भाजपाई गुटों में फायरिंग: सुरक्षा पर उठे सवाल, मिशन 2027 में पार्टी पर भारी न पड़ जाए भाजपाइयों की लड़ाई

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भाजपाई गुटों में फायरिंग: सुरक्षा पर उठे सवाल, मिशन 2027 में पार्टी पर भारी न पड़ जाए भाजपाइयों की लड़ाई: ताजा अपडेट

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Meta Description: भाजपाई News: भाजपाई गुटों में फायरिंग: सुरक्षा पर उठे सवाल, मिशन 2027 में पार्टी पर भारी न पड़ जाए भाजपाइयों की लड़ाई – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।

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भाजपाई: मुख्य समाचार और अपडेट

भाजपाई: अलीगढ़ में भाजपा संगठन गुटबाजी से जूझ रहा है। विवाद का स्तर मारपीट और फायरिंग तक पहुंच गया है। जिला इकाई, महानगर इकाई, मंडल इकाई से लेकर फ्रंटल संगठनों तक में पदों को लेकर मारामारी के हालात हैं। बृहस्पतिवार को भाजपाइयों में हुई मारपीट और फायरिंग की घटना भी इसी का परिणाम है। पिछले कुछ दिनों में ही भाजपाइयों में विवाद के कई मामले सामने आए हैं। इन विवादों की जानकारी प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व को है, लेकिन इस स्थिति पर काबू पाने के प्रयास नाकाफी दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों पर भी इस स्थिति का असर पड़ सकता है।

जिला और महानगर अध्यक्ष पद पर तैनाती को लेकर भाजपा नेतृत्व को काफी मंथन करना पड़ा था। इसका बड़ा कारण था पार्टी में चल रही गुटबाजी। दोनों ही प्रमुख पदों पर बदलाव के आसार दिखाई दे रहे थे, लेकिन जिले के कुछ कद्दावर नेता बदलाव नहीं चाहते थे और इन पदों पर तैनात नेताओं को ही पुन: जिम्मेदारी देने का दबाव बनाए हुए थे। पार्टी ने जिला अध्यक्ष पद पर कृष्णपाल सिंह लाला और महानगर अध्यक्ष पद पर इंजी. राजीव शर्मा की पुन: तैनाती कर दी।

भाजपाई: घटना का पूरा विवरण

गुटबाजी निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। अब महानगर और जिला की कार्यकारिणी, मोर्चा और प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पदों पर घोषणा होनी है। इसलिए वर्चस्व की लड़ाई भी शुरू हो गई है। बृहस्पतिवार को सराय हकीम में हुए विवाद में शामिल हर्षद हिंदू पर वर्तमान में भाजयुमो में महानगर मंत्री की जिम्मेदारी है। गोली लगने से घायल लोग भी संगठन में सक्रिय हैं।

शहर-कोल सीटों पर पड़ेगा सीधा असर

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अलीगढ़ शहर और कोल विधानसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को अपने प्रतिबंध प्रत्याशियों से कांटे की टक्कर रहती है। इन दोनों सीटों पर हार जीत का अंतर ज्यादा नहीं रहता। कई चुनाव में धुव्रीकरण का माहौल भी रहा है, हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव में भी कांटे की टक्कर रही और वोटों के बहुत कम अंतर से भाजपा प्रत्याशी सतीश गौतम तीसरी बार सांसद चुने गए। गुटबाजी के चलते शहर और कोल विधानसभा सीटों पर भाजपा को कई बार हार का सामना करना पड़ा है।

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