन्वित डिजिटल दमन व हेरफेर करता है।सूत्रों का कहना है कि यह इकाइयां विदेश में भारत-विरोधी नैरेटिव फैलाती हैं और पाकिस्तान में असंतोष व आलोचना वाली आवाजों को दबाती हैं। पाकिस्तानी सेना की आलोचना करने वाले अकाउंट की पोस्ट पर यह ऑपरेटिव हजारों फेक क्लिक या बॉट कमेंट जोड़ देते हैं। इससे लक्षित अकाउंट के व्यू कृत्रिम रूप से बढ़ जाते हैं। इससे सोशल मीडिया साइट का स्वचालित मॉडरेशन अल्गोरिद्म उस अकाउंट को फर्जी मान बैठता है।इस बॉट गतिविधि का उपयोग कर यह आलोचना करने वाले अकांउट पर बैन लगवा देते हैं। सूत्रों के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बद्री की इसी कारस्तानी के कारण 29 यूट्यूब वीडियो, 3 वेबसाइटें, 6 इंस्टाग्राम हैंडल, 141 एक्स थ्रेड और 10 फेसबुक पोस्ट स्वतः रिपोर्ट और ब्लॉक हो गईं।हाल में सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी को यह कहते हुए दिखाया गया कि ईरान के युद्धपोत की मौजूदगी की सूचना भारत ने ही इस्राइल को दी थी, क्योंकि इस्राइल के साथ हुए समझौते का कारण यह सूचना देना भारत का कर्तव्य था। पीआईबी फैक्ट चेक यूनिट ने इसको फर्जी बताकर इसका खंडन किया, लेकिन ईरानी मीडिया ने सच मानकर प्रकाशित कर डाला।फर्जी वीडियो बनाने वाले काम का पहला चरण कंटेंट सोर्सिंग होता है। इसमें वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के सार्वजनिक भाषण, इंटरव्यू और प्रेस ब्रीफिंग व्यवस्थित रूप से इकट्ठी की जाती हैं। इसके बाद इन क्लिप को छोटे हिस्सों में तोड़कर ऐसी बातों के साथ जोड़ा जाता है, जिनका मूल संदर्भ से लेना-देना नहीं होता। दूसरे चरण में एडिटिंग और मैनिपुलेशन का काम होता है।डीपफेक और वॉइस क्लोनिंग टूल का इस्तेमाल किया जाता है। इससे वीडियो में दिख रहे अधिकारी की आवाज व हावभाव वास्तविक लगती हैं। आम दर्शक के लिए असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण एम्प्लीफिकेशन होता है। इसमें फर्जी वीडियो को सैकड़ों सोशल मीडिया अकाउंट और हैंडल एक साथ शेयर करते हैं।
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