मौत के बाद वसीयत: फर्जीवाड़े के खेल में फंसे उप निबंधक, निलंबन की लटकी तलवार; DM की जांच में सामने आया सच

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मौत के बाद वसीयत: फर्जीवाड़े के खेल में फंसे उप निबंधक, निलंबन की लटकी तलवार; DM की जांच में सामने आया सच: ताजा अपडेट

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मरणोपरांत वसीयतों के पंजीकरण में हुए खेल पर प्रशासन की जांच ने मुहर लगा दी है। उप निबंधक तृतीय (सब रजिस्ट्रार) राकेश यादव संयुक्त समिति की जांच में दोषी पाए गए हैं। जिलाधिकारी अरविंद एम बंगारी ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन को पत्र लिखकर उनके विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई और निलंबन की संस्तुति की जाएगी।

मौत के: घटना का पूरा विवरण

अमर उजाला ने मरणोपरांत वसीयत पंजीकरण में गड़बड़ियों का पर्दाफाश किया था। संज्ञान लेकर डीएम ने पहले सहायक महानिरीक्षक योगेश कुमार और फिर एडीएम (वित्त) शुभांगी शुक्ला और एसडीएम सदर सचिन राजपूत की संयुक्त टीम से मामले की गहराई से जांच कराई। जांच में सामने आया कि राकेश यादव ने रजिस्ट्रेशन एक्ट और स्पष्ट शासनादेशों को ताक पर रखकर मरणोपरांत वसीयतों का पंजीकरण किया। सहायक महानिरीक्षक योगेश कुमार की जांच में उप निबंधक के विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि की संस्तुति की गई।

डीएम को भेजी गई संयुक्त समिति की जांच रिपोर्ट में सख्त कार्रवाई की संस्तुति की गई। जिलाधिकारी ने बताया कि उप निबंधक ने शासनादेश का उल्लंघन कर पद का दुरुपयोग किया है। न्यायिक विवादों को जन्म दिया है। उप निबंधक के विरुद्ध विभागीय जांच कराई जाएगी। जांच में चार वसीयतों के पंजीकरण में शासनादेश उल्लंघन के आरोप साबित हुए हैं।

बाबू से अफसर बने, शिकायतों का लगा अंबार

राकेश यादव मूल रूप से लिपिक संवर्ग से पदोन्नत होकर तीन साल पहले उप निबंधक बने थे। उनका तीन वर्षों का कार्यकाल विवादों और शिकायतों से भरा रहा है। उनके खिलाफ 10 से अधिक शिकायतें डीएम से लेकर मुख्यमंत्री तक पहुंचीं। भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग तक के आरोप लगे। कई बार शिकायत सही पाए जाने के बावजूद वे रसूख के कारण कार्रवाई से बचते रहे। आरोप हैं कि उन्होंने जानबूझकर संवेदनशील मामलों में नियमों की अनदेखी की और भूमि हस्तांतरण में जटिलताएं पैदा कीं।

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