23 महीने बाद हुई आजम खान रिहाई: सीतापुर जेल से बाहर आते ही समर्थकों का लगा तांता
समाजवादी पार्टी (सपा) के कद्दावर नेता और रामपुर से विधायक आज़म खान शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे सीतापुर जेल से बाहर आ गए। लगभग 23 महीने की लंबी कैद के बाद हुई आजम खान रिहाई ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम जमानत दिए जाने के बाद, उनके समर्थक पिछले कई घंटों से जेल के बाहर डटे हुए थे। इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए सीतापुर से लेकर रामपुर तक जश्न का माहौल है।
आजम खान रिहाई के दौरान उनके साथ उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म और शिवपाल सिंह यादव मौजूद रहे। जेल से बाहर आते ही उन्होंने अपने समर्थकों का अभिवादन किया, जिन्होंने ‘शेर आ गया’ जैसे नारे लगाए।
कैसे संभव हुई आजम खान रिहाई? कानूनी दांवपेच और सुप्रीम कोर्ट का फैसला
आज़म खान पर कुल 87 मामले दर्ज थे, जिनमें जमीन हथियाने, धोखाधड़ी और शत्रु संपत्ति से जुड़े गंभीर आरोप शामिल थे। पिछले दो वर्षों से उनकी जमानत याचिकाओं को निचली अदालतों से लगातार निराशा मिली। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने लगातार देरी और एक मामले में विचाराधीन होने के आधार पर दखल दिया।
सर्वोच्च न्यायालय ने पाया कि जानबूझकर जमानत में देरी की जा रही है, जिसके बाद उन्हें अंतरिम जमानत दी गई। आजम खान रिहाई के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा शत्रु संपत्ति का मामला था, जिसमें जमानत लंबित थी।
कानूनी प्रक्रिया में मुख्य बातें जो आजम खान रिहाई का कारण बनीं:
- सुप्रीम कोर्ट ने 87वें मामले में फैसला सुरक्षित रखा था, और मामले को राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा माना।
- जस्टिस एल नागेश्वर राव, बीआर गवई और एएस बोपन्ना की बेंच ने लंबी अवधि तक विचाराधीन रहने के आधार पर जमानत दी।
- रिहाई के लिए एक लाख रुपये का निजी मुचलका भरने का आदेश दिया गया, जिसे तत्काल पूरा किया गया।
- कोर्ट ने निर्देश दिया कि शत्रु संपत्ति मामले की जांच में सहयोग किया जाए।
उत्तर प्रदेश की सियासत पर आजम खान रिहाई का असर
आजम खान रिहाई का समय उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण है। आजम खान को सपा का सबसे बड़ा मुस्लिम चेहरा माना जाता है। उनकी अनुपस्थिति में, सपा को रामपुर और आसपास के क्षेत्रों में कई उपचुनावों में नुकसान उठाना पड़ा था।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस निर्णय का स्वागत किया है और इसे न्याय की जीत बताया है। उनका मानना है कि आजम खान की उपस्थिति से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी।
रामपुर और आसपास के मुस्लिम बहुल इलाकों में, कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटकर और आतिशबाजी करके आजम खान रिहाई का जश्न मनाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी सक्रियता से पश्चिमी यूपी और रोहिलखंड क्षेत्र में सपा की चुनावी संभावनाओं को बल मिलेगा। जेल से बाहर आने के बाद, आज़म खान सबसे पहले पार्टी की बैठकों में हिस्सा ले सकते हैं और संगठन को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
अब देखना यह है कि आजम खान रिहाई के बाद वह अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ किस तरह की रणनीति अपनाते हैं और सपा के साथ उनके रिश्ते किस दिशा में जाते हैं।
अधिक जानकारी के लिए, आप निम्नलिखित लेखों को पढ़ सकते हैं:
- इनबाउंड लिंक (सपा राजनीति): समाजवादी पार्टी की वर्तमान रणनीति पर एक नज़र
- आउटबाउंड लिंक (कानूनी प्रक्रिया): सुप्रीम कोर्ट के जमानत संबंधी नियमों की विस्तृत जानकारी
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