कपसाड़ कांड: कोर्ट में दी पारस की दसवीं की मार्कशीट, अगर मान लिया गया नाबालिग, तो जान लें फिर क्या होगा

josephben1999gd@gmail.com
3 Min Read
कपसाड़ कांड: कोर्ट में दी पारस की दसवीं की मार्कशीट, अगर मान लिया गया नाबालिग, तो जान लें फिर क्या होगा: ताजा अपडेट

SEO MODERATOR PANEL

Focus Keyword: कपसाड़

Meta Description: कपसाड़ News: कपसाड़ कांड: कोर्ट में दी पारस की दसवीं की मार्कशीट, अगर मान लिया गया नाबालिग, तो जान लें फिर क्या होगा – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।

Suggested Slug: कपसाड़-kapsaad-case-documents-submitted-in-favor-of-paras-if-the-court-accepts-him-as-a-minor-2026-01-15

कपसाड़: मुख्य समाचार और अपडेट

कपसाड़: और पढ़ें Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं

कपसाड़ में सुनीता की हत्या और उसकी बेटी रूबी के अपहरण के मामले में नया मोड़ आ गया है। मुख्य आरोपी पारस सोम चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में बंद है। पारस के पिता योगेश ने वकीलों के एक पैनल के जरिए एससी-एसटी कोर्ट में अर्जी दाखिल की है। इसमें दावा किया गया है कि पारस नाबालिग है। बचाव पक्ष ने जज असलम सिद्दीकी के समक्ष प्रार्थना पत्र देकर मांग की है कि पारस को नाबालिग घोषित किया जाए और इस केस को किशोर न्याय बोर्ड में स्थानांतरित किया जाए।

कपसाड़: घटना का पूरा विवरण

बचाव पक्ष ने उम्र की पुष्टि के लिए ठोस दस्तावेज कोर्ट में जमा कराए हैं। इनमें उसकी हाईस्कूल की मार्कशीट, आदर्श इंटर कॉलेज कपसाड़ का 2022 का आईकार्ड और उसका आधार कार्ड शामिल हैं। इन सभी दस्तावेजों के अनुसार परिजनों ने दावा किया कि पारस सोम की उम्र 18 साल से कम है क्योंकि उसकी जन्मतिथि 11 मई 2008 है और उसने 2024 में 10वीं पास की है।

पारस के बचाव में उतरा वकीलों का पैनल

- Advertisement -

पारस के परिजनों ने इस केस की पैरवी के लिए वकीलों का एक पूरा पैनल तैयार किया है। इसमें सुनील शर्मा, संजीव राणा उर्फ संजू, विजय शर्मा और बलराम सोम शामिल हैं।अधिवक्ता बलराम सोम और संजीव राणा ने बताया कि उन्होंने जिला कारागार में जाकर पारस सोम से मुलाकात की और घटना के बारे में जानकारी ली। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए 22 जनवरी की तारीख मुकर्रर की है, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

अगर नाबालिग साबित हुआ तो क्या होगा?

बचाव पक्ष के अधिवक्ता संजीव राणा उर्फ संजू राणा ने कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया यदि कोर्ट पारस को नाबालिग घोषित कर देती है तो यह केस सामान्य अदालत से हटकर किशोर न्याय बोर्ड में चला जाएगा। ऐसे मामलों में आरोपी को जेल के बजाय बाल संप्रेक्षण गृह भेजा जाता है, जहां उसे अपराधी की तरह नहीं बल्कि सुधार की दृष्टि से रखा जाता है। यदि सारे सबूत आरोपी के खिलाफ भी होते हैं तो भी जुवेनाइल एक्ट के तहत अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान है, जिसमें कई तरह की छूट भी मिल सकती है।

संबंधित जानकारी (Background):
इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए उत्तर प्रदेश (UP News) का विकिपीडिया पेज देखें।


ताजा खबरों के लिए upkhabarhindi.com के साथ बने रहें।

मूल खबर यहाँ पढ़ें (Read Original)

Leave a comment

Please Login to Comment.