Falcon Training: प्रोजेक्ट का दूसरा फेज जारी, महज दस दिनों में मणिपुर से अफ्रीकी देश पहुंचे तीनों अमूर फाल्कन

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Falcon Training: प्रोजेक्ट का दूसरा फेज जारी, महज दस दिनों में मणिपुर से अफ्रीकी देश पहुंचे तीनों अमूर फाल्कन: ताजा अपडेट

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Meta Description: Falcon News: Falcon Training: प्रोजेक्ट का दूसरा फेज जारी, महज दस दिनों में मणिपुर से अफ्रीकी देश पहुंचे तीनों अमूर फाल्कन – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।

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Falcon: मुख्य समाचार और अपडेट

Falcon: पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में वन्यजीव संरक्षण और प्रवासी पक्षियों के वैज्ञानिक अध्ययन को नई दिशा देते हुए “मणिपुर अमूर फाल्कन ट्रैकिंग प्रोजेक्ट फेज–II” के तहत टैग किए गए तीन अमूर फाल्कन की ताज़ा स्थिति सामने आई है। वन विभाग, मणिपुर और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के संयुक्त प्रयास से नवंबर 2025 में सैटेलाइट ट्रांसमीटर लगाए गए तीन अमूर फाल्कन- आहू, अलंग और अपापांग, वर्तमान में अफ्रीका के विभिन्न देशों में सक्रिय और सुरक्षित पाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि इन्होंने महज आठ से दस दिनों में 8 हजार से 12 हजार किलोमीटर की दूरी तय की।

जानकारी के अनुसार, 8 नवंबर 2025 को मणिपुर के तमेंगलोंग जिले के चिउलुआन रोस्टिंग साइट से इन तीनों अमूर फाल्कन को सैटेलाइट ट्रांसमीटर लगाकर वैज्ञानिकों की टीम ने मुक्त किया था। इस अभियान में वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के वैज्ञानिकों, तमेंगलोंग फॉरेस्ट डिवीजन के अधिकारियों और चिउलुआन गांव के स्वयंसेवकों ने भाग लिया। सैटेलाइट टैगिंग का उद्देश्य इन प्रवासी पक्षियों की लंबी दूरी की यात्रा, प्रवास मार्ग, ठहराव स्थल और पर्यावरणीय चुनौतियों का अध्ययन करना है, ताकि भविष्य में इनके संरक्षण के लिए ठोस रणनीति बनाई जा सके।

Falcon: घटना का पूरा विवरण

9-10 दिनों में अफ्रीका पहुंचकर बनाया रिकॉर्ड

विशेषज्ञों के अनुसार, टैगिंग के बाद तीनों अमूर फाल्कन महज 9 से 10 दिनों के भीतर अफ्रीका पहुंच गए, जो कि एक रिकॉर्ड समय माना जा रहा है। वर्तमान में ये पक्षी अफ्रीका के विभिन्न देशों में अपने शीतकालीन प्रवास (विंटरिंग माइग्रेशन) का आनंद ले रहे हैं।

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आहू- वर्तमान में सोमालिया के आसपास सीमित स्थानीय गतिविधियों के साथ सक्रिय है।

Falcon: निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

वर्तमान में सोमालिया के आसपास सीमित स्थानीय गतिविधियों के साथ सक्रिय है। अपापांग- जिम्बाब्वे में मौजूद है।

जिम्बाब्वे में मौजूद है। अलंग- बोत्सवाना में सक्रिय है।

देहरादून स्थित वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के डॉ. आर.सुरेश कुमार की तरफ से जारी नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार तीनों अमूर फाल्कन पूरी तरह सक्रिय और स्वस्थ हैं।

पूर्व में आशंका जताई गई थी कि आहू को किसी प्रकार की समस्या हो सकती है, लेकिन नवीनतम आंकड़ों से स्पष्ट हुआ है कि वह भी सुरक्षित है और सोमालिया क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर मूवमेंट कर रहा है।

पिछले वर्ष के अनुभव से मिला था महत्वपूर्ण संकेत

वन अधिकारियों के अनुसार, पिछले शीतकालीन प्रवास के दौरान ‘चिउलुआन–2’ नामक टैग किए गए फाल्कन ने 14 अप्रैल 2025 को अपने प्रजनन स्थल (ब्रीडिंग ग्राउंड) की ओर उत्तर दिशा में वापसी शुरू की थी। इस बार भी वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि अप्रैल माह में ये पक्षी अपने मूल प्रजनन क्षेत्रों की ओर लौटना प्रारंभ करेंगे।

अमूर फाल्कन दुनिया के सबसे लंबी दूरी तय करने वाले प्रवासी शिकारी पक्षियों में से एक है, जो पूर्वोत्तर भारत से अफ्रीका तक हजारों किलोमीटर की उड़ान भरता है। मणिपुर के तमेंगलोंग और आसपास के क्षेत्र इन पक्षियों के महत्वपूर्ण रोस्टिंग स्थल माने जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सैटेलाइट ट्रैकिंग से प्राप्त डेटा न केवल इन पक्षियों के जीवन चक्र को समझने में मदद करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रवासी पक्षियों के संरक्षण नेटवर्क को भी मजबूत करेगा। वन विभाग के अधिकारियों ने स्थानीय समुदायों, विशेषकर चिउलुआन गांव के स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की है। उनका कहना है कि समुदाय आधारित संरक्षण मॉडल से ही अमूर फाल्कन जैसे संवेदनशील प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

संबंधित जानकारी (Background):
इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए उत्तर प्रदेश (UP News) का विकिपीडिया पेज देखें।


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