BNS की धारा 152 की वैधता: कोर्ट ने कहा- संसद को कानून बनाने का विशेषाधिकार, वह केंद्र के वादे से बंधी नहीं

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BNS की धारा 152 की वैधता: कोर्ट ने कहा- संसद को कानून बनाने का विशेषाधिकार, वह केंद्र के वादे से बंधी नहीं: ताजा अपडेट

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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि संसद एक संप्रभु निकाय है और कानून बनाना उसका विशेषाधिकार है। वह केंद्र सरकार की ओर से न्यायालय के समक्ष दिए गए किसी भी वचन से बंधी नहीं है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने शुक्रवार को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 की वैधता पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। यह धारा भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश एक वकील ने कहा कि धारा 152 पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए (राजद्रोह) को दोबारा लागू करती है।

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