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को-ऑपरेटिव बैंक में घोटाला: घोटाले में तीन तत्कालीन शाखा प्रबंधक फंसे, 16 पर एफआईआर दर्ज हुई, जांच शुरू

josephben1999gd@gmail.com
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को-ऑपरेटिव बैंक में घोटाला: घोटाले में तीन तत्कालीन शाखा प्रबंधक फंसे, 16 पर एफआईआर दर्ज हुई, जांच शुरू: ताजा अपडेट

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को-ऑपरेटिव: मुख्य समाचार और अपडेट

को-ऑपरेटिव: उत्तर प्रदेश को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की गोंडा शाखा में सामने आए 21 करोड़ 47 लाख 78 हजार रुपये के बड़े वित्तीय घोटाले में कोतवाली नगर थाना गोंडा में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा कराए गए स्पेशल ऑडिट और बैंक की आंतरिक जांच की अंतिम रिपोर्ट में ऋण वितरण तंत्र में गंभीर अनियमितताओं और सुनियोजित धोखाधड़ी की पुष्टि हुई है।

जांच में सामने आया कि आरबीआई के दिशा-निर्देशों और बैंक की आंतरिक नीतियों का उल्लंघन करते हुए तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल ने बैंक कर्मियों और अन्य लोगों के साथ मिलकर एक सिंडिकेट बनाया और अनियमित रूप से ऋण वितरित कर बैंक धन का दुरुपयोग किया।स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, ऋण वितरण से पहले न तो ऋणकर्ताओं की पात्रता की जांच कराई गई और न ही आय प्रमाण पत्र, जमानत मूल्यांकन रिपोर्ट तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किया गया। कई मामलों में फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर ऋण स्वीकृत किए गए। शाखा स्तर पर बैंक नीति और आरबीआई के निर्देशों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।जांच में यह भी खुलासा हुआ कि बैंक के पांच आंतरिक खातों से अवैध रूप से 46.13 लाख रुपये डेबिट कर विभिन्न खातों में ट्रांसफर किए गए और बाद में इस धनराशि को निकालकर गबन कर लिया गया। इसके अलावा खाताधारकों की 2101.65 लाख रुपये की धनराशि को विभिन्न बैंकिंग माध्यमों से स्थानांतरित कर दुरुपयोग किया गया। इस तरह कुल 2147.78 लाख रुपये, यानी 21 करोड़ 47 लाख 78 हजार रुपये के गबन और आपराधिक अपहरण की पुष्टि ऑडिट रिपोर्ट में की गई है।जांच में यह भी सामने आया कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने स्वयं के साथ-साथ माता, पत्नी और पुत्र के खातों का उपयोग किया। ऋण वितरण के नाम पर निकाली गई रकम को परिवार के खातों में घुमाया गया, जिससे मामला पूर्व नियोजित और संगठित अपराध की श्रेणी में आता है।

संबंधित जानकारी (Background):
इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए उत्तर प्रदेश (UP News) का विकिपीडिया पेज देखें।


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