बढ़ेगी वायुसेना की ताकत: 114 राफेल विमान खरीदने की तैयारी में भारत, देश में ही बनेंगे 80 फीसदी लड़ाकू विमान

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बढ़ेगी वायुसेना की ताकत: 114 राफेल विमान खरीदने की तैयारी में भारत, देश में ही बनेंगे 80 फीसदी लड़ाकू विमान: ताजा अपडेट

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Meta Description: बढ़ेगी News: बढ़ेगी वायुसेना की ताकत: 114 राफेल विमान खरीदने की तैयारी में भारत, देश में ही बनेंगे 80 फीसदी लड़ाकू विमान – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।

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बढ़ेगी: मुख्य समाचार और अपडेट

बढ़ेगी: रक्षा सूत्रों के अनुसार इस प्रस्ताव पर अगले सप्ताह रक्षा मंत्रालय की एक उच्चस्तरीय बैठक में विचार किया जा सकता है। मौजूदा क्षेत्रीय सुरक्षा हालात को देखते हुए यह परियोजना भारतीय वायुसेना की जरूरतों के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। फिलहाल वायुसेना के पास करीब 30 फाइटर स्क्वाड्रन ही सक्रिय हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन की है। ऐसे में नए लड़ाकू विमानों की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान-बांग्लादेश और पाकिस्तान-चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक नजदीकियों के चलते खतरे की धारणा और मजबूत हुई है। इस पृष्ठभूमि में 4.5 पीढ़ी से उन्नत मल्टीरोल लड़ाकू विमान के रूप में राफेल को वायुसेना की दीर्घकालिक जरूरतों के समाधान के तौर पर देखा जा रहा है।इस प्रस्ताव के तहत खरीदे जाने वाले 114 राफेल विमानों में से करीब 80 प्रतिशत विमानों का निर्माण भारत में किया जाना प्रस्तावित है। इसमें फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन और भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनियों के बीच सहयोग होगा। परियोजना के अंतर्गत भारतीय वायुसेना को 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर विमान मिलने की योजना है, जिनमें से अधिकांश निर्माण भारत में ही बनाए जाएंगे।यह सौदा पूरा होने पर भारतीय वायुसेना के पास कुल 150 राफेल विमान हो जाएंगे। इसके अलावा भारतीय नौसेना के पास भी 26 राफेल होंगे, जो खास तौर पर विमानवाहक पोत (एयरक्राफ्ट कैरियर) से उड़ान भरने के लिए अनुकूल होंगे।राफेल एक अत्याधुनिक 4.5 पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जो हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के मिशनों में सक्षम है। यह अत्याधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों और सटीक हथियार प्रणालियों से लैस है। इसकी मल्टीरोल क्षमता इसे किसी भी मौसम और जटिल परिस्थितियों में प्रभावी बनाती है।फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के 18 फरवरी को दिल्ली में प्रस्तावित एआई समिट में शामिल होने की उम्मीद है, और इससे पहले इस रक्षा सौदे पर चर्चा को अहम माना जा रहा है।

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