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Meta Description: बायो News: बायो गैस प्लांट : कचरे से कमाई, गैस किल्लत की हुई विदाई, हर महीने लाखों की हो रही बचत – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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बायो: मुख्य समाचार और अपडेट
बायो: मिठाई कारोबार में गोबर से बनी आत्मनिर्भरता
मिठाई कारोबारी चंदन गुप्ता आठ वर्षों से बायो गैस का सफल उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सफेदाबाद स्थित अपनी डेयरी में कामधेनु योजना के तहत शुरुआत में 50-60 गायें रखी थीं, जिनकी संख्या अब 300 पार कर गई है। इन्ही गायों के गोचर और अन्य कार्बनिक पदार्थों के जरिये संचालित बायो गैस प्लांट से उन्हें रोजाना पांच से छह व्यावसायिक सिलिंडर के बराबर गैस मिल रही है।
बायो: घटना का पूरा विवरण
चंदन गुप्ता ने बताया कि उनका आधा काम प्राकृतिक गैस पर निर्भर है। इससे दूध गर्म करने और खोया ओटने जैसे भारी काम आसानी से हो जाते हैं। इसके अलावा, इसी गैस से छोटा जनरेटर भी चलाया जाता है। हालांकि, चाट पकौड़ी जैसे तेज आंच वाले काउंटरों के लिए अब भी एलपीजी की जरूरत पड़ती है, लेकिन बायोगैस ने लागत में भारी कटौती की है। वर्तमान में इस क्षमता के प्लांट की कीमत करीब 20-25 लाख रुपये है।
गोबर की कमी, बंद करना पड़ा प्लांट
गत्ता फैक्ट्री चलाने वाल बंधरा के उद्यमी गौरव भाटिया का अनुभव अलग है। बताया कि उन्होंने बायो गैस प्लांट लगाया था, लेकिन गोबर की उपलब्धता न होने से तीन साल पहले इसे बंद करना पड़ा। गौरव के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों से गोबर मंगवाना कठिन और खर्चीला काम है। मांग बढ़ने पर रेट तय होने के बावजूद समय पर उपलब्धता नहीं हो पाता। इसी किल्लत से उन्हें बायोगैस छोड़कर वापस एलपीजी और इलेक्ट्रिक व्यवस्था पर शिफ्ट होना पड़ा।
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