Artifical Intelligence: एआई की बिसात पर भारत की नई चाल, अमेरिका और चीन को देंगे स्वदेशी से मात

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Artifical Intelligence: एआई की बिसात पर भारत की नई चाल, अमेरिका और चीन को देंगे स्वदेशी से मात: ताजा अपडेट

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Artifical: एआई के भविष्य को लेकर भारत कितना गंभीर है? क्या हम सिर्फ फौरी तौर पर इसमें शामिल हैं? वी. कामकोटि ने कहा कि हम सिर्फ गंभीर नहीं, ‘सुपर सीरियस’ हैं। एआई के लिए दो चीजें ऑक्सीजन हैं। एक डाटा और दूसरा यूजर्स। हमारे पास 150 करोड़ की आबादी और 100 करोड़ स्मार्टफोन यूजर्स हैं। यूपीआई, स्मार्ट सिटी और हेल्थ सेक्टर का हमारा डाटा सेट दुनिया के लिए ईर्ष्या का विषय है। प्रधानमंत्री मोदी का विजन स्पष्ट है कि एआई का मतलब ‘एस्पायरिंग इंडिया’ और ‘एडवांटेज इंडिया’। बड़े इनोवेशन अब पश्चिम में नहीं, भारत की मिट्टी में होंगे।चीन के ‘डीपसीक’ ने हलचल मचा दी है, भारत कहां खड़ा है? इस पर कामकोटि ने कहा कि रैंकिंग स्कोर जिसमें, भारत 21.59 और अमेरिका 78.6 को मैं पूरी तरह सही नहीं मानता… क्योंकि यह सामाजिक प्रभाव को नहीं मापता। चीन ने ‘डीपसीक’ के जरिए कम कंप्यूट पावर में बड़ा मॉडल बनाकर दुनिया को चौंकाया, लेकिन भारत उससे भी आगे की सोच रहा है। हम ‘लाइफ आफ्टर जीपीयू’ पर काम कर रहे हैं। अभी हम जीपीयू के लिए विदेशों पर निर्भर हैं, लेकिन हमारे संस्थान ऐसे सॉफ्टवेयर बना रहे हैं जो साधारण प्रोसेसर पर भी दौड़ेंगे। ‘मच्छर मारने के लिए रिवॉल्वर (जीपीयू) की जरूरत नहीं’, हम मितव्ययी और सटीक मॉडल बना रहे हैं।एआई से शिक्षा और गवर्नेंस में क्या बदलाव आएगा? क्या ‘बोधन एआई’ जैसे प्रोजेक्ट्स सफल होंगे? इस पर विनीत जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में इसकी नींव पहले ही रख दी गई थी। हमारा लक्ष्य है कि चेन्नई का श्रेष्ठ शिक्षक मणिपुर के गांव में भी पढ़ा सके। एआई के माध्यम से छात्र अपनी मातृभाषा में जटिल विषय समझ सकेंगे। यह मैकाले की एकतरफा शिक्षा पद्धति को जड़ से खत्म कर ‘वाद-विवाद’ और ‘संवाद’ की भारतीय परंपरा को वापस लाएगा। ‘बोधन एआई’ जल्द ही शिक्षा का ‘यूपीआई’ बनेगा, जो शिक्षकों की ट्रेनिंग और छात्रों के मूल्यांकन में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।क्या ‘भारतजन’ और ‘सर्वम’ जैसे स्वदेशी मॉडल ‘चैट जीपीटी’ को टक्कर दे पाएंगे? कामकोटि ने कहा- बिल्कुल। ‘भारतजन’ और ‘सर्वम’ ने वॉयस और इंडिक ओसीआर में दिग्गजों को धूल चटाई है। विदेशी मॉडल भारत का ‘कॉन्टेक्स्ट’ नहीं समझते। हमारी ताकत अनेकता में एकता है। एक ही भाषा के कई डायलेक्ट्स (बोलियां) हमारे डाटा को दुनिया में सबसे मजबूत बनाते हैं। हमें ‘सॉवरेन मॉडल’ चाहिए ताकि हमारे बच्चों को वही सिखाया जाए जो हमारे देश का विचार और संस्कृति है।एआई से नौकरियां जाने का डर है और ‘डीपफेक’ जैसे खतरे भी बड़े हैं, सुरक्षा क्या है? विनीत जोशी ने कहा कि खतरा अत्यधिक निर्भरता का है। ऐसा न हो कि बच्चे खुद सोचना छोड़ दें। इसलिए हम पढ़ाने के तरीके बदल रहे हैं। अब क्लास में सिर्फ ‘डिस्कशन’ होगा, रटना नहीं। सरकार ‘सेफ एंड एथिकल यूज’ के लिए गंभीर है। ‘इंडिया एआई मिशन’ में ‘सेफ एंड एथिकल एआई’ के लिए विशेष वर्टिकल है। हम तकनीक को ‘ह्यूमन-सेंट्रिक’ रख रहे हैं।

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