गोंडा बीईओ अतुल तिवारी 2.25 करोड़ रुपये घूसखोरी मामले में तुरंत प्रभाव से निलंबित।

Deepak Pandit
By Deepak Pandit 4 Min Read
गोंडा बीईओ अतुल तिवारी: 2.25 करोड़ के घोटाले में तुरंत प्रभाव से निलंबित

गोंडा बीईओ अतुल तिवारी: 2.25 करोड़ के घोटाले में तुरंत प्रभाव से निलंबित

उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा एक्शन लिया गया है। गोंडा में तैनात बेसिक शिक्षा अधिकारी (BEO) गोंडा बीईओ अतुल तिवारी को 2.25 करोड़ रुपये की घूसखोरी के गंभीर आरोपों के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई शासन स्तर पर की गई है, जिससे पूरे जिले के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

गोंडा बीईओ अतुल तिवारी पर यह आरोप है कि उन्होंने सरकारी योजनाओं के फंड रिलीज करने और शिक्षकों के प्रशासनिक कार्यों के एवज में यह भारी रकम रिश्वत के रूप में मांगी या ली थी। यह मामला राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति का परिणाम माना जा रहा है।

गोंडा बीईओ अतुल तिवारी पर लगे गंभीर आरोप और जांच की स्थिति

प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि गोंडा बीईओ अतुल तिवारी लंबे समय से अपने पद का दुरुपयोग कर रहे थे। शिकायतकर्ताओं में कई शिक्षक संगठन और ठेकेदार शामिल हैं, जिन्होंने वेतन भुगतान और निर्माण कार्यों के बिल पास कराने में कमीशन मांगे जाने का आरोप लगाया है।

2.25 करोड़ की घूसखोरी: कैसे फँसे गोंडा बीईओ अतुल तिवारी?

इस बड़े घोटाले के सामने आने के पीछे मुख्य वजह पुख्ता सबूतों के साथ की गई शिकायतें हैं। उच्च अधिकारियों को भेजी गई रिपोर्ट्स में वित्तीय लेनदेन के स्पष्ट प्रमाण दिए गए थे, जिसके बाद जांच शुरू हुई।

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निलंबन आदेश में प्रमुख रूप से निम्नलिखित आरोप शामिल हैं:

  1. 2.25 करोड़ रुपये की अवैध धन उगाही का प्रयास।
  2. कार्य क्षेत्र में गोंडा बीईओ अतुल तिवारी द्वारा वित्तीय अनियमितताएं।
  3. मानकों के विपरीत शिक्षकों के ट्रांसफर और पोस्टिंग करना।
  4. सरकारी फंड्स के वितरण में पारदर्शिता की कमी।

जांच पूरी होने तक गोंडा बीईओ अतुल तिवारी को लखनऊ स्थित बेसिक शिक्षा निदेशालय से संबद्ध कर दिया गया है। उन्हें मुख्यालय छोड़ने से पहले सक्षम अधिकारी की अनुमति लेनी होगी।

निलंबन के बाद प्रशासनिक फेरबदल और गोंडा बीईओ अतुल तिवारी का भविष्य

इस बड़े एक्शन के बाद गोंडा के बेसिक शिक्षा विभाग में अस्थिरता का माहौल है। हालांकि, विभाग ने तत्काल प्रभाव से जिले के कार्यों को सुचारु रूप से चलाने के लिए अगले अधिकारी को प्रभार सौंप दिया है। इस मामले की विस्तृत जांच एक उच्च स्तरीय विभागीय समिति को सौंपी गई है, जो छह सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

क्या गोंडा बीईओ अतुल तिवारी पर कानूनी कार्रवाई भी होगी?

विभागीय जांच के साथ-साथ, माना जा रहा है कि यह मामला जल्द ही आर्थिक अपराध शाखा (EOW) या विजिलेंस विभाग को सौंपा जा सकता है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो गोंडा बीईओ अतुल तिवारी को न केवल सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है, बल्कि उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है। यह कार्रवाई उन सभी अधिकारियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में भ्रष्टाचार फैला रहे हैं।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के हर जिले में भ्रष्ट अधिकारियों की सूची तैयार की जा रही है, और जल्द ही अन्य जिलों में भी ऐसे बड़े एक्शन देखने को मिल सकते हैं। गोंडा बीईओ अतुल तिवारी का मामला इसी दिशा में पहला बड़ा कदम है।

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