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Meta Description: Amar News: Amar Ujala Batras: ‘तीन साल की उम्र में खुद चुना था अपना नाम’, आशुतोष राणा ने साझा किए जीवन के अनछुए संस्मरण – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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इस पूरे पॉडकास्ट को आप शनिवार रात आठ बजे अमर उजाला के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स पर सुन सकते हैं। आशुतोष राणा बॉलीवुड के वो मंझे कलाकार हैं, जिन्होंने अपने विलक्षित अभिनय के दम पर अपनी खास पहचान बनाई है। यही वजह रही कि एक समय में वे विलेन के रूप में हीरो पर भारी पड़ते थे। एक समय था जब हर निर्देशक आशुतोष को अपनी फिल्म में जान डालने के लिए कास्ट करना चाहता था। अपने उम्दा अभिनय का लोहा मनवा चुके आशुतोष राणा की पहचान एक ऐसे अभिनेता की है जो लेखनी में भी माहिर है। अमर उजाला बतरस में इस हफ्ते आशुतोष राणा खास मेहमान रहे। अमर उजाला के संपादक जयदीप कार्णिक से बातचीत में इस हफ्ते आशुतोष राणा ने न सिर्फ अपने अभिनय के दिनों के बारे में बात की, बल्कि अपनी निजी जिंदगी के भी कई अनसुने किस्से साझा किए।
Amar: घटना का पूरा विवरण
आशुतोष राणा बताते हैं कि उनका जन्म मध्य प्रदेश के गाडरवारा में हुआ। वे ‘एक बड़े परिवार’ में ‘सबसे छोटे सदस्य’ थे। उन्हें मात्र तीन वर्ष की आयु में अपना नाम स्वयं चुनने की स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी। उन्होंने साझा किया कि एक शिव अभिषेक के दौरान जब उन्होंने ‘ओम आशुतोषाय नमः’ मंत्र सुना, तो उन्होंने इसका अर्थ पूछा। पंडित जी द्वारा यह बताए जाने पर कि ‘आशुतोष’ का अर्थ है ‘जो जल्दी प्रसन्न हो जाए’, बाल आशुतोष को यह भाव इतना भाया कि उन्होंने अपनी मां से उसी समय अपना नाम ‘आशुतोष’ रखने की घोषणा कर दी। इससे पहले उन्हें परिवार में केवल ‘राणा जी’ कहकर बुलाया जाता था।
अनोखी पारिवारिक परंपरा और साहित्यिक संस्कार
आशुतोष राणा के मुताबिक, घर में शिक्षा और साहित्य को लेकर एक अद्भुत परंपरा थी। उनके परिवार में बच्चों को पाठ्यक्रम के अलावा अन्य साहित्य जैसे प्रेमचंद, निराला और यहां तक कि जासूसी उपन्यास पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था। घर का नियम था कि बड़ा सदस्य छोटे को अपनी पसंद की किताब पढ़कर सुनाएगा और छोटा सदस्य बड़े लोगों को एंगेज करेगा। हर 15 दिन में एक ‘गोलमेज सम्मेलन’ आयोजित होता था, जहां माता-पिता बच्चों के साथ उन किताबों पर गंभीर चर्चा करते थे, जिससे उनमें कहानी कहने और रस पैदा करने की कला विकसित हुई।
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