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Meta Description: Kailash News: Kailash Kher: देश और युवा दोनों बदल रहे हैं, यह सकारात्मक परिवर्तन; पद्मश्री कैलाश खेर से खास बातचीत – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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उनकी आवाज में रूहानियत है और शब्दों में शिवत्व। संगीत को साधना का मार्ग बनाने और युवाओं को आध्यात्मिक प्रेम से जोड़ने वाले सूफी संगीत सम्राट और पद्मश्री कैलाश खेर मानते हैं कि तीनों लोकों में संतुलन बनाकर रखने वाली परम शक्ति का नाम शिव है। कहते हैं, कैलासा बैंड ने युवाओं को न केवल भक्ति की राह दिखाई बल्कि भौतिकवाद के युग में आध्यात्मिक प्रेम के रास्ते पर बढ़ना सिखाया। वह शुक्रवार को अमर उजाला के शिवोहम कार्यक्रम में प्रस्तुति देने आगरा आए थे। अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि देश और युवा दोनों बदल रहे हैं, यह एक सकारात्मक परिवर्तन है।
Kailash: घटना का पूरा विवरण
मेरठ से निकलकर पद्मश्री तक के सफर पर उन्होंने कहा कि मेरा बचपन साधु-संन्यासियों की संगत में बीता। कैलासा बैंड के माध्यम से संगीत को साधना का जरिया बनाया। फिर चाहे प्रीत की लत हो या अल्लाह के बंदे। संगीत के माध्यम से भक्ति को युवाओं से जोड़ा। युवा भी भौतिकता से आध्यात्मिक प्रेम की राह पर बढ़ चले हैं।
मदिरा, भांग और हुड़दंग को भोलेनाथ से जोड़ने के सवाल पर कहा कि फिल्म जगत में भोलेनाथ का विकृत रूप दिखाया गया है। प्याला तेरे नाम का पिया…. का नाम शिव नहीं, बल्कि शिवशंकर तो वो हैं जिन्होंने समस्त जग के कष्टों को अपने भीतर आत्मसात कर संसार को अमृत दिया। कहते हैं, भारत सबसे ज्यादा युवाओं वाला देश है और मेरा देश आगे बढ़ रहा है। सिलिकॉन वैली में रहने वाले युवा अपने अभिभावक और दादा-दादी, नाना-नानी को काशी विश्वनाथ की यात्रा करा रहे हैं। कल्पवास कर रहे हैं। यही सनातन की शक्ति है। कहते हैं कि जब कर्म के साथ आध्यात्म जुड़ जाता है तो फिर वहां संस्कार होता है, जो कभी गलत काम नहीं कर सकता।
आत्मा से परमात्मा के मिलन का गीत है आज मेरे पिया घर आवेंगे
Kailash: निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
कैलाश खेर बताते हैं कि इस गीत की रचना तब की जब मेरे पिता मृत्यु शैया पर थे। वो हरि ओम का जाप कर रहे थे। उनके चेहरे पर मृत्यु का भय नहीं परमात्मा से मिलन का उल्लास था। तब मैंने ए री सखी मंगल गावो री, धरती अंबर सजाओ री, उतरेगी आज मेरे पी की सवारी…उनकी छवि से दिखूं मैं तो प्यारी, आज मेरे पिया घर आवेंगे, लिखा। आत्मा से परमात्मा के मिलन का प्रतीक यह गीत अब विवाह में मंगल गीत की तरह बजता है, क्योंकि यही सच्ची प्रीत और सच्चा मिलन है।
शिव-शिव का जाप करने वाला हो जाता है वशी
युवाओं में असफलता से उपजने वाले अवसाद और निराशा को दूर करने के लिए उनका कहना है कि शिव को जपने वाला शिव के वशीभूत हो जाता है। फिर वो गलत काम नहीं कर सकता। शिव जीवन में संतुलन लाते हैं। हमें भी पहले तिरस्कार मिला, उपहास उड़ा लेकिन मेरे बाबा की कृपा से आज सब-कुछ मिल रहा है। शिवोहम जैसे आयोजन युवाओं और समाज को एक सकारात्मक प्रेरणा देते हैं।
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