फोकस कीवर्ड: करूर स्टैंपिड CBI जांच | By Up Khabar Hindi
करूर स्टैंपिड CBI जांच पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
तमिलनाडु के करूर स्टैंपिड CBI जांच मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को बड़ा आदेश जारी किया। अदालत ने कहा कि इस भयावह हादसे की जांच CBI को सौंपी जाए ताकि किसी भी तरह का राजनीतिक या प्रशासनिक हस्तक्षेप न हो।
यह आदेश तब आया जब TVK पार्टी ने याचिका दायर कर स्वतंत्र जांच की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कहा कि “जनता के जीवन से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”
करूर हादसे में क्या हुआ था?
करूर में 28 सितंबर को TVK पार्टी की रैली के दौरान मची भगदड़ में 41 लोगों की मौत और 70 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, स्टेज गिरने और भगदड़ के चलते अफरातफरी मच गई थी। तमिलनाडु सरकार ने जांच के लिए विशेष समिति बनाई थी,
लेकिन करूर स्टैंपिड CBI जांच की मांग विपक्ष और पीड़ित परिवारों ने लगातार उठाई।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि करूर स्टैंपिड CBI जांच इसलिए आवश्यक है ताकि सच सामने आ सके।
अदालत ने तमिलनाडु पुलिस की रिपोर्ट को अधूरा बताया और कहा कि “राज्य एजेंसियां दबाव में आ सकती हैं, इसलिए CBI को स्वतंत्र जांच करनी चाहिए।”
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जांच रिपोर्ट 3 महीने के भीतर सौंपी जाए। इसके अलावा पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के भी आदेश दिए गए।
राजनीतिक बयानबाजी और विपक्ष का रुख
तमिलनाडु में करूर स्टैंपिड CBI जांच को लेकर राजनीतिक माहौल गरम है। विपक्षी पार्टियों ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि उसने हादसे की सच्चाई छिपाने की कोशिश की।
AIADMK और BJP नेताओं ने इसे “सरकारी लापरवाही का परिणाम” बताया।
वहीं सत्तारूढ़ DMK सरकार ने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग करेगी और दोषियों को सख्त सज़ा दिलाई जाएगी।
CBI जांच के मायने क्या हैं?
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि करूर स्टैंपिड CBI जांच से कई छिपे हुए तथ्य सामने आ सकते हैं।
यह जांच सिर्फ हादसे की वजहों को नहीं बल्कि राजनीतिक ज़िम्मेदारी को भी उजागर कर सकती है।
CBI ने पहले भी कई राज्यों में ऐसी जांचें की हैं, जिनसे महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए।
निष्कर्ष: न्याय की उम्मीद और सबक
सुप्रीम कोर्ट का करूर स्टैंपिड CBI जांच का फैसला एक मजबूत संदेश है कि किसी भी नागरिक की जान से खिलवाड़ अस्वीकार्य है।
यह कदम न केवल पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की दिशा में एक उम्मीद है बल्कि देशभर में सार्वजनिक आयोजनों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल भी उठाता है।
आगे अब देखने वाली बात यह होगी कि CBI जांच से कौन-कौन से नए तथ्य उजागर होते हैं और क्या दोषियों को कड़ी सजा मिलती है।

