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Weather:पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय, उत्तर-पश्चिम में तापमान गिरेगा; समुद्री इलाकों में बारिश का अलर्ट

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Weather:पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय, उत्तर-पश्चिम में तापमान गिरेगा; समुद्री इलाकों में बारिश का अलर्ट: ताजा अपडेट

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Weather:पश्चिमी: मुख्य समाचार और अपडेट

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मौसम विभाग के अनुसार, एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तर राजस्थान और उसके आसपास पंजाब व हरियाणा के इलाकों पर असर दिखा रहा है। यह प्रणाली जमीन से लगभग 3 से 7 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैली हुई है, जिसके चलते उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। इसी प्रभाव से कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश हुई है और आगे भी कहीं-कहीं हल्की बारिश या बर्फबारी की संभावना बनी हुई है। इसके साथ ही दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर बना चक्रवाती प्रसार अब उत्तर-पूर्व राजस्थान के आसपास पहुंच गया है। एक ट्रफ रेखा उत्तर कोंकण से गुजरात और पूर्वी राजस्थान होते हुए उत्तर-पूर्व राजस्थान तक फैली हुई है। इन सभी मौसमी प्रणालियों के कारण उत्तर-पश्चिम भारत में वातावरण अस्थिर बना हुआ है। उत्तराखंड में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बर्फबारी हो सकती है। ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड बढ़ने की संभावना है, ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। पूर्वोत्तर भारत के ऊपर उपोष्णकटिबंधीय पछुआ जेट स्ट्रीम लगभग 115 नॉट की रफ्तार से सक्रिय है, जिससे ऊपरी वायुमंडल में दबाव बन रहा है और मौसम में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है। विज्ञापन विज्ञापन

Weather:पश्चिमी: घटना का पूरा विवरण

द्वीपीय क्षेत्रों में बारिश, तेज हवाओं का अनुमान

भूमध्यरेखीय हिंद महासागर और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के पास बना कम दबाव का क्षेत्र धीरे-धीरे पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए श्रीलंका की ओर जा सकता है। इसके असर से दक्षिण भारत और द्वीपीय इलाकों में बारिश की संभावना जताई गई है। अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में 19 फरवरी को गरज-चमक के साथ बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके बाद 20 से 22 फरवरी के बीच तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल में भी कहीं-कहीं बारिश, बिजली गिरने और तेज हवाओं का अनुमान है।

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समुद्री इलाकों में बिगड़ सकता है मौसम, मछुआरों को चेतावनी

Weather:पश्चिमी: निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

समुद्री क्षेत्रों में हालात और खराब हो सकते हैं। मन्नार की खाड़ी और कोमोरिन क्षेत्र के आसपास हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़कर 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और श्रीलंका के पूर्वी तट के पास 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है।

तापमान में जारी रहेगा उतार-चढ़ाव का दौर

उत्तर-पश्चिम भारत में अगले 48 घंटों के दौरान न्यूनतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है। इसके बाद करीब पांच दिनों तक तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, जिससे सुबह और रात की ठंड बढ़ने के आसार हैं। पूर्वी भारत में अगले दो दिनों तक न्यूनतम तापमान लगभग स्थिर रहेगा, उसके बाद इसमें 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है। महाराष्ट्र और गुजरात में भी आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान धीरे-धीरे 2 से 3 डिग्री तक बढ़ने का अनुमान है। अधिकतम तापमान की बात करें तो उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में अगले 24 घंटों में 2 से 4 डिग्री की गिरावट हो सकती है। इसके बाद दो दिनों तक तापमान बढ़ सकता है और फिर स्थिति सामान्य रहने की संभावना है। गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा में भी दो दिनों तक तापमान स्थिर रहेगा, फिर धीरे-धीरे बढ़ सकता है।

मौसम विभाग के अनुसार, एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तर राजस्थान और उसके आसपास पंजाब व हरियाणा के इलाकों पर असर दिखा रहा है। यह प्रणाली जमीन से लगभग 3 से 7 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैली हुई है, जिसके चलते उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। इसी प्रभाव से कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश हुई है और आगे भी कहीं-कहीं हल्की बारिश या बर्फबारी की संभावना बनी हुई है। इसके साथ ही दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर बना चक्रवाती प्रसार अब उत्तर-पूर्व राजस्थान के आसपास पहुंच गया है। एक ट्रफ रेखा उत्तर कोंकण से गुजरात और पूर्वी राजस्थान होते हुए उत्तर-पूर्व राजस्थान तक फैली हुई है। इन सभी मौसमी प्रणालियों के कारण उत्तर-पश्चिम भारत में वातावरण अस्थिर बना हुआ है। उत्तराखंड में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बर्फबारी हो सकती है। ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड बढ़ने की संभावना है, ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। पूर्वोत्तर भारत के ऊपर उपोष्णकटिबंधीय पछुआ जेट स्ट्रीम लगभग 115 नॉट की रफ्तार से सक्रिय है, जिससे ऊपरी वायुमंडल में दबाव बन रहा है और मौसम में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है।भूमध्यरेखीय हिंद महासागर और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के पास बना कम दबाव का क्षेत्र धीरे-धीरे पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए श्रीलंका की ओर जा सकता है। इसके असर से दक्षिण भारत और द्वीपीय इलाकों में बारिश की संभावना जताई गई है। अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में 19 फरवरी को गरज-चमक के साथ बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके बाद 20 से 22 फरवरी के बीच तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल में भी कहीं-कहीं बारिश, बिजली गिरने और तेज हवाओं का अनुमान है।ये भी पढ़ें: चिंताजनक: ग्रीन हाउस उत्सर्जन नहीं थमा तो भयावह संकट से जूझेगी दुनिया, 1.16 अरब लोग पर जोखिम समुद्री क्षेत्रों में हालात और खराब हो सकते हैं। मन्नार की खाड़ी और कोमोरिन क्षेत्र के आसपास हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़कर 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और श्रीलंका के पूर्वी तट के पास 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है।उत्तर-पश्चिम भारत में अगले 48 घंटों के दौरान न्यूनतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है। इसके बाद करीब पांच दिनों तक तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, जिससे सुबह और रात की ठंड बढ़ने के आसार हैं। पूर्वी भारत में अगले दो दिनों तक न्यूनतम तापमान लगभग स्थिर रहेगा, उसके बाद इसमें 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है। महाराष्ट्र और गुजरात में भी आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान धीरे-धीरे 2 से 3 डिग्री तक बढ़ने का अनुमान है। अधिकतम तापमान की बात करें तो उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में अगले 24 घंटों में 2 से 4 डिग्री की गिरावट हो सकती है। इसके बाद दो दिनों तक तापमान बढ़ सकता है और फिर स्थिति सामान्य रहने की संभावना है। गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा में भी दो दिनों तक तापमान स्थिर रहेगा, फिर धीरे-धीरे बढ़ सकता है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम ने करवट लेनी शुरू कर दी है। मौसम विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी हो सकती है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में अगले 48 घंटों के दौरान न्यूनतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है। दूसरी ओर दक्षिण भारत, अंडमान-निकोबार और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में कम दबाव के असर से बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है।

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