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Meta Description: Supreme News: Supreme Court: सुपरटेक के घर खरीदारों को ‘सुप्रीम’ राहत, NBCC को अटकी परियोजनाओं को पूरा करने का आदेश बरकरार – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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एनबीसीसी के आदेश पर शीर्ष कोर्ट ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने सभी न्यायाधिकरणों और उच्च न्यायालयों को भी निर्देश दिया। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि वे ऐसा कोई आदेश पारित न करें, जिससे राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) लिमिटेड की ओर से किए जा रहे निर्माण कार्य में बाधा आए।
Supreme: घटना का पूरा विवरण
विज्ञापन विज्ञापन मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई की।
पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का उपयोग करते हुए 12 दिसंबर 2024 के एनसीएलएटी के आदेश को सही ठहराया।
इस आदेश में घर खरीदारों के हित में एनबीसीसी को परियोजनाएं अपने हाथ में लेने को कहा गया था।
Supreme: निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
घर खरीददारों की चिंता पर क्या बोला कोर्ट?
पीठ ने कहा कि कई घर खरीदारों के अनुसार सुपरटेक ने वर्ष 2010 से 2012 के बीच करीब 51 हजार घरों की बुकिंग की थी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पीठ की सबसे पहली और अहम चिंता यह है कि घर खरीदारों के हितों की रक्षा की जाए, ताकि वे उन घरों को हासिल कर सकें, जिनका वे लगभग दो दशकों से इंतजार कर रहे हैं और जिनके लिए उनकी मेहनत की कमाई कथित तौर पर कंपनी ने इधर-उधर कर दी।
सुविधाओं के साथ खरीददारों को सौंपे जाएं मकान: सीजेआई
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि सुपरटेक के वित्तीय और परिचालन लेनदारों के हित और बकाया राशि पर तभी विचार किया जाएगा, जब पहले परेशान घर खरीदारों को पूरी तरह तैयार मकान सौंप दिए जाएंगे। पीठ ने यह भी स्पष्ट कहा कि जिन सुविधाओं का वादा किया गया था, घरों में वह सब होनी चाहिए। इनमें पानी, बिजली, सीवेज कनेक्शन के साथ-साथ आसपास की सड़कें और पार्क भी शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि सुपरटेक के वित्तीय और परिचालन लेनदारों को उतना ही नुकसान उठाना होगा, जितना एनसीएलटी और एनसीएलएटी ठीक और न्यायसंगत मानेंगे।
पीठ ने कहा कि कई घर खरीदारों के अनुसार सुपरटेक ने वर्ष 2010 से 2012 के बीच करीब 51 हजार घरों की बुकिंग की थी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पीठ की सबसे पहली और अहम चिंता यह है कि घर खरीदारों के हितों की रक्षा की जाए, ताकि वे उन घरों को हासिल कर सकें, जिनका वे लगभग दो दशकों से इंतजार कर रहे हैं और जिनके लिए उनकी मेहनत की कमाई कथित तौर पर कंपनी ने इधर-उधर कर दी।ये भी पढ़ें: राज्यसभा में बोले PM: रोज दो किलो गाली खाता हूं, मोहब्बत की दुकान वाले ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’ के नारे लगा रहे मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि सुपरटेक के वित्तीय और परिचालन लेनदारों के हित और बकाया राशि पर तभी विचार किया जाएगा, जब पहले परेशान घर खरीदारों को पूरी तरह तैयार मकान सौंप दिए जाएंगे। पीठ ने यह भी स्पष्ट कहा कि जिन सुविधाओं का वादा किया गया था, घरों में वह सब होनी चाहिए। इनमें पानी, बिजली, सीवेज कनेक्शन के साथ-साथ आसपास की सड़कें और पार्क भी शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि सुपरटेक के वित्तीय और परिचालन लेनदारों को उतना ही नुकसान उठाना होगा, जितना एनसीएलटी और एनसीएलएटी ठीक और न्यायसंगत मानेंगे।
करीब दो दशकों से अपने सपनों के घर का इंतजार कर रहे लोगों को करीब दो दशकों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ी राहत दी। शीर्ष कोर्ट ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के आदेश को बरकरार रखा। एनसीएलटी के आदेश में कर्ज में डूबी रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक लिमिटेड की 16 अटकी हुई आवासीय परियोजनाओं को सरकारी कंपनी एनबीसीसी से जल्द पूरा कराने को कहा गया था।
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