Dharmendra Pradhan: NCERT विवाद पर शिक्षा मंत्री की सफाई, बोले- न्यायपालिका का अपमान करने की कोई मंशा नहीं

josephben1999gd@gmail.com
4 Min Read
Dharmendra Pradhan: NCERT विवाद पर शिक्षा मंत्री की सफाई, बोले- न्यायपालिका का अपमान करने की कोई मंशा नहीं: ताजा अपडेट

SEO MODERATOR PANEL

Focus Keyword: Dharmendra

Meta Description: Dharmendra News: Dharmendra Pradhan: NCERT विवाद पर शिक्षा मंत्री की सफाई, बोले- न्यायपालिका का अपमान करने की कोई मंशा नहीं – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।

Suggested Slug: ncert-row-dharmendra-pradhan-education-minister-clarification-controversy-says-no-intention-insult-judiciary-2026-02-26

Dharmendra: मुख्य समाचार और अपडेट

Dharmendra: #WATCH | Seraikela Kharsawan, Jharkhand: Union Education Minister Dharmendra Pradhan says, “The mention of Supreme Court and India’s judicial system in the NCERT is a matter of concern. When this came to our knowledge, we made NCERT review the books. The observations by the… pic.twitter.com/cjSLwtoLwt — ANI (@ANI) February 26, 2026

#WATCH | Delhi | On SC’s show cause notices to the Secretary of the Department of Education and Literacy (Ministry of Education) and to NCERT Director Dr Dinesh Prashad Saklani, Advocate and Chairman of All India Bar Association Adish C Aggarwala says, “Judiciary has taken the… pic.twitter.com/6hedSjHecL — ANI (@ANI) February 26, 2026

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार न्यायपालिका का सर्वोच्च सम्मान करती है और किसी भी शैक्षणिक सामग्री के जरिए संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ी सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया की जांच की जा रही है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अध्याय तैयार करने में शामिल लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य जागरूकता फैलाना है, संस्थाओं को बदनाम करना नहीं।यह मामला एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब से जुड़ा है, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित एक हिस्सा शामिल किया गया था। इस सामग्री को लेकर वरिष्ठ वकीलों और कई कानूनी विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि स्कूल के छात्रों को इस तरह की सामग्री पढ़ाना न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद इस पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस शुरू हो गई।मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती जारी है। अदालत ने शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव और एनसीईआरटी निदेशक डॉ. दिनेश प्रसाद सकलानी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। ऑल इंडिया बार एसोसिएशन के चेयरमैन और अधिवक्ता आदिश सी अग्रवाल ने कहा कि न्यायपालिका ने सही कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में न्यायपालिका पर भ्रष्टाचार जैसी बातें शामिल करना वरिष्ठ अधिकारियों की बड़ी चूक है।सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा था कि किसी भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने संकेत दिया था कि यह एक सुनियोजित प्रयास भी हो सकता है और जरूरत पड़ने पर कोर्ट स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि न्यायपालिका देश की महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है और उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री पर कानून अपना काम करेगा।शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार पूरे मामले की समीक्षा कर रही है और अदालत के निर्देशों के अनुसार जरूरी बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए पाठ्य सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है और किसी भी तरह की लापरवाही को हल्के में नहीं लिया जाएगा।

संबंधित जानकारी (Background):
इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए उत्तर प्रदेश (UP News) का विकिपीडिया पेज देखें।


ताजा खबरों के लिए upkhabarhindi.com के साथ बने रहें।

- Advertisement -

मूल खबर यहाँ पढ़ें (Read Original)

Leave a comment

Please Login to Comment.