Potato: हाथरस के आलू की अंतरराष्ट्रीय उड़ान, दुनिया को भा रहा स्वाद, सऊदी अरब-अफ्रीकी देशों को भी होगा निर्यात

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Potato: हाथरस के आलू की अंतरराष्ट्रीय उड़ान, दुनिया को भा रहा स्वाद, सऊदी अरब-अफ्रीकी देशों को भी होगा निर्यात: ताजा अपडेट

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Potato:: मुख्य समाचार और अपडेट

Potato:: यूरोप और चीन में ऊर्जा संकट, खराब मौसम के चलते वहां का खाद्य प्रसंस्करण उद्योग दबाव में है, ऐसे में हाथरस का आलू बेहतरीन गुणवत्ता के दम पर वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना रहा है। इस साल जिले से होने वाले आलू निर्यात में करीब पांच प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। भारत के कुल आलू निर्यात में लगभग छह प्रतिशत हाथरस से जा रहा है।

किसानों की मेहनत और सरकारी नीतियों के चलते हाथरस का आलू अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बना रहा है। आगे प्रोसेसिंग यूनिट और निर्यात हब को और मजबूत किया जाएगा।-प्रदीप चौधरी, विधायक सादाबाद।

किसान आलू के साथ-साथ विविध खेती को अवश्य अपनाएं, जिससे मृदा की गुणवत्ता बरकरार रहे। आलू एक्सपोर्ट करने के लिए किसान एपीडा बनारस और दिल्ली के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। वहां से उन्हें पूरा मार्गदर्शन और आवश्यक जानकारी मिल सकेगी।-सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।

हाथरस का आलू अब दुनिया की थाली में जगह बना रहा है। इसके निर्यात से जुड़े सादाबाद निवासी राजेश चौधरी और गांव नगला सेवा निवासी विपिन चौधरी ने बताया कि यूरोप व चीन में आलू के प्रोसेसिंग उद्योग में बिजली की बढ़ी कीमतें, जलवायु प्रतिकूलता और उत्पादन लागत में इजाफा होने से बाजार में एक खालीपन पैदा हुआ, जिसे हाथरस के किसानों ने समय पर आपूर्ति और कम लागत के सहारे भर दिया।भारत-आसियान व्यापार समझौते के तहत मिलने वाली टैक्स छूट ने भी हाथरस की आलू की किस्मों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा प्रतिस्पर्धी बना दिया है। किसान रामवीर सिंह बताते है कि यूरोप और चीन की समस्या हमारे लिए अवसर है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के शुरुआती महीनों में ही हाथरस, अलीगढ़, आगरा, चंदौसी और कानपुर जिलों के किसानों के दम पर भारत ने 53.68 करोड़ के आलू व प्रोसेस्ड आलू का निर्यात किया गया है। हाथरस के कुल उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा निर्यात में जा रहा है, जबकि शेष उत्पादन दिल्ली-एनसीआर, दक्षिण भारत की मंडियों और घरेलू जरूरतों को पूरा कर रहा है। दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रमुख देश फिलीपींस, इंडोनेशिया और थाईलैंड भी प्रमुख आयातक देशों में शामिल हो रहे हैं। वर्ष 2025 में मलयेशिया ने 18.64 करोड़ का आलू खरीदा था।एपीईडीए के चेयरमैन अभिषेक देव ने इस उपलब्धि की पुष्टि करते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश का आलू अब वैश्विक पहचान बना चुका है। अलग-अलग देशों में पिछले वर्षों से ट्रायल के तौर पर आलू भेजे जा रहे थे। सभी मानकों पर पास होने के बाद ही बड़े पैमाने पर निर्यात का रास्ता खुला है।

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