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Meta Description: बंगाल News: बंगाल एसआईआर : मतदाताओं की सुनवाई की समयसीमा खत्म, अंतिम तारीख बढ़ाने को लेकर असमंजस – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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बंगाल: मुख्य समाचार और अपडेट
बंगाल: पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़ी दावों और आपत्तियों पर सुनवाई की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है, लेकिन कई इलाकों में प्रक्रिया पूरी न होने के कारण स्थिति अब भी साफ नहीं हो पाई है। राज्य के तीन निर्वाचन जिलों की लगभग 15 विधानसभा सीटों पर सुनवाई लंबित है, जिससे समय-सीमा बढ़ाने को लेकर असमंजस बना हुआ है।
पिछले साल दिसंबर में ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने पर 58,20,899 मतदाताओं के नाम हटाए गए थे।
बंगाल: घटना का पूरा विवरण
हटाए गए मतदाताओं को मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट के रूप में चिह्नित किया गया था।
14 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद ही यह साफ होगा कि कुल कितने नाम हटे।
अंतिम सूची के प्रकाशन के बाद चुनाव आयोग का पूर्ण पीठ पश्चिम बंगाल का दौरा करेगा।
बंगाल: निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
दौरे के दौरान आयोग राजनीतिक और चुनावी हालात का आकलन करेगा।
इसके बाद ही विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान किया जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ), पश्चिम बंगाल, मनोज कुमार अग्रवाल ने सुनवाई की प्रक्रिया के लिए सात दिन का अतिरिक्त समय मांगा है। हालांकि, कोलकाता स्थित सीईओ कार्यालय को अब तक नई दिल्ली में चुनाव आयोग (ईसीआई) मुख्यालय से इस संबंध में कोई जवाब नहीं मिला है।सीईओ कार्यालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, भ्रम की स्थिति दो वजहों से बनी है। पहली, अगर समय-सीमा बढ़ाई जाती है तो नई अंतिम तारीख क्या होगी? दूसरी, यह विस्तार केवल उन्हीं 15 विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित रहेगा, जहां सुनवाई पूरी नहीं हो पाई है या फिर पूरे राज्य के लिए समय-सीमा बढ़ाई जाएगी?सूत्रों ने बताया कि अगर चुनाव आयोग पूरे राज्य के लिए समय-सीमा बढ़ाने का फैसला करता है, तो 14 फरवरी को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन में भी उसी अनुपात में देरी होगी। जिन 15 विधानसभा क्षेत्रों में सुनवाई अब तक पूरी नहीं हो पाई है, वे मुख्य रूप से तीन निर्वाचन जिलों में आते हैं। इनमें अल्पसंख्यक बहुल मालदा, तटीय और सीमावर्ती दक्षिण 24 परगना और कोलकाता उत्तर शामिल हैं।इस बीच, एक बड़ी जानकारी सामने आई है कि 4 लाख से अधिक अतिरिक्त मतदाताओं की पहचान ऐसे लोगों के रूप में की गई है, जिनका नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। ये वे मतदाता हैं, जो दावों और आपत्तियों की सुनवाई के दौरान बार-बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद उपस्थित नहीं हुए।इन 4 लाख संभावित रूप से हटाए जाने वाले मतदाताओं में करीब 50 हजार ‘अनमैप्ड’ हैं और लगभग 3 लाख 50 हजार ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ वाले मामले हैं। अनमैप्ड मतदाता वे हैं, जो 2002 की मतदाता सूची से अपना संबंध साबित नहीं कर पाए, न खुद के माध्यम से और न ही वंश (प्रोजेनी) मैपिंग के जरिए। वहीं, लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी वाले मामलों में वंश मैपिंग के दौरान पारिवारिक विवरण में असामान्य गड़बड़ियां पाई गईं।
चुनाव आयोग 17 फरवरी को जारी करेगा तमिलनाडु की अंतिम मतदाता सूची
भारतीय चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि तमिलनाडु की फाइनल मतदाता सूची तय शेड्यूल के अनुसार 17 फरवरी को आधिकारिक तौर पर प्रकाशित की जाएगी। यह लिस्ट जिला कलेक्टर कार्यालयों, निगम कार्यालयों, मतदान केंद्रों और चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होगी।
एसआईआर प्रक्रिया के तहत पूरे राज्य में विशेष गहन रिवीजन प्रक्रिया के हिस्से के रूप में अधिकारियों ने वोटर लिस्ट का विस्तृत वेरिफिकेशन अभियान चलाया। पिछले साल 19 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई थी, जिसमें लोगों से फीडबैक और नए आवेदन मांगे गए थे। नागरिकों को अपनी एंट्री में जोड़ने, सुधार और बदलाव के लिए सोमवार तक का समय दिया गया था।
इसकी प्रतिक्रिया काफी अच्छी रही और पूरे राज्य में लगभग 34.75 लाख आवेदन जमा किए गए। इनमें नए रजिस्ट्रेशन, पते में बदलाव और व्यक्तिगत विवरण में सुधार के अनुरोध शामिल थे। चुनाव अधिकारियों ने कहा कि बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) जमीनी स्तर पर आवेदनों के वेरिफिकेशन में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं।
यह सुनिश्चित करने के लिए कि योग्य वोटरों को ही शामिल किया जाए, घर-घर जाकर जांच, डॉक्यूमेंट्स का निरीक्षण और फील्ड विजिट किए गए। आयोग के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत आवेदनों की पहले ही समीक्षा की जा चुकी है, और शेष वेरिफिकेशन मंगलवार तक पूरे होने की उम्मीद है। एक बार प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद अपडेटेड और फाइनल वोटर लिस्ट 17 फरवरी को सार्वजनिक की जाएगी।
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