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Meta Description: India News: India US Trade Deal: भारत- अमेरिका ट्रेड डील पर भड़की कांग्रेस, बताया मोदी सरकार का आत्मसमर्पण! – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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India: मुख्य समाचार और अपडेट
India: कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कहा, “यह डील नहीं आत्मसमर्पण है। कृषि क्षेत्र में भारत सरकार ने घुटने टेके हैं। मैं नहीं जानता कि प्रधानमंत्री मोदी की क्या मजबूरी है कि उन्होंने किसानों के हितों को गिरवी रख दिया है.हमारे पास जो अंतर्राष्ट्रीय मार्केट थी वह तो अब खत्म हो जाएगी.यह मोदी सरकार का आत्मसमर्पण है।”
सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कहा, “डोनाल्ड ट्रंप ने 50% टैरिफ लगाया था लेकिन केंद्र की सरकार ने अमेरिका के राष्ट्रपति से वार्ता की और टैरिफ 18% कम करा दिया। जबकि ज़ीरो प्रतिशत टैरिफ होना चाहिए था। इससे पहले जीरो प्रतिशत टैरिफ था। भारत की केंद्र की सरकार इतनी कमजोर है कि अमेरिका के सामने ठीक से अपना पक्ष नहीं रख पा रही है अगर ठीक से रखा गया होता तो ये टैरिफ ज़ीरो प्रतिशत हो गया होता।
India: घटना का पूरा विवरण
शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कहा, “डोनाल्ड ट्रंप कृतज्ञ होंगे क्योंकि इस डील से अमेरिका को फायदा होगा. MSMEs लगातार पिटे हुए हैं। वे उम्मीद कर रहे थे कि ट्रेड डील बराबर होगी.सच्चाई है कि आज पीयूष गोयल के पास भी जवाब नहीं है.यह डील नहीं हुई है बल्कि अमेरिका से एक फरमान आया है
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर कांग्रेस पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और केंद्र सरकार पर देश के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह व्यापार समझौता पूरी तरह से पारदर्शी नहीं है और इसके प्रावधानों को लेकर न तो संसद में व्यापक चर्चा कराई गई और न ही विपक्ष को विश्वास में लिया गया।
कांग्रेस के अनुसार, सरकार अमेरिका के दबाव में आकर ऐसी शर्तें स्वीकार कर रही है, जो भारतीय किसानों, छोटे उद्योगों और घरेलू व्यापार के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं। पार्टी ने आशंका जताई कि इस डील के जरिए अमेरिकी कृषि उत्पाद, डेयरी और औद्योगिक सामान भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर प्रवेश करेंगे, जिससे स्थानीय उत्पादकों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस नेताओं ने विशेष रूप से कृषि और डेयरी सेक्टर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भारत के करोड़ों किसानों और दुग्ध उत्पादकों की आजीविका पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
India: निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
उनका आरोप है कि सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ की बात तो करती है, लेकिन व्यवहार में विदेशी कंपनियों के लिए बाजार खोलने की नीति अपना रही है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि ट्रेड डील के नाम पर भारत की रणनीतिक और आर्थिक स्वायत्तता को कमजोर किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्ते महत्वपूर्ण हैं, लेकिन किसी भी समझौते में भारत के दीर्घकालिक हित सर्वोपरि होने चाहिए। कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि ट्रेड डील से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और संसद में इस पर विस्तृत बहस कराई जाए, ताकि देश को पता चले कि सरकार किन शर्तों पर सहमत हो रही है।
विपक्ष का यह भी आरोप है कि सरकार बड़े कॉरपोरेट घरानों के हितों को प्राथमिकता दे रही है, जबकि छोटे और मझोले उद्योगों की अनदेखी हो रही है। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि यह डील मौजूदा स्वरूप में आगे बढ़ती है तो वह देशव्यापी आंदोलन से भी पीछे नहीं हटेगी।
पार्टी नेताओं ने कहा कि भारत जैसे विकासशील देश को व्यापारिक समझौतों में बेहद सतर्कता बरतनी चाहिए, क्योंकि एक बार किए गए समझौते का असर वर्षों तक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कांग्रेस का रुख बेहद आक्रामक नजर आ रहा है और उसने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए जवाबदेही तय करने की मांग तेज कर दी है।
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