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Meta Description: Assam News: Assam Elections 2026: अमित शाह के बयान पर पायलट का पलटवार, पूछा ‘एजेंसियां किसके पास हैं?’ – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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Assam: मुख्य समाचार और अपडेट
Assam: कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने अमित शाह के बयान पर कहा, “इस देश में फौज किसके पास है? एजेंसियां किसके पास है? पुलिस किसके पास है? राज्य और केंद्र सरकार किसके पास है? अगर आप एक दशक में अपने वादों को पूरा नहीं कर पाते और अब भी आपको कांग्रेस की सरकारों की आलोचना करके वोट मांगनी पड़ रही है तो मुझे दुख है.यहां कांग्रेस बहुमत से सरकार बनाएगी।”
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार पर कई सवाल उठाए। पायलट ने कहा कि देश में सेना, केंद्रीय एजेंसियां, पुलिस व्यवस्था और अधिकांश राज्यों तथा केंद्र में सरकार किसके नियंत्रण में है, यह सभी जानते हैं, इसलिए विपक्ष पर आरोप लगाना उचित नहीं है। उनका यह बयान राजनीतिक बहस के बीच आया, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। पायलट ने अपने वक्तव्य में यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि देश की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधीन होती है, ऐसे में यदि किसी भी तरह की समस्या या चुनौती सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी भी सरकार की ही होती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना, जो देश की सीमाओं की रक्षा करती है, केंद्र सरकार के अधीन कार्य करती है और इसका संचालन रक्षा मंत्रालय के माध्यम से होता है। इसी तरह, केंद्रीय जांच एजेंसियां जैसे सीबीआई, ईडी और अन्य संस्थाएं भी केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आती हैं। पायलट ने यह भी कहा कि पुलिस व्यवस्था भले ही राज्यों का विषय हो, लेकिन कई राज्यों में सत्तारूढ़ दल और केंद्र में एक ही पार्टी होने के कारण समन्वय की जिम्मेदारी भी उसी राजनीतिक नेतृत्व पर होती है। उनके अनुसार, जब केंद्र और राज्य दोनों जगह एक ही राजनीतिक दल की सरकार हो, तो जवाबदेही और भी अधिक बढ़ जाती है।
सचिन पायलट ने अपने बयान में यह संकेत दिया कि विपक्ष को बार-बार जिम्मेदार ठहराने के बजाय सरकार को अपने कामकाज और नीतियों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता अब ज्यादा जागरूक हो चुकी है और वह यह समझती है कि कौन-सी संस्थाएं किसके नियंत्रण में हैं। पायलट का यह बयान मौजूदा राजनीतिक माहौल में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने सत्ता पक्ष को सीधे तौर पर जवाबदेही का एहसास कराने की कोशिश की है। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस और तेज हो गई है, और विभिन्न दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।
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