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Meta Description: CAPF: News: CAPF: अर्धसैनिक बलों के कैडर अफसरों को झटका देने की तैयारी, क्या सरकार SC का फैसला पलटने के लिए लाएगी बिल – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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CAPF:: मुख्य समाचार और अपडेट
CAPF:: पदोन्नति एवं दूसरे आर्थिक हितों के मोर्चे पर पिछड़ रहे केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के कैडर अफसरों को सर्वोच्च न्यायालय से जो बड़ी जीत मिली थी, अब केंद्र सरकार उसे संसद में ‘बिल’ लाकर पलटने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में ‘संगठित सेवा का दर्जा’ देने और कैडर अफसरों के दूसरे हितों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने मई 2025 में एक अहम फैसला सुनाया था। उसमें कहा गया कि इन बलों में ‘संगठित समूह ए सेवा’ (ओजीएएस) सही मायने में लागू हो। छह महीने में ‘कैडर रिव्यू’ किया जाए। इस फैसले के खिलाफ सरकार, सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन में चली गई, जिसे सर्वोच्च अदालत ने डिसमिस कर दिया था।
बता दें कि इसके बाद कैडर अफसरों के मामले की फाइल आगे नहीं बढ़ी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार को जो छह माह दिए गए थे, वह अवधि खत्म हो चुकी है। नतीजा, याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्रीय गृह सचिव के खिलाफ अवमानना याचिका लगा दी। दस फरवरी को जस्टिस बी.वी. नागारत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बैंच ने इस मामले की सुनवाई की।सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में नोटिस जारी कर दिया और प्रतिवादी पक्ष को फिलहाल के लिए व्यक्तिगत पेशी से माफी दे दी है। इसके अलावा कोर्ट ने अवमानना याचिका में प्रतिवादी पक्ष से और भी नाम जोड़ने की अनुमति दे दी है। सूत्रों के मुताबिक, अब सरकार के पास न्यायालय से जुड़े तमाम रास्ते बंद हो गए हैं, इसलिए सरकार, बिल के जरिए उक्त फैसले को अप्रभावी करने की तैयारी कर रही है।सर्वोच्च अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि आईपीएस अधिकारियों के चलते सीएपीएफ के कैडर अधिकारी, पदोन्नति में पिछड़ जाते हैं। उन्हें नेतृत्व का अवसर नहीं मिल पाता। इन बलों में केवल एनएफएफयू (नॉन फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन) के लिए नहीं, बल्कि सभी कार्यों के लिए ‘ओजीएएस पैटर्न’ लागू किया जाए। शीर्ष अदालत ने सरकार को ‘एसएजी’ (वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड) स्तर तक के पदों पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को अगले दो साल में धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया था। इन बलों में आईपीएस के चलते कैडर अधिकारियों की पदोन्नति में ठहराव देखने को मिल रहा है।खास बात है कि सर्वोच्च अदालत ने केंद्रीय बलों में आईपीएस की प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम करने की बात कही थी, लेकिन इसके विपरित पिछले छह माह में केंद्रीय बलों में आईपीएस प्रतिनियुक्ति में तेजी दिखाई दी। जून 2025 में 678 आईपीएस अधिकारी, केंद्र में तैनात थे। अब यह संख्या, 700 के पार पहुंच गई है। पिछले साल जून में केंद्र सरकार में बतौर प्रतिनियुक्ति 15 डीजी, 12 एसडीजी, 26 एडीजी, 150 आईजी, 254 डीआईजी और 221 एसपी के पद स्वीकृत थे। वहीं 23 दिसंबर 2025 में आईपीएस ‘प्रतिनियुक्ति’ के लिए स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ा दी गई। फिलहाल, केंद्र में डीजी के 15 पद, एसडीजी के 17, एडीजी के 30, आईजी के 158, डीआईजी के 256 और एसपी के 225 पद स्वीकृत किए गए हैं।बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद बताते हैं कि सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ और दूसरे केंद्रीय बलों में पदोन्नति को लेकर हालात खराब होते जा रहे हैं। कैडर अफसरों को 15 साल में पहली पदोन्नति नहीं मिल पा रही। इस रफ्तार से तो वे कमांडेंट के पद से ही रिटायर हो जाएंगे। दो तीन सौ अफसरों में से एक आध ही एडीजी तक पहुंच सकेगा।
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