Bombay High Court: बॉम्बे हाईकोर्ट ने शराबी शख्स की मुआवजा याचिका की खारिज, की ये बड़ी टिप्पणी

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Bombay High Court: बॉम्बे हाईकोर्ट ने शराबी शख्स की मुआवजा याचिका की खारिज, की ये बड़ी टिप्पणी: ताजा अपडेट

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Meta Description: Bombay News: Bombay High Court: बॉम्बे हाईकोर्ट ने शराबी शख्स की मुआवजा याचिका की खारिज, की ये बड़ी टिप्पणी – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।

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Bombay: मुख्य समाचार और अपडेट

Bombay: न्यायमूर्ति जितेंद्र जैन की एकल पीठ ने बुधवार को पारित आदेश में कहा कि शराब हर चीज को बर्बाद कर देती है। यह टिप्पणी उस अपील को खारिज करते हुए की गई, जिसमें एक शहर निवासी ने रेलवे दावा न्यायाधिकरण के 2014 के आदेश को चुनौती दी थी। न्यायाधिकरण ने उसे रेलवे प्लेटफॉर्म पर लगी चोटों के लिए मुआवजा देने से इनकार कर दिया था।अदालत ने कहा कि आवेदक को राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि चोट नशे की हालत में किए गए उसके कृत्य का नतीजा थी। आदेश में कहा गया कि अत्यधिक शराब के सेवन से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, रिश्तों, करियर और सामाजिक जीवन पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ते हैं।याचिकाकर्ता, जो बॉम्बे हॉस्पिटल में लैब असिस्टेंट था, ने दावा किया था कि 10 मार्च 2001 की आधी रात को वह मरीन लाइंस स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहा था, तभी एक आती हुई ट्रेन की चपेट में आ गया। उसे पहले जीटी अस्पताल और बाद में बॉम्बे हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां रिकॉर्ड में उल्लेख था कि उसने काफी मात्रा में शराब का सेवन किया था।हाईकोर्ट ने कहा कि इस घटना को ‘अकस्मात’ नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब कोई व्यक्ति अत्यधिक नशे में प्लेटफॉर्म के किनारे खड़ा होता है, तो यह रेलवे अधिनियम की धारा 124ए के तहत आता है, जो नशे की स्थिति में हुए हादसों में मुआवजे पर रोक लगाती है।

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