AI Summit: उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियां बोलीं- भारत बन सकता है एआई का पावरहाउस, तकनीक में बड़े निवेश की जरूरत

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AI Summit: उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियां बोलीं- भारत बन सकता है एआई का पावरहाउस, तकनीक में बड़े निवेश की जरूरत: ताजा अपडेट

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AI Summit:: मुख्य समाचार और अपडेट

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तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित होगा निवेश

AI Summit:: घटना का पूरा विवरण

अंबानी ने कहा, निवेश तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित होगा। पहला, जामनगर में गीगावॉट स्तर के एआई-रेडी डाटा सेंटर बनाएंगे। दूसरा, 10 गीगावॉट तक ग्रीन पावर का उपयोग होगा। तीसरा, जियो नेटवर्क से जुड़ा देशव्यापी एज-कंप्यूट सिस्टम बनेगा, जिससे कम समय में एआई सेवाएं मिल सकें। यह सट्टा निवेश नहीं, बल्कि देश निर्माण के लिए दीर्घकालिक पूंजी है। जियो इंटेलिजेंस के तहत बहुभाषी एआई, डाटा सुरक्षा, रोजगार सृजन व स्टार्टअप सहयोग पर जोर रहेगा। विज्ञापन विज्ञापन

एआई का अर्थव्यवस्था व समाज पर गहरा असर हर नागरिक तक पहुंचे फायदा : एन चंद्रशेखरन

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टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि एआई आने वाले समय की सबसे बड़ी बुनियादी व्यवस्था बनने जा रही है। जैसे पहले स्टीम इंजन, बिजली और इंटरनेट ने दुनिया को बदला, उसी तरह एआई भी अर्थव्यवस्था और समाज पर गहरा असर डालेगा। एआई इंटेलिजेंस का इन्फ्रास्ट्रक्चर है, जो भविष्य की दिशा तय करेगा।

AI Summit:: निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

चंद्रशेखरन ने जोर देते हुए कहा, एआई का फायदा देश के हर नागरिक तक पहुंचना चाहिए। हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि एआई हर व्यक्ति के लिए काम करे। एआई के औजार देश के आखिरी व्यक्ति तक और दुनिया के हर इन्सान तक पहुंचाए जाएं। उनके अनुसार, यही वह मिशन है जिस पर सभी को मिलकर काम करना चाहिए, ताकि एआई का लाभ समाज के हर वर्ग को मिल सके।

ओपनएआई के साथ मिलकर 100 मेगावाट क्षमता से शुरुआत

चंद्रशेखरन ने कहा, टाटा समूह देश का पहला बड़े स्तर का एआई अनुकूल डाटा सेंटर बना रहा है, जो नई पीढ़ी के एआई प्रशिक्षण और उपयोग के लिए तैयार होगा। ओपनएआई के साथ मिलकर 100 मेगावाट क्षमता से शुरुआत की जा रही है, जिसे आगे एक गीगावाट तक बढ़ाया जाएगा। इसका मकसद भारत को वैश्विक एआई हब के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा, टीसीएस और टाटा कम्युनिकेशन मिलकर उद्योगों के लिए एआई संचालन प्रणाली बना रहे हैं। लक्ष्य है कि एआई हर व्यक्ति और हर उद्योग तक पहुंचे। एआई से देश में समृद्धि लाई जाए।

एआई की ताकत समझने के साथ उसकी सीमाएं जानना भी जरूरी

एआई का प्रभावी उपयोग करने के लिए सिर्फ तकनीक की जानकारी काफी नहीं है, बल्कि उसकी सीमाओं को समझना भी जरूरी है। एआई से असली फायदा तभी मिलेगा, जब तकनीक और व्यापारिक जरूरतों के बीच की दूरी कम की जाएगी।

वियानाई सिस्टम्स के संस्थापक और सीईओ विशाल सिक्का ने कहा कि जो लोग एआई का सही इस्तेमाल जानते हैं, वे बेहद प्रभावी साबित हो रहे हैं। मेरे एक मित्र ने नौ महीने में एक बड़ी सार्वजनिक सेवा शुरू की थी, लेकिन बाद में उसी सेवा को जनरेटिव एआई की मदद से सिर्फ चार दिनों में फिर से तैयार कर लिया। इससे उत्पादकता 250 गुना बढ़ गई। एआई पुराने और जटिल सिस्टम को बदलने के साथ ही कंपनियों के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है।

नई मानव क्रांति का नेतृत्व कर सकता है भारत

उन्होंने कहा कि भारत उद्देश्यपूर्ण और जिम्मेदार एआई के जरिये नई मानव क्रांति का नेतृत्व कर सकता है। एआई के जरिये एक अरब उद्यमी सिर्फ आजीविका ही नहीं, बल्कि अर्थपूर्ण जीवन भी बना सकते हैं। मौजूदा एआई में वास्तविक समझ की कमी, सुरक्षा जोखिम और अधिक ऊर्जा खपत जैसी चुनौतियां हैं। इसलिए एआई को सुरक्षित, कुशल और जिम्मेदार बनाना जरूरी है।

एआई में दुनिया का बड़ा केंद्र बन सकता है भारत

विप्रो लिमिटेड के कार्यकारी चेयरमैन रिशद प्रेमजी ने कहा एआई एक ऐसी तकनीक है, जो पीढ़ी में एक बार आती है। आने वाले कुछ वर्षों में भारत जो फैसले करेगा, वही देश की आर्थिक दिशा और एक अरब से ज्यादा लोगों की समस्याएं सुलझाने की क्षमता तय करेंगे। भारत एआई में दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है। रिशद ने कहा, अब एआई पर चर्चा केवल संभावनाओं तक सीमित नहीं है। अब इसे बड़े स्तर पर लागू करने का समय है। तकनीक तभी मूल्य पैदा करती है, जब उसे जिम्मेदारी से असली समस्याओं के समाधान में लगाया जाए।

उन्होंने कहा, भारत सिर्फ एआई बनाने वाला देश नहीं, बल्कि इसे बड़े पैमाने पर लागू करने वाला देश भी बन सकता है। भारत की ताकत उसके प्रतिभाशाली युवाओं में है। आज करीब 6.5 लाख पेशेवर एआई से जुड़े काम कर रहे हैं और 2027 तक यह संख्या दोगुनी हो सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार 1 करोड़ युवाओं को एआई प्रशिक्षण देने की योजना पर काम कर रही है। एआई का सही और जिम्मेदार उपयोग किया गया तो भारत दुनिया में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

एआई को जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने और सर्वसुलभ बनाने का लिया संकल्प : वैष्णव

केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने समिट के निष्कर्षों की घोषणा करते कहा कि एआई से जुड़ी अग्रणी कंपनियों और भारत के नवोन्मेषकों ने नई दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट कमिटमेंट्स पर सहमति जताई है। इसके तहत एआई का पूरी जिम्मेदारी से इस्तेमाल करते हुए रोजगार और नीतिगत मुद्दों पर प्रभाव को लेकर समझ बनाई जाएगी। साथ ही, भाषा संबंधी बाध्यताओं को भी दूर किया जाएगा ताकि यह नई तकनीक सर्वसुलभ हो।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत एआई इम्पैक्ट समिट की सफलता का प्रमाण नई दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट प्रतिबद्धताएं है। इसके तहत दो मुख्य लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इनमें पहला, डाटा के माध्यम से रोजगार और आर्थिक बदलावों के लिए साक्ष्य-आधारित नीतियां बनाना और दूसरा एआई प्रणालियों को बहुभाषी और सांस्कृतिक रूप से सुदृढ़ बनाना है। यह पहल विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के लिए एआई को समावेशी और प्रासंगिक बनाने की दिशा में भारत के नेतृत्व को दर्शाती है।

वैष्णव ने कहा, ये प्रयास मिलकर ऐसे एआई के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं जो केवल शक्तिशाली ही नहीं बल्कि समावेशी, विकासोन्मुखी और वैश्विक रूप से प्रासंगिक भी हो। वैष्णव ने जोर देकर कहा कि अब एआई सिस्टम को केवल अंग्रेजी या किसी एक संस्कृति तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे भारत की विभिन्न भाषाओं और स्थानीय संदर्भों के हिसाब से परखा और सुधारा जाएगा। अब एआई का फायदा गांव के उस व्यक्ति को भी मिलेगा जो अपनी मातृभाषा में बात करना चाहता है।

एआई के जिम्मेदाराना विस्तार पर सार्थक चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया की बड़ी तकनीकी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदाराना विस्तार और वैश्विक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। इंडिया एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन के दौरान सीईओ राउंडटेबल में एआई, प्रौद्योगिकी और नवाचार जगत के विभिन्न हितधारक एक साथ आए।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा, चर्चा सार्थक और दूरदर्शी थी, जिसका मुख्य उद्देश्य एआई का जिम्मेदारी भरा विस्तार करना, वैश्विक सहयोग को मजबूत करना और विकास के अवसरों को खोलना था। बैठक की तस्वीरें साझा करते हुए पीएम ने कहा, मानव प्रगति और सतत विकास के लिए एआई का उपयोग करने की साझा प्रतिबद्धता को देखकर उत्साहजनक लगा।

मिस्ट्रल एआई के सीईओ व सह-संस्थापक आर्थर मेन्श ने एआई स्वायत्तता और खुले नवाचार के लिए सशक्त तर्क दिया। विकेंद्रीकरण और डिजिटल आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, एआई सशक्तीकरण का साधन होना चाहिए, प्रभुत्व का नहीं। देशों और क्षेत्रों को अपने एआई भविष्य का नियंत्रण स्वयं करना चाहिए, यह कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि डिजिटल स्वायत्तता की जरूरत है।

नीलेकणि ने बताया…कैसे काम करती है सरकार

इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने पीएम नरेंद्र मोदी की एआई को लेकर दूरदर्शी सोच की सराहना की है। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण एआई को सिर्फ तकनीकी क्षेत्र तक सीमित न रखकर कृषि और पशुपालन जैसे जमीनी क्षेत्रों तक पहुंचाने का है। अब एआई का इस्तेमाल गाय भैंस की सेहत की निगरानी के लिए भी किया जाएगा।

नीलेकणि ने उदाहरण देते हुए बताया कि 8 जनवरी को प्रधानमंत्री से हुई मुलाकात के दौरान किसानों के लिए एआई के उपयोग पर चर्चा हुई थी। इस बातचीत में प्रधानमंत्री नया और व्यावहारिक सुझाव देते हुए कहा, हम एआई को सिर्फ किसानों तक ही क्यों सीमित रखें? इसे गाय और पशुओं के लिए भी क्यों न इस्तेमाल किया जाए? अगर कोई गाय बीमार है, तो वह खुद नहीं बता सकती। ऐसे में एआई से इस समस्या का समाधान कैसे किया जा सकता है? उसी दिन अमूल व अन्य सहकारिता समूहों के साथ पीएमओ में बैठक हुई और एक महीने में 11 फरवरी को इससे जुड़ी एप्लीकेशन सरला बैन लाइव हो गई। इसमें चार करोड़ पशुओं को शामिल किया गया। इस एप के जरिये पशुओं की बीमारी, दुग्ध उत्पादन से जुड़ी जानकारी हासिल की जा रही है। नीलेकणि ने कहा, यह उस विजन को दर्शाता है, जिसमें एआई के जरिये खेती और डेयरी सेक्टर को सशक्त बनाने पर जोर दिया गया है। उन्होंने इसे एआई के व्यापक प्रसार की दिशा में एक अहम कदम बताया।

आठ साल के रणवीर सचदेवा एआई सम्मेलन में सबसे कम उम्र के वक्ता

आठ वर्षीय बाल एआई प्रौद्योगिकीविद रणवीर सचदेवा इंडिया एआई इम्पैक्ट सम्मेलन में सबसे कम उम्र के मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। रणवीर ने संबोधन में बताया कि प्राचीन भारतीय दर्शन को वह कैसे आधुनिक तकनीक से जोड़ रहे हैं।

रणवीर ने बताया, विभिन्न देश एआई विकास के लिए कैसा दृष्टिकोण अपना रहे हैं और भारत एआई निर्माण में कैसे आगे बढ़ रहा है। उन्होंने हाल में जारी अपने भारतीय एआई मॉडल के उपयोग के बारे में भी बताया। उन्होंने बताया कि अपने एआई मॉडल के माध्यम से वह भारत की जीडीपी में योगदान दे रहे हैं और एआई साक्षरता को बढ़ावा दे रहे हैं।

वर्ष 2017 में जन्मे रणवीर सचदेवा विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं। वह एआई विशेषज्ञ, वैश्विक लेखक और टेडएक्स वक्ता हैं। शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के पांच सफल वर्षों पर राष्ट्रीय समारोह में रणवीर को एआई और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के युग में नवाचार पर अपना दृष्टिकोण साझा करने के लिए बुलाया था। अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ उन्हें जिनेवा में एआई फॉर गुड ग्लोबल समिट में भी निमंत्रित कर चुका है।

भारत ने 1.4 अरब लोगों के लिए एआई के विस्तार की नींव रखी : ऋषि सुनक

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने सम्मेलन में वैश्विक प्रौद्योगिकी परिवर्तन में भारत की उल्लेखनीय स्थिति को रेखांकित किया। उन्होंने भारत को अर्थव्यवस्थाओं, समाज और मानव अस्तित्व को आकार देने वाली निर्णायक शक्ति बताया। कहा, भारत ने 1.4 अरब लोगों के लिए एआई के विस्तार की नींव रख दी है।

सुनक ने एआई के तीव्र विकास और उससे जुड़ी जिम्मेदारी पर केंद्रित सत्र का उद्घाटन करने के दौरान ब्लेचली पार्क (ब्रिटेन) में आयोजित पहले एआई सुरक्षा शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, एआई से कई काम किए जा सकते हैं लेकिन यह मानवीय अनुभव की जगह कभी नहीं ले सकता। फिर भी इसकी परिवर्तनकारी शक्ति अभूतपूर्व है। टेलीफोन को 10 करोड़ उपयोगकर्ताओं तक पहुंचने में 75 साल लगे, वहीं चैटजीपीटी ने केवल दो महीनों में यह उपलब्धि हासिल कर ली। बदलाव की गति इतिहास को फिर से लिख रही है।

एआई के लिए सब संभव पर दिल्ली का ट्रैफिक नहीं सुधार सकता

सुनक अपने सत्र में कुछ देरी से पहुंचे। उन्होंने पहुंचते ही माफी मांगी और तंज कसा-एआई सब कर सकता है पर दिल्ली का ट्रैफिक नहीं सुधार सकता। असल में वे जाम में फंस गए थे।सुनक ने देश के फलते-फूलते स्टार्टअप इकोसिस्टम, बढ़ते यूनिकॉर्न बेस और सर्वम एआई जैसे नवाचारों का हवाला देते हुए कहा कि एआई में असली प्रतिस्पर्धा केवल अत्याधुनिक आविष्कारों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर इसे अपनाने की है।

जिनेवा में होगा 2027 का समिट राष्ट्रपति बोले-हम उत्साहित

नई दिल्ली। स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन ने भारत के एआई शिखर सम्मेलन की सराहना करते हुए एलान किया कि उनका देश 2027 में जिनेवा में वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा, एआई बड़ा बदलाव लाने वाली ताकत है। इसे लेकर हम खासे उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि इस समिट से उनका देश नवाचार, शोध और डिजिटल नीति के वैश्विक केंद्र के तौर पर और मजबूत होगा।

सम्मेलन के दौरान स्विस राष्ट्रपति पार्मेलिन ने कहा कि यह आयोजन नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति स्विट्जरलैंड की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा। सी यू इन 2027 इन जिनेवा की पृष्ठभूमि में स्विस पैवेलियन में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने भारत आयोजित एआई समिट को ऐतिहासिक आयोजन करार दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई अपनी द्विपक्षीय बैठक को बेहद उम्दा कहा। यह बैठक भारत मंडपम में हुई। इस दौरान उन्होंने कहा कि एआई केवल तेजी या तकनीकी अनुप्रयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों के जीवन पर सीधा और गहरा प्रभाव डालने वाली ताकत है। अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि स्विट्जरलैंड जिम्मेदार एआई के इस्तेमाल, वैश्विक शासन और नियमन पर संवाद को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि एआई के फायदे सभी तक पहुंचें, इसके लिए सरकारों के बीच सहयोग और ज्ञान साझा करना बेहद जरूरी है।

सम्मेलन ने नए युग के लिए नैतिक दिशा तय की : शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सम्मेलन ने मोदी सरकार के नेतृत्व में हासिल की गई उपलब्धियों के आधार पर देश को नए युग में नेतृत्व के लिए तैयार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, वैश्विक नेताओं व प्रौद्योगिकी क्षेत्र के दिग्गजों के सबसे बड़े समूह की मेजबानी करते हुए भारत सार्वभौमिक खुशहाली और कल्याण के प्राचीन मंत्र के साथ नए युग की नैतिक दिशा निर्धारित कर रहा है। भारत का विश्व के प्रति वादा है कि वह नवाचार की अपनी अनंत शक्ति और लोकतंत्र की गहरी सांस्कृतिक जड़ों के जरिये मानवता की प्रगति की यात्रा को हमेशा ईंधन प्रदान करेगा।

अंबानी ने कहा, निवेश तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित होगा। पहला, जामनगर में गीगावॉट स्तर के एआई-रेडी डाटा सेंटर बनाएंगे। दूसरा, 10 गीगावॉट तक ग्रीन पावर का उपयोग होगा। तीसरा, जियो नेटवर्क से जुड़ा देशव्यापी एज-कंप्यूट सिस्टम बनेगा, जिससे कम समय में एआई सेवाएं मिल सकें। यह सट्टा निवेश नहीं, बल्कि देश निर्माण के लिए दीर्घकालिक पूंजी है। जियो इंटेलिजेंस के तहत बहुभाषी एआई, डाटा सुरक्षा, रोजगार सृजन व स्टार्टअप सहयोग पर जोर रहेगा।टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि एआई आने वाले समय की सबसे बड़ी बुनियादी व्यवस्था बनने जा रही है। जैसे पहले स्टीम इंजन, बिजली और इंटरनेट ने दुनिया को बदला, उसी तरह एआई भी अर्थव्यवस्था और समाज पर गहरा असर डालेगा। एआई इंटेलिजेंस का इन्फ्रास्ट्रक्चर है, जो भविष्य की दिशा तय करेगा।चंद्रशेखरन ने जोर देते हुए कहा, एआई का फायदा देश के हर नागरिक तक पहुंचना चाहिए। हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि एआई हर व्यक्ति के लिए काम करे। एआई के औजार देश के आखिरी व्यक्ति तक और दुनिया के हर इन्सान तक पहुंचाए जाएं। उनके अनुसार, यही वह मिशन है जिस पर सभी को मिलकर काम करना चाहिए, ताकि एआई का लाभ समाज के हर वर्ग को मिल सके।चंद्रशेखरन ने कहा, टाटा समूह देश का पहला बड़े स्तर का एआई अनुकूल डाटा सेंटर बना रहा है, जो नई पीढ़ी के एआई प्रशिक्षण और उपयोग के लिए तैयार होगा। ओपनएआई के साथ मिलकर 100 मेगावाट क्षमता से शुरुआत की जा रही है, जिसे आगे एक गीगावाट तक बढ़ाया जाएगा। इसका मकसद भारत को वैश्विक एआई हब के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा, टीसीएस और टाटा कम्युनिकेशन मिलकर उद्योगों के लिए एआई संचालन प्रणाली बना रहे हैं। लक्ष्य है कि एआई हर व्यक्ति और हर उद्योग तक पहुंचे। एआई से देश में समृद्धि लाई जाए।एआई का प्रभावी उपयोग करने के लिए सिर्फ तकनीक की जानकारी काफी नहीं है, बल्कि उसकी सीमाओं को समझना भी जरूरी है। एआई से असली फायदा तभी मिलेगा, जब तकनीक और व्यापारिक जरूरतों के बीच की दूरी कम की जाएगी।वियानाई सिस्टम्स के संस्थापक और सीईओ विशाल सिक्का ने कहा कि जो लोग एआई का सही इस्तेमाल जानते हैं, वे बेहद प्रभावी साबित हो रहे हैं। मेरे एक मित्र ने नौ महीने में एक बड़ी सार्वजनिक सेवा शुरू की थी, लेकिन बाद में उसी सेवा को जनरेटिव एआई की मदद से सिर्फ चार दिनों में फिर से तैयार कर लिया। इससे उत्पादकता 250 गुना बढ़ गई। एआई पुराने और जटिल सिस्टम को बदलने के साथ ही कंपनियों के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है।उन्होंने कहा कि भारत उद्देश्यपूर्ण और जिम्मेदार एआई के जरिये नई मानव क्रांति का नेतृत्व कर सकता है। एआई के जरिये एक अरब उद्यमी सिर्फ आजीविका ही नहीं, बल्कि अर्थपूर्ण जीवन भी बना सकते हैं। मौजूदा एआई में वास्तविक समझ की कमी, सुरक्षा जोखिम और अधिक ऊर्जा खपत जैसी चुनौतियां हैं। इसलिए एआई को सुरक्षित, कुशल और जिम्मेदार बनाना जरूरी है।विप्रो लिमिटेड के कार्यकारी चेयरमैन रिशद प्रेमजी ने कहा एआई एक ऐसी तकनीक है, जो पीढ़ी में एक बार आती है। आने वाले कुछ वर्षों में भारत जो फैसले करेगा, वही देश की आर्थिक दिशा और एक अरब से ज्यादा लोगों की समस्याएं सुलझाने की क्षमता तय करेंगे। भारत एआई में दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है। रिशद ने कहा, अब एआई पर चर्चा केवल संभावनाओं तक सीमित नहीं है। अब इसे बड़े स्तर पर लागू करने का समय है। तकनीक तभी मूल्य पैदा करती है, जब उसे जिम्मेदारी से असली समस्याओं के समाधान में लगाया जाए।उन्होंने कहा, भारत सिर्फ एआई बनाने वाला देश नहीं, बल्कि इसे बड़े पैमाने पर लागू करने वाला देश भी बन सकता है। भारत की ताकत उसके प्रतिभाशाली युवाओं में है। आज करीब 6.5 लाख पेशेवर एआई से जुड़े काम कर रहे हैं और 2027 तक यह संख्या दोगुनी हो सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार 1 करोड़ युवाओं को एआई प्रशिक्षण देने की योजना पर काम कर रही है। एआई का सही और जिम्मेदार उपयोग किया गया तो भारत दुनिया में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने समिट के निष्कर्षों की घोषणा करते कहा कि एआई से जुड़ी अग्रणी कंपनियों और भारत के नवोन्मेषकों ने नई दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट कमिटमेंट्स पर सहमति जताई है। इसके तहत एआई का पूरी जिम्मेदारी से इस्तेमाल करते हुए रोजगार और नीतिगत मुद्दों पर प्रभाव को लेकर समझ बनाई जाएगी। साथ ही, भाषा संबंधी बाध्यताओं को भी दूर किया जाएगा ताकि यह नई तकनीक सर्वसुलभ हो।अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत एआई इम्पैक्ट समिट की सफलता का प्रमाण नई दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट प्रतिबद्धताएं है। इसके तहत दो मुख्य लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इनमें पहला, डाटा के माध्यम से रोजगार और आर्थिक बदलावों के लिए साक्ष्य-आधारित नीतियां बनाना और दूसरा एआई प्रणालियों को बहुभाषी और सांस्कृतिक रूप से सुदृढ़ बनाना है। यह पहल विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के लिए एआई को समावेशी और प्रासंगिक बनाने की दिशा में भारत के नेतृत्व को दर्शाती है।वैष्णव ने कहा, ये प्रयास मिलकर ऐसे एआई के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं जो केवल शक्तिशाली ही नहीं बल्कि समावेशी, विकासोन्मुखी और वैश्विक रूप से प्रासंगिक भी हो। वैष्णव ने जोर देकर कहा कि अब एआई सिस्टम को केवल अंग्रेजी या किसी एक संस्कृति तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे भारत की विभिन्न भाषाओं और स्थानीय संदर्भों के हिसाब से परखा और सुधारा जाएगा। अब एआई का फायदा गांव के उस व्यक्ति को भी मिलेगा जो अपनी मातृभाषा में बात करना चाहता है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया की बड़ी तकनीकी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदाराना विस्तार और वैश्विक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। इंडिया एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन के दौरान सीईओ राउंडटेबल में एआई, प्रौद्योगिकी और नवाचार जगत के विभिन्न हितधारक एक साथ आए।पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा, चर्चा सार्थक और दूरदर्शी थी, जिसका मुख्य उद्देश्य एआई का जिम्मेदारी भरा विस्तार करना, वैश्विक सहयोग को मजबूत करना और विकास के अवसरों को खोलना था। बैठक की तस्वीरें साझा करते हुए पीएम ने कहा, मानव प्रगति और सतत विकास के लिए एआई का उपयोग करने की साझा प्रतिबद्धता को देखकर उत्साहजनक लगा।मिस्ट्रल एआई के सीईओ व सह-संस्थापक आर्थर मेन्श ने एआई स्वायत्तता और खुले नवाचार के लिए सशक्त तर्क दिया। विकेंद्रीकरण और डिजिटल आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, एआई सशक्तीकरण का साधन होना चाहिए, प्रभुत्व का नहीं। देशों और क्षेत्रों को अपने एआई भविष्य का नियंत्रण स्वयं करना चाहिए, यह कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि डिजिटल स्वायत्तता की जरूरत है।इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने पीएम नरेंद्र मोदी की एआई को लेकर दूरदर्शी सोच की सराहना की है। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण एआई को सिर्फ तकनीकी क्षेत्र तक सीमित न रखकर कृषि और पशुपालन जैसे जमीनी क्षेत्रों तक पहुंचाने का है। अब एआई का इस्तेमाल गाय भैंस की सेहत की निगरानी के लिए भी किया जाएगा।नीलेकणि ने उदाहरण देते हुए बताया कि 8 जनवरी को प्रधानमंत्री से हुई मुलाकात के दौरान किसानों के लिए एआई के उपयोग पर चर्चा हुई थी। इस बातचीत में प्रधानमंत्री नया और व्यावहारिक सुझाव देते हुए कहा, हम एआई को सिर्फ किसानों तक ही क्यों सीमित रखें? इसे गाय और पशुओं के लिए भी क्यों न इस्तेमाल किया जाए? अगर कोई गाय बीमार है, तो वह खुद नहीं बता सकती। ऐसे में एआई से इस समस्या का समाधान कैसे किया जा सकता है? उसी दिन अमूल व अन्य सहकारिता समूहों के साथ पीएमओ में बैठक हुई और एक महीने में 11 फरवरी को इससे जुड़ी एप्लीकेशन सरला बैन लाइव हो गई। इसमें चार करोड़ पशुओं को शामिल किया गया। इस एप के जरिये पशुओं की बीमारी, दुग्ध उत्पादन से जुड़ी जानकारी हासिल की जा रही है। नीलेकणि ने कहा, यह उस विजन को दर्शाता है, जिसमें एआई के जरिये खेती और डेयरी सेक्टर को सशक्त बनाने पर जोर दिया गया है। उन्होंने इसे एआई के व्यापक प्रसार की दिशा में एक अहम कदम बताया।आठ वर्षीय बाल एआई प्रौद्योगिकीविद रणवीर सचदेवा इंडिया एआई इम्पैक्ट सम्मेलन में सबसे कम उम्र के मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। रणवीर ने संबोधन में बताया कि प्राचीन भारतीय दर्शन को वह कैसे आधुनिक तकनीक से जोड़ रहे हैं।रणवीर ने बताया, विभिन्न देश एआई विकास के लिए कैसा दृष्टिकोण अपना रहे हैं और भारत एआई निर्माण में कैसे आगे बढ़ रहा है। उन्होंने हाल में जारी अपने भारतीय एआई मॉडल के उपयोग के बारे में भी बताया। उन्होंने बताया कि अपने एआई मॉडल के माध्यम से वह भारत की जीडीपी में योगदान दे रहे हैं और एआई साक्षरता को बढ़ावा दे रहे हैं।वर्ष 2017 में जन्मे रणवीर सचदेवा विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं। वह एआई विशेषज्ञ, वैश्विक लेखक और टेडएक्स वक्ता हैं। शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के पांच सफल वर्षों पर राष्ट्रीय समारोह में रणवीर को एआई और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के युग में नवाचार पर अपना दृष्टिकोण साझा करने के लिए बुलाया था। अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ उन्हें जिनेवा में एआई फॉर गुड ग्लोबल समिट में भी निमंत्रित कर चुका है।ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने सम्मेलन में वैश्विक प्रौद्योगिकी परिवर्तन में भारत की उल्लेखनीय स्थिति को रेखांकित किया। उन्होंने भारत को अर्थव्यवस्थाओं, समाज और मानव अस्तित्व को आकार देने वाली निर्णायक शक्ति बताया। कहा, भारत ने 1.4 अरब लोगों के लिए एआई के विस्तार की नींव रख दी है।सुनक ने एआई के तीव्र विकास और उससे जुड़ी जिम्मेदारी पर केंद्रित सत्र का उद्घाटन करने के दौरान ब्लेचली पार्क (ब्रिटेन) में आयोजित पहले एआई सुरक्षा शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, एआई से कई काम किए जा सकते हैं लेकिन यह मानवीय अनुभव की जगह कभी नहीं ले सकता। फिर भी इसकी परिवर्तनकारी शक्ति अभूतपूर्व है। टेलीफोन को 10 करोड़ उपयोगकर्ताओं तक पहुंचने में 75 साल लगे, वहीं चैटजीपीटी ने केवल दो महीनों में यह उपलब्धि हासिल कर ली। बदलाव की गति इतिहास को फिर से लिख रही है।सुनक अपने सत्र में कुछ देरी से पहुंचे। उन्होंने पहुंचते ही माफी मांगी और तंज कसा-एआई सब कर सकता है पर दिल्ली का ट्रैफिक नहीं सुधार सकता। असल में वे जाम में फंस गए थे।सुनक ने देश के फलते-फूलते स्टार्टअप इकोसिस्टम, बढ़ते यूनिकॉर्न बेस और सर्वम एआई जैसे नवाचारों का हवाला देते हुए कहा कि एआई में असली प्रतिस्पर्धा केवल अत्याधुनिक आविष्कारों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर इसे अपनाने की है।ये भी पढ़ें: ‘एआई बहुत कुछ कर सकता है, लेकिन दिल्ली का ट्रैफिक नहीं सुधार सकता’, ऋषि सुनक का मजाकिया अंदाज नई दिल्ली। स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन ने भारत के एआई शिखर सम्मेलन की सराहना करते हुए एलान किया कि उनका देश 2027 में जिनेवा में वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा, एआई बड़ा बदलाव लाने वाली ताकत है। इसे लेकर हम खासे उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि इस समिट से उनका देश नवाचार, शोध और डिजिटल नीति के वैश्विक केंद्र के तौर पर और मजबूत होगा।सम्मेलन के दौरान स्विस राष्ट्रपति पार्मेलिन ने कहा कि यह आयोजन नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति स्विट्जरलैंड की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा। सी यू इन 2027 इन जिनेवा की पृष्ठभूमि में स्विस पैवेलियन में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने भारत आयोजित एआई समिट को ऐतिहासिक आयोजन करार दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई अपनी द्विपक्षीय बैठक को बेहद उम्दा कहा। यह बैठक भारत मंडपम में हुई। इस दौरान उन्होंने कहा कि एआई केवल तेजी या तकनीकी अनुप्रयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों के जीवन पर सीधा और गहरा प्रभाव डालने वाली ताकत है। अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि स्विट्जरलैंड जिम्मेदार एआई के इस्तेमाल, वैश्विक शासन और नियमन पर संवाद को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि एआई के फायदे सभी तक पहुंचें, इसके लिए सरकारों के बीच सहयोग और ज्ञान साझा करना बेहद जरूरी है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सम्मेलन ने मोदी सरकार के नेतृत्व में हासिल की गई उपलब्धियों के आधार पर देश को नए युग में नेतृत्व के लिए तैयार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, वैश्विक नेताओं व प्रौद्योगिकी क्षेत्र के दिग्गजों के सबसे बड़े समूह की मेजबानी करते हुए भारत सार्वभौमिक खुशहाली और कल्याण के प्राचीन मंत्र के साथ नए युग की नैतिक दिशा निर्धारित कर रहा है। भारत का विश्व के प्रति वादा है कि वह नवाचार की अपनी अनंत शक्ति और लोकतंत्र की गहरी सांस्कृतिक जड़ों के जरिये मानवता की प्रगति की यात्रा को हमेशा ईंधन प्रदान करेगा।

उद्योगपति मुकेश अंबानी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्षेत्र में अगले सात वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जैसे जियो ने मोबाइल डाटा सस्ता और सुलभ बनाया वैसे ही अब एआई को हर भारतीय तक पहुंचाया जाएगा। अंबानी ने कहा कि एआई विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी भूमिका निभाएगा। इंडिया एआई इम्पैक्ट सम्मेलन में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के चेयरमैन अंबानी ने कहा, जियो ने भारत को इंटरनेट युग से जोड़ा, अब जियो भारत को इंटेलिजेंस युग से जोड़ेगा। भारत इंटेलिजेंस किराये पर नहीं ले सकता, इसलिए हम इसकी लागत भी डाटा की तरह कम करेंगे।

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