‘भारत के मूल्यों, सिद्धांतों और हितों के साथ धोखा’: खामनेई की हत्या पर सरकार की चुप्पी पर विपक्ष ने उठाए सवाल

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'भारत के मूल्यों, सिद्धांतों और हितों के साथ धोखा': खामनेई की हत्या पर सरकार की चुप्पी पर विपक्ष ने उठाए सवाल: ताजा अपडेट

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‘भारत: मुख्य समाचार और अपडेट

‘भारत: अमेरिका-इस्राइल की सैन्य कार्रवाई में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के बाद भारत की राजनीतिक सियासत भी गरमा गई है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की चुप्पी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भारत सरकार की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया न आना देश की पारंपरिक विदेश नीति पर सवाल खड़े करता है।

विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि ईरान जैसे पुराने मित्र देश पर हुए हमले और उसके सर्वोच्च नेता की हत्या के बावजूद सरकार ने खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी। विपक्ष का कहना है कि भारत हमेशा शांति, कूटनीति और संप्रभुता के सम्मान की बात करता रहा है, लेकिन इस मामले में सरकार का रुख साफ दिखाई नहीं दे रहा है। इसे भारत के मूल्यों और सिद्धांतों से समझौता बताया जा रहा है।कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने खामनेई की हत्या को निंदनीय बताते हुए कहा कि किसी संप्रभु देश के नेतृत्व की लक्षित हत्या अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों की मौत की भी कड़ी निंदा होनी चाहिए। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस कार्रवाई को अनैतिक और गैरकानूनी बताया और उम्मीद जताई कि भारत सरकार युद्ध रोकने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएगी।समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि मोदी सरकार को साफ करना चाहिए कि भारत युद्ध के पक्ष में है या शांति के। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संकट के समय जिम्मेदार देशों को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। वहीं शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने सवाल उठाया कि ईरान के नेता की मौत पर भारत सरकार की ओर से शोक संदेश तक क्यों जारी नहीं किया गया, जबकि दोनों देशों के संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं।खामनेई की मौत के बाद पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और इसका असर भारत की कूटनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति दिखानी चाहिए। साथ ही प्रभावित देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग भी की गई है। इस मुद्दे ने देश में विदेश नीति को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

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