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सियासत: ‘ये लोग भारतीय नागरिक, फिर भी उनके साथ…’, असम में ड्राइवर विवाद पर बोले ओवैसी; मोदी सरकार को भी घेरा

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सियासत: 'ये लोग भारतीय नागरिक, फिर भी उनके साथ...', असम में ड्राइवर विवाद पर बोले ओवैसी; मोदी सरकार को भी घेरा: ताजा अपडेट

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सियासत:: मुख्य समाचार और अपडेट

सियासत:: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को असम में मुस्लिम ऑटो ड्राइवरों के साथ भेदभाव और मोदी सरकार की ग्यारह साल की नीतियों पर कड़ी आलोचना की। उन्होंने एक साथ कई मामलों को लेकर सवाल उठाया कि कैसे देश को सुपरपावर बनाने की बातें होती हैं, लेकिन आम नागरिक, गरीब और अल्पसंख्यक अधिकारों से वंचित रहते हैं। ओवैसी ने यह भी कहा कि पीएम मोदी के शब्दों में भरोसे और समानता की कमी की चिंता साफ झलकती है।

इस दौरान ओवैसी ने असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के बयान की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मुस्लिम ऑटो ड्राइवरों के खिलाफ भेदभावपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा अगर ऑटो का किराया पांच रुपये है और उसमें ‘मिया’ ड्राइवर है, तो सिर्फ चार रुपये दो। बता दें कि यहां ‘मिया’ शब्द उन बंगाली मुस्लिमों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो 150–200 साल पहले ब्रिटिश शासन के दौरान खेती और मजदूरी के लिए असम लाए गए थे।

सियासत:: घटना का पूरा विवरण

ओवैसी ने सवाल उठाया कि ये लोग भारतीय नागरिक हैं और फिर भी उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र और भाजपा से पूछा कि अगर देश को विकसित बनाना है, सुपरपावर बनाना है, तो क्या एक ऑटो ड्राइवर को उसका पूरा किराया देने में इतना मुश्किल है?इस दौरान ओवैसी ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछले ग्यारह वर्षों में देशवासियों को विश्वास और विकास नहीं, बल्कि संशय और भय मिला। ओवैसी ने कहा कि देश को सच्चाई और भरोसा चाहिए था। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने संदेह और झूठ को आम कर दिया। गरीबों को गरीबी और अपमान के अलावा कुछ नहीं मिला। ओवैसी का मानना है कि मोदी सरकार ने देश को सुपरपावर बनने की दिशा में आगे नहीं बढ़ाया, बल्कि आम लोगों के लिए कठिनाई बढ़ाई।

शिक्षा और अल्पसंख्यक छात्र मामले में क्या बोले ओवैसी?

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ओवैसी ने इस दौरान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों का जिक्र किया। ओवैसी ने कहा कि इस नियम के खिलाफ काफी हंगामा हुआ। केंद्र सरकार इसे सुप्रीम कोर्ट में सही साबित नहीं कर पाई और कोर्ट ने अस्थायी रोक लगा दी। ओवैसी ने चेतावनी दी कि अगर यही रवैया जारी रहा, तो SC/ST अत्याचार अधिनियम तक खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के समर्थन में खड़े लोग भी कभी-कभी गलत बातें बोल देते हैं। उदाहरण के तौर पर उन्होंने एक वीडियो का जिक्र किया, जिसमें धर्मेंद्र प्रधान मंत्री के खिलाफ गलत बातें बोली गईं। ओवैसी ने कहा कि यह सही नहीं है।

सियासत:: निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

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उत्तराखंड में दीपक कुमार का उठाया मामला

इसके साथ ही ओवैसी ने उत्तराखंड के एक मामले का जिक्र किया, जिसमें एक हिन्दू युवक दीपक कुमार को निशाना बनाया गया। दीपक ने एक 70 साल पुराने वकील की दुकान पर लगी ‘बाबा’ की लिखावट को हटाने का विरोध किया। इस मामले में कुछ बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने दुकान से नाम हटाने की मांग की। दीपक ने कहा कि दुकान तीस साल से है, नाम हटाना संभव नहीं। इसके बाद पुलिस ने दीपक के खिलाफ केस दर्ज कर दिया। ओवैसी ने सवाल उठाया कि दीपक ने ऐसा करके कौन सा अपराध किया? उन्होंने कहा कि गरीब और दबे-कुचले लोगों की मदद करना अपराध नहीं हो सकता।

संबंधित जानकारी (Background):
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