
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला – SIR वोटर लिस्ट में नाम कटे वोटरों को वोट देने से इनकार
- सुप्रीम कोर्ट ने SIR वोटर लिस्ट में नाम कटे वोटरों को वोट देने से इनकार किया
- चुनाव आयोग ने फाइनल आंकड़े जारी नहीं किए हैं
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वोटिंग से 10 दिन पहले, इस स्टेज पर चुनाव प्रक्रिया में कोई दखल नहीं देंगे
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में उन वोटरों को मतदान की इजाजत देने से इनकार कर दिया, जिनके नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में काटे गए हैं और उनकी शिकायत अपीलीय ट्रिब्यूनलों में लंबित हैं।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि अगर हम ऐसे वोटरों को वोट डालने की इजाजत देंगे तो उन लोगों के वोटिंग अधिकार छीनने होंगे जिनके नाम SIR लिस्ट में शामिल हैं।
चुनाव आयोग की भूमिका
चुनाव आयोग ने फाइनल आंकड़े जारी नहीं किए हैं। इसके अलावा जांच के तहत आए 60.06 लाख वोटरों में से 27.16 लाख के नाम हटाए गए।
“सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में उन वोटरों को मतदान की इजाजत देने से इनकार कर दिया, जिनके नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में काटे गए हैं और उनकी शिकायत अपीलीय ट्रिब्यूनलों में लंबित हैं।” — सुप्रीम कोर्ट
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में वोटरों को वोट देने से इनकार किया गया है। यह फैसला चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने SIR वोटर लिस्ट में नाम कटे वोटरों को वोट देने से इनकार क्यों किया?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर हम ऐसे वोटरों को वोट डालने की इजाजत देंगे तो उन लोगों के वोटिंग अधिकार छीनने होंगे जिनके नाम SIR लिस्ट में शामिल हैं।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने वोटिंग अधिकारों का उल्लंघन किया है?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वोटिंग से 10 दिन पहले, इस स्टेज पर चुनाव प्रक्रिया में कोई दखल नहीं देंगे।
क्या चुनाव आयोग ने फाइनल आंकड़े जारी किए हैं?
चुनाव आयोग ने फाइनल आंकड़े जारी नहीं किए हैं।

