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Meta Description: सुधार News: सुधार या सियासत?: TCM के राज्य सेवाओं में ज्यादा पद सृजन पर बवाल, BJP बोली- अधिकारियों को गुमराह कर रहीं ममता – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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सुधार: मुख्य समाचार और अपडेट
सुधार: पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य की राजनीति में गर्माहट तेज हो गई है। इसी बीच भाजपा ने गुरुवार को राज्य की सीएम ममता बनर्जी की उस घोषणा की कड़ी आलोचना की, जिसमें राज्य सरकार ने स्टेट कॉन्स्टीट्यूटेड सर्विसेज में अतिरिक्त पद (पोस्ट) बनाने का फैसला किया है। भाजपा के आईटी सेल प्रमुख और पश्चिम बंगाल के केंद्रीय पर्यवेक्षक अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर राज्य सरकार के इस पर फैसले पर तीखा हमला करते हुए सवाल उठाए हैं।
बता दें कि बुधवार को ममता बनर्जी ने घोषणा की थी कि राज्य कैबिनेट ने नौ स्टेट कॉन्स्टीट्यूटेड सर्विसेज में विभिन्न वेतन स्तरों पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त पद बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा था कि इस फैसले का मकसद वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और विभिन्न सेवाओं के बीच समानता (पैरिटी) लाना है। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि अन्य स्टेट कॉन्स्टीट्यूटेड सर्विसेज में भी इसी तरह के कदम उठाने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है।मालवीय ने कहा कि यह कदम असल सुधार नहीं, बल्कि राज्य सिविल सेवा (WBCS एग्जीक्यूटिव) अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस फैसले को ऐतिहासिक सुधार के रूप में पेश कर रही है, लेकिन यह बहुत कम और बहुत देर से उठाया गया कदम है। मालवीय का कहना है कि सरकार केवल ढांचे में छोटे-मोटे बदलाव दिखाकर सुधार का माहौल बनाना चाहती है, जबकि असली समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों को लंबे समय से वित्तीय नुकसान झेलना पड़ रहा है। पदोन्नति (प्रमोशन) में देरी हो रही है। प्रशासनिक असुरक्षा बनी हुई है।मालवीय ने राज्य सरकार पर लंबित महंगाई भत्ता का भुगतान न करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक एंट्री लेवल WBCS (Exe) अधिकारी को डीए न मिलने से हर साल लगभग 2.82 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। स्पेशल सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी को करीब 8.88 लाख रुपये सालाना का नुकसान उठाना पड़ रहा है। मालवीय ने जोर देते हुए कहा कि जब तक डीए का बकाया भुगतान नहीं किया जाता, तब तक सेवा सुधार के दावे खोखले लगते हैं।मालवीय ने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में आईएएस पद पर प्रमोशन में अन्य राज्यों की तुलना में असामान्य देरी होती है। उन्होंने कहा कि कई अधिकारी 56 वर्ष की आयु पार कर लेने के कारण प्रमोशन के लिए अयोग्य हो जाते हैं। इससे लगभग आधे बैच के अधिकारी प्रमोशन से वंचित रह जाते हैं और रिटायरमेंट के समय उन्हें आर्थिक नुकसान होता है।
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