विश्व पुस्तक मेला: वरिष्ठ पत्रकार यशवंत व्यास ने किया ‘चेहरे के अंदर का आकाश’ का विमोचन

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विश्व पुस्तक मेला: वरिष्ठ पत्रकार यशवंत व्यास ने किया 'चेहरे के अंदर का आकाश' का विमोचन: ताजा अपडेट

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Meta Description: विश्व News: विश्व पुस्तक मेला: वरिष्ठ पत्रकार यशवंत व्यास ने किया ‘चेहरे के अंदर का आकाश’ का विमोचन – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।

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विश्व: विमोचन अवसर पर यशवंत व्यास ने कहा कि अनुवाद केवल शब्दों का रूपांतरण नहीं होता, बल्कि वह मूल रचना की आत्मा को दूसरी भाषा में जीवित रखने की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि डॉ. इंदु प्रभा देवी जिन संवेदनाओं, विचारों और अनुभवों को व्यक्त करना चाहती थीं, अर्जुन निराला ने उन्हें उसी भाव के साथ हिंदी में प्रस्तुत किया है। यह अनुवाद सहज, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली है। उन्होंने मूल लेखिका, अनुवादक और प्रकाशक देश निर्मोही को इस साहित्यिक प्रयास के लिए बधाई दी।नेपाली और पूर्वोत्तर साहित्य को मिलेगी पहचानयशवंत व्यास ने उम्मीद जताई कि इस तरह की कृतियां नेपाली और पूर्वोत्तर भारत में रचे जा रहे साहित्य को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में सहायक होंगी। उन्होंने साहित्यिक अनुवाद पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भाषाई विविधता को समझने और जोड़ने के लिए अनुवाद का कार्य और अधिक व्यापक स्तर पर किया जाना चाहिए।इस अवसर पर आधार प्रकाशन के देश निर्मोही ने कहा कि नेपाली और पूर्वोत्तर भाषाओं में लिखा जा रहा साहित्य विचार, संवेदना और अनुभव की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। उन्होंने कहा कि इस साहित्य को हिंदी पाठकों तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है और आधार प्रकाशन भविष्य में भी ऐसे अनुवाद कार्यों को प्रोत्साहित करता रहेगा।लेखिका डॉ. इंदु प्रभा देवी ने कहा कि ‘चेहरे के अंदर का आकाश’ क्यों लिखा गया और इसमें किस तरह की छवियों को उकेरने का प्रयास किया गया है, इसका उत्तर उपन्यास स्वयं देता है। उन्होंने बताया कि यह कृति एक उच्च शिक्षित युवा के जीवन की कथा है, जिसे उन्होंने लॉकडाउन के लंबे और आत्ममंथन भरे समय में लिखा।‘चेहरे के अंदर का आकाश’ शिक्षित पात्रों की जीवनशैली के माध्यम से आधुनिक चेतना को अभिव्यक्त करता है। उत्तर-पूर्वांचल भारत के भाव-परिवेश में रचागया यह उपन्यास राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय युगबोध को समेटे हुए है। विभिन्न जातियों और पृष्ठभूमियों से आए पात्र सहअस्तित्व और सामूहिक जीवन के आदर्श को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत करते हैं, जिससे यह कृति समकालीन समाज का एक संवेदनशील साहित्यिक दस्तावेज बन जाती है।नेपाली भाषा के उपन्यास का हिंदी अनुवाद करने वाले अर्जुन निराला ने कहा, मुझे अनुवाद करना अच्छा लगता है। पूर्वोत्तर में बहुत बेहतरीन साहित्य सृजन का काम हो रहा है। मैं खुद पूर्वोत्तर का रहने वाला हूं। मेरी दिली तमन्ना है कि पूर्वोत्तर में जो बेहतरीन साहित्य रचा जा रहा है, उसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाऊं। धीरे-धीरे मैं उसमें सफल भी हो रहा हूं। उल्लेखनीयहै कि अर्जुन निराला असम के तिनसुकिया जिले के लखीपथार गांव के मूल निवासी हैं।

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