कानपुर भाजपा विवाद : सांसद भोले और वारसी की भिड़ंत से मचा सियासी बवाल, मामला सीएम योगी तक पहुंचा

Deepak Pandit
By Deepak Pandit 4 Min Read
कानपुर भाजपा विवाद में सांसद भोले और वारसी के बीच नोकझोंक, मामला सीएम योगी तक पहुंचा

कानपुर में भाजपा नेताओं की भिड़ंत से सियासी हलचल तेज

कानपुर भाजपा विवाद (Kanpur BJP Dispute) ने उत्तर प्रदेश की सियासत में गर्मी बढ़ा दी है।

कानपुर देहात में एक सार्वजनिक बैठक के दौरान भाजपा सांसद देवेंद्र सिंह भोले और पूर्व सांसद अनिल शुक्ला वारसी के बीच तीखी नोकझोंक हो गई।

विवाद तब और बढ़ गया जब सांसद भोले ने कहा —

“मैं कानपुर देहात का सबसे बड़ा हिस्ट्रीशीटर हूं।”

इस बयान ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी और अब मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) तक पहुंच गया है।

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बैठक में विकास कार्यों की समीक्षा बनी विवाद की जड़

जानकारी के अनुसार यह विवाद दिशा समिति की बैठक के दौरान हुआ था, जहां जिले के कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

बैठक का मकसद क्षेत्रीय विकास कार्यों की समीक्षा करना था, लेकिन वहां राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आ गए।

पूर्व सांसद अनिल शुक्ला वारसी ने आरोप लगाया कि सांसद भोले के समर्थक फैक्ट्री मालिकों को परेशान कर रहे हैं।

इसी बात पर दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई जो बाद में सियासी बवाल में बदल गई।

सांसद भोले का बयान बना बवाल की वजह

नोकझोंक के दौरान सांसद भोले का विवादित बयान —

“मैं कानपुर देहात का सबसे बड़ा हिस्ट्रीशीटर हूं”

ने इस विवाद को और भी तूल दे दिया।

अब यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और विपक्ष ने इसपर भाजपा को घेरना शुरू कर दिया है।

भाजपा की सफाई और अंदरूनी कलह पर बयान

भाजपा के कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल ने इस विवाद पर कहा —

“हमारा उद्देश्य जनता की सेवा करना है, आपस में नहीं लड़ना। दोनों नेताओं को आपसी मतभेद दूर करने की सलाह दी गई है।”

हालांकि राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह विवाद भाजपा की अंदरूनी कलह को उजागर करता है और विपक्ष इसे सियासी हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

सीएम योगी तक पहुंची रिपोर्ट, कार्रवाई की संभावना

मामले की रिपोर्ट प्रदेश संगठन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेज दी है।

सूत्रों के अनुसार, सीएम योगी ने इस विवाद को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि पार्टी अनुशासन के खिलाफ किसी भी बयान या विवाद पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अब पूरे प्रदेश की निगाहें इस पर टिकी हैं कि भाजपा इस मामले को कैसे संभालती है।

राजनीतिक असर और भविष्य की रणनीति

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कानपुर भाजपा विवाद (Kanpur BJP Dispute) आने वाले निकाय चुनावों पर असर डाल सकता है।

प्रदेश में पार्टी नेतृत्व अब ऐसे विवादों पर सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है ताकि संगठन की एकजुटता बनी रहे।

निष्कर्ष

कानपुर देहात में हुआ यह विवाद सिर्फ दो नेताओं की नोकझोंक नहीं बल्कि भाजपा के भीतर बढ़ती असहमति को दिखाता है।

अब देखना यह होगा कि योगी सरकार इस मसले को कैसे सुलझाती है और पार्टी के अंदर अनुशासन बहाल करती है।

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