Assam Election: असम में 89 सीटों पर चुनाव लड़ेगी भाजपा, AGP को 26 और बीपीएफ को मिलीं 11 सीटें; क्या बोले सीएम?

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Assam Election: असम में 89 सीटों पर चुनाव लड़ेगी भाजपा, AGP को 26 और बीपीएफ को मिलीं 11 सीटें; क्या बोले सीएम?: ताजा अपडेट

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बोरदोलोई के संपर्क में नहीं हूं: हिमंत बिस्व सरमा

Assam: घटना का पूरा विवरण

उन्होंने कहा, मैं (कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले असम के सांसद) प्रद्युत बोरदोलोई के संपर्क में नहीं हूं। अगर उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से बात की होती, तो मुझे पता होता, लेकिन मुझे नहीं लगता कि उन्होंने अभी तक किसी भाजपा नेता से बात की है। इसकी संभावना है कि हम प्रद्युत बोरदोलोई से संपर्क कर सकें। विज्ञापन विज्ञापन

‘भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन में नहीं यूपीपीएल’

इससे पहले, मुख्यमंत्री सरमा ने बताया था कि यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) अब राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा नहीं है, जबकि बीपीएफ गठबंधन में बना रहेगा। यूपीपीएल और बीपीएफ बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (बीटीसी) में प्रतिद्वंद्वी दल हैं। यह क्षेत्र राज्य का एक स्वायत्त इलाका है। इसे 2003 में संविधान की छठी अनुसूची के तहत स्वायत्त बनाया गया था। बीटीसी क्षेत्र से 15 विधायक विधानसभा में भेजे जाते हैं।

Assam: निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

सरमा ने कहा था कि भाजपा, असम गण परिषद (एजीपी) और बीपीएफ के बीच सीटों का बंटवारा तय हो चुका है और दोपहर बाद घोषणा की जा सकती है कि कौन-सी पार्टी किन सीटों पर चुनाव लड़ेगी। नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए सरमा ने कहा, यूपीपीएल 15 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और हमारी शुभकामनाएं उनके साथ हैं। हमारा गठबंधन बीपीएफ के साथ है।

असम में कब होगा मतदान और मतगणना?

126 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव नौ अप्रैल को होंगे और मतगणना चार मई को की जाएगी।

‘यूपीपीएल पांच साल तक गठबंधन सरकार का हिस्सा रही’

यूपीपीएल राज्य में पूरे पांच साल तक गठबंधन सरकार का हिस्सा रही, जबकि बीपीएफ ने बाद में समर्थन दिया था। दोनों दलों के मंत्री राज्य कैबिनेट में शामिल हैं। बीपीएफ 2016 में बनी पिछली भाजपा नेतृत्व वाली सरकार का भी हिस्सा थी। उससे पहले 2006 से बीपीएफ कांग्रेस-नेतृत्व वाली सरकारों की सहयोगी रही थी। बीपीएफ 2005 में बीटीसी के गठन के बाद से सत्ता में रही थी, लेकिन 2020 में यूपीपीएल ने उसे हटा दिया था। हालांकि, 2025 में परिषद चुनावों में बीपीएफ ने फिर से सत्ता हासिल कर ली।

सरमा ने बताया कि एजीपी 26 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, जो पिछली विधानसभा चुनाव में लड़ी गई सीटों के बराबर है। सीट बंटवारे के तहत बीपीएफ को 11 सीटें दी गई हैं। उन्होंने कहा, आज शाम हमारी संसदीय बैठक के बाद हम सीटों के लिए नामों का एलान कर सकते हैं। भाजपा, एजीपी और बीपीएफ ने अभी तक विधानसभा चुनाव के लिए किसी भी उम्मीदवार के नाम का एलान नहीं किया है।

वर्तमान विधानसभा में किस पार्टी के कितने विधायक?

वर्तमान विधानसभा में 126 सदस्यों में से सत्तारूढ़ भाजपा के पास 64 विधायक हैं, जबकि उसके सहयोगी एजीपी के पास 9, यूपीपीएल के पास 7 और बीपीएफ के पास 3 विधायक हैं। विपक्ष में कांग्रेस के पास 26 सदस्य, एआईयूडीएफ के 15 विधायक और सीपीआई(एम) का एक विधायक है। एक निर्दलीय विधायक भी है।

उन्होंने कहा, मैं (कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले असम के सांसद) प्रद्युत बोरदोलोई के संपर्क में नहीं हूं। अगर उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से बात की होती, तो मुझे पता होता, लेकिन मुझे नहीं लगता कि उन्होंने अभी तक किसी भाजपा नेता से बात की है। इसकी संभावना है कि हम प्रद्युत बोरदोलोई से संपर्क कर सकें।इससे पहले, मुख्यमंत्री सरमा ने बताया था कि यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) अब राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा नहीं है, जबकि बीपीएफ गठबंधन में बना रहेगा। यूपीपीएल और बीपीएफ बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (बीटीसी) में प्रतिद्वंद्वी दल हैं। यह क्षेत्र राज्य का एक स्वायत्त इलाका है। इसे 2003 में संविधान की छठी अनुसूची के तहत स्वायत्त बनाया गया था। बीटीसी क्षेत्र से 15 विधायक विधानसभा में भेजे जाते हैं।सरमा ने कहा था कि भाजपा, असम गण परिषद (एजीपी) और बीपीएफ के बीच सीटों का बंटवारा तय हो चुका है और दोपहर बाद घोषणा की जा सकती है कि कौन-सी पार्टी किन सीटों पर चुनाव लड़ेगी। नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए सरमा ने कहा, यूपीपीएल 15 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और हमारी शुभकामनाएं उनके साथ हैं। हमारा गठबंधन बीपीएफ के साथ है।126 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव नौ अप्रैल को होंगे और मतगणना चार मई को की जाएगी।यूपीपीएल राज्य में पूरे पांच साल तक गठबंधन सरकार का हिस्सा रही, जबकि बीपीएफ ने बाद में समर्थन दिया था। दोनों दलों के मंत्री राज्य कैबिनेट में शामिल हैं। बीपीएफ 2016 में बनी पिछली भाजपा नेतृत्व वाली सरकार का भी हिस्सा थी। उससे पहले 2006 से बीपीएफ कांग्रेस-नेतृत्व वाली सरकारों की सहयोगी रही थी। बीपीएफ 2005 में बीटीसी के गठन के बाद से सत्ता में रही थी, लेकिन 2020 में यूपीपीएल ने उसे हटा दिया था। हालांकि, 2025 में परिषद चुनावों में बीपीएफ ने फिर से सत्ता हासिल कर ली।ये भी पढ़ें: ‘ED की छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी का दखल देना अच्छी स्थिति नहीं’, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी सरमा ने बताया कि एजीपी 26 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, जो पिछली विधानसभा चुनाव में लड़ी गई सीटों के बराबर है। सीट बंटवारे के तहत बीपीएफ को 11 सीटें दी गई हैं। उन्होंने कहा, आज शाम हमारी संसदीय बैठक के बाद हम सीटों के लिए नामों का एलान कर सकते हैं। भाजपा, एजीपी और बीपीएफ ने अभी तक विधानसभा चुनाव के लिए किसी भी उम्मीदवार के नाम का एलान नहीं किया है।वर्तमान विधानसभा में 126 सदस्यों में से सत्तारूढ़ भाजपा के पास 64 विधायक हैं, जबकि उसके सहयोगी एजीपी के पास 9, यूपीपीएल के पास 7 और बीपीएफ के पास 3 विधायक हैं। विपक्ष में कांग्रेस के पास 26 सदस्य, एआईयूडीएफ के 15 विधायक और सीपीआई(एम) का एक विधायक है। एक निर्दलीय विधायक भी है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बुधवार को घोषणा की कि असम गण परिषद (एजीपी) 26 सीटों पर, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) 11 सीटों पर और शेष सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा, आज हमने अपनी पार्टी सूची के संबंध में शुरुआती चर्चा की। कल हमारी संसदीय बोर्ड की बैठक है। मुझे लगता है कि सूची कल देर रात या परसों सुबह घोषित की जाएगी।

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