नौकरी के बदले नकदी मामला: मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के बाद दबाव में तमिलनाडु सरकार, क्या दर्ज करेगी एफआईआर?

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नौकरी के बदले नकदी मामला: मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के बाद दबाव में तमिलनाडु सरकार, क्या दर्ज करेगी एफआईआर?: ताजा अपडेट

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चीफ जस्टिस मणिंदर मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी अरुल मुरुगन की खंडपीठ के समक्ष पेश हुए महाधिवक्ता पीएस रमन ने कहा कि डीवीएसी तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश की समीक्षा करने पर विचार कर रहा है। यह दलील उस अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान दी गई, जो अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के राज्यसभा सदस्य आईएस इंबदुरै ने डीवीएसी के पूर्व प्रभारी एटी दुरै के खिलाफ दायर की है। विज्ञापन विज्ञापन

नौकरी: घटना का पूरा विवरण

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के निर्देश का जानबूझकर पालन नहीं किया गया और आदेश के दस दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। याचिकाकर्ता की ओर से बहस की शुरुआत करते हुए वरिष्ठ वकील वी राघवाचारी ने कहा कि स्पष्ट न्यायिक निर्देशों के बावजूद डीवीएसी ने कोई कदम नहीं उठाया।

जब पीठ ने राज्य का पक्ष पूछा तो रमन ने स्पष्ट किया कि आमतौर पर महाधिवक्ता अवमानना मामलों में पेश नहीं होते और इस मामले में डीवीएसी की ओर से वरिष्ठ वकील एनआर एलंगो पेश होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि एजेंसी ने उनसे कानूनी राय मांगी है कि क्या प्राथमिकी दर्ज करने से पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17ए के तहत पूर्व अनुमति जरूरी है। शुरुआती दलीलें सुनने के बाद पीठ ने डीवीएसी को दो हफ्ते के भीतर विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।

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अपने हलफनामे में इंबदुरै ने कथित घोटाले को गंभीर और सुनियोजित बताया है। उन्होंने दावा किया कि सहायक अभियंता (असिस्टेंट इंजीनियर) और कनिष्ठ अभियंता समेत 2,538 पदों के लिए अभ्यर्थियों से 25 लाख से 35 लाख रुपये तक की रिश्वत ली गई। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निष्कर्षों का हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर यह सामने आया कि धन को बैकिंग प्रणाली में लाने से पहला हवाला माध्यमों से भेजा गया था।

नौकरी: निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

बताया जा रहा है कि ईडी ने मंत्री के भाइयों एन रविचंद्रन और केएन मणिवन्नन समेत अन्य के आवासों पर छापेमारी के दौरान दस्तावेज जब्त किए थे। इससे पहले हाईकोर्ट ने ईडी की जानकारी के बावजूद डीवीएसी की ओर से केवल शुरुआती जांच किए जाने पर असंतोष जताया था। हाईकोर्ट ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था।

चीफ जस्टिस मणिंदर मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी अरुल मुरुगन की खंडपीठ के समक्ष पेश हुए महाधिवक्ता पीएस रमन ने कहा कि डीवीएसी तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश की समीक्षा करने पर विचार कर रहा है। यह दलील उस अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान दी गई, जो अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के राज्यसभा सदस्य आईएस इंबदुरै ने डीवीएसी के पूर्व प्रभारी एटी दुरै के खिलाफ दायर की है।याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के निर्देश का जानबूझकर पालन नहीं किया गया और आदेश के दस दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। याचिकाकर्ता की ओर से बहस की शुरुआत करते हुए वरिष्ठ वकील वी राघवाचारी ने कहा कि स्पष्ट न्यायिक निर्देशों के बावजूद डीवीएसी ने कोई कदम नहीं उठाया।ये भी पढ़ें: कर्नाटक फोन टैपिंग: ‘चोर को सब चोर ही दिखते हैं’, सिद्धारमैया का विपक्ष पर हमला; डिप्टी सीएम ने भी कही ये बात जब पीठ ने राज्य का पक्ष पूछा तो रमन ने स्पष्ट किया कि आमतौर पर महाधिवक्ता अवमानना मामलों में पेश नहीं होते और इस मामले में डीवीएसी की ओर से वरिष्ठ वकील एनआर एलंगो पेश होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि एजेंसी ने उनसे कानूनी राय मांगी है कि क्या प्राथमिकी दर्ज करने से पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17ए के तहत पूर्व अनुमति जरूरी है। शुरुआती दलीलें सुनने के बाद पीठ ने डीवीएसी को दो हफ्ते के भीतर विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।अपने हलफनामे में इंबदुरै ने कथित घोटाले को गंभीर और सुनियोजित बताया है। उन्होंने दावा किया कि सहायक अभियंता (असिस्टेंट इंजीनियर) और कनिष्ठ अभियंता समेत 2,538 पदों के लिए अभ्यर्थियों से 25 लाख से 35 लाख रुपये तक की रिश्वत ली गई। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निष्कर्षों का हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर यह सामने आया कि धन को बैकिंग प्रणाली में लाने से पहला हवाला माध्यमों से भेजा गया था।बताया जा रहा है कि ईडी ने मंत्री के भाइयों एन रविचंद्रन और केएन मणिवन्नन समेत अन्य के आवासों पर छापेमारी के दौरान दस्तावेज जब्त किए थे। इससे पहले हाईकोर्ट ने ईडी की जानकारी के बावजूद डीवीएसी की ओर से केवल शुरुआती जांच किए जाने पर असंतोष जताया था। हाईकोर्ट ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था।

तमिलनाडु सरकार ने मंगलवार मद्रास हाईकोर्ट को बताया कि सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) अदालत के 20 फरवरी के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने पर विचार कर रहा है। इस आदेश में नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग से जुड़े कथित ‘नौकरी के बदले नकदी’ घोटाले में तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। यह विभाग मंत्री केएन नेहरू के अधिकार क्षेत्र में है।

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