CAPF: पदोन्नति में पिछड़ते ग्राउंड कमांडर, केंद्र में बढ़ेंगे IPS, क्यों फाइलों से बाहर नहीं आई MHA की सलाह

6 Min Read
CAPF: पदोन्नति में पिछड़ते ग्राउंड कमांडर, केंद्र में बढ़ेंगे IPS, क्यों फाइलों से बाहर नहीं आई MHA की सलाह: ताजा अपडेट

SEO MODERATOR PANEL

Focus Keyword: CAPF:

Meta Description: CAPF: News: CAPF: पदोन्नति में पिछड़ते ग्राउंड कमांडर, केंद्र में बढ़ेंगे IPS, क्यों फाइलों से बाहर नहीं आई MHA की सलाह – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।

Suggested Slug: capf:-capf-ground-commanders-lagging-promotions-ips-rise-at-the-centre-why-mha-advice-hasn-t-come-out-of-files-2026-02-17

CAPF:: मुख्य समाचार और अपडेट

CAPF:: केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (सीएपीएफ) के कैडर अफसर, पदोन्नति एवं दूसरे आर्थिक हितों के मोर्चे पर पिछड़ते जा रहे हैं। 2019 और 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कैडर अफसरों के हितों को लेकर जो फैसला दिया था, वह लागू नहीं हो सका। वजह, सरकार इसके लिए राजी नहीं थी। सर्वोच्च न्यायालय ने मई 2025 के अपने फैसले में कहा था कि इन बलों में ‘संगठित समूह ए सेवा’ (ओजीएएस) सही मायने में लागू किया जाए। छह महीने में ‘कैडर रिव्यू’ हो। सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में ‘पुनर्विचार याचिका’ दायर कर दी। सर्वोच्च अदालत ने इसे भी खारिज कर दिया। अब सरकार, संसद में ‘बिल’ के माध्यम से इस फैसले को पलटने की तैयारी कर रही है। सरकार ने इस बाबत शीर्ष अदालत में एक हलफनामा भी दिया है। दूसरी तरफ गृह मंत्रालय के शीर्ष अफसरों ने सत्तर-अस्सी के दशक में आईपीएस प्रतिनियुक्ति को लेकर जो सलाह दी थी, वह अब फाइलों से बाहर नहीं आ पा रही हैं।

आईपीएस के चलते सीएपीएफ के कैडर अधिकारी, पदोन्नति में पिछड़ जाते हैं। उन्हें नेतृत्व का अवसर नहीं मिल पाता। इन बलों में केवल एनएफएफयू (नॉन फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन) के लिए नहीं, बल्कि सभी कार्यों के लिए ‘ओजीएएस पैटर्न’ लागू किया जाए। ‘एसएजी’ (वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड) स्तर तक के पदों पर आईपीएस की प्रतिनियुक्ति को सरकार, अगले दो साल में धीरे-धीरे कम करे।

CAPF:: घटना का पूरा विवरण

नतीजा: केंद्र में जून 2025 में जहां 678 आईपीएस थे, वहीं दिसंबर में यह संख्या 700 के पार पहुंच गई। सरकार ने आईपीएस की संख्या घटाने की बजाए, उसमें बढ़ोतरी कर दी।

बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद के अनुसार, सीआरपीएफ, बीएसएफ व दूसरे केंद्रीय बलों में कैडर अफसरों के लिए पदोन्नति का इंतजार बहुत लंबा होता जा रहा है। ग्राउंड कमांडर (सहायक कमांडेंट) को 15 वर्ष में पहली पदोन्नति नहीं मिल पा रही है।

नतीजा: अगर यही स्थिति रही तो अधिकांश कैडर अधिकारी ‘कमांडेंट’ से ही रिटायर हो जाएंगे। दो तीन सौ अफसरों में से एक आध ही आईजी/एडीजी तक पहुंच सकेगा।

CAPF:: निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

तत्कालीन होम सेक्रेट्री लल्लन प्रसाद सिंह ने लिखा, केंद्रीय बलों में आईपीएस के लिए पद आरक्षित न हों। कैडर अधिकारी, पदोन्नति के जरिए आगे बढ़ते रहेंगे और टॉप तक पहुंच जाएंगे। 1955 के फोर्स एक्ट में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

1970 में गृह मंत्रालय के डिप्टी डायरेक्टर ‘संगठन’ जेसी पांडे ने लिखा, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में आईपीएस के लिए पद फिक्स मत करो। इससे कैडर अफसरों के मौके प्रभावित होंगे।

नतीजा: तब ये सलाह नहीं मानी गई और केंद्रीय सुरक्षा बलों में अधिकांश पद आईपीएस के लिए रिजर्व कर दिए गए। 1959 में पहली बार आईपीएस अधिकारी, कमांडेंट बन कर केंद्रीय सुरक्षा बलों में आए थे।

डीजी बीएसएफ/डीजी सीआरपीएफ ने कहा

बीएसएफ के पहले डीजी केएफ रुस्तम ने कहा, केंद्रीय बलों में आईपीएस अफसर के लिए पदों का आरक्षण न हो। हम अपने अफसर तैयार करेंगे, जो कुछ समय बाद फोर्स का नेतृत्व करेंगे। 1968 में सीआरपीएफ के पहले डीजी वीजी कनेत्कर ने कहा था, मुझे आईपीएस अधिकारियों की जरूरत ही नहीं है। अब केवल वर्किंग फार्मूला ले लो, जो बाद में नई व्यवस्था के साथ परिवर्तित हो जाएगा।

नतीजा: बाद के दशकों में केंद्रीय बलों में आईपीएस प्रतिनियुक्ति का कोटा बढ़ता चला गया। अब डीजी/एडीजी, आईजी, डीआईजी के अलावा कमांडेंट के पर भी आईपीएस आने लगे हैं। इससे कैडर अफसरों की पदोन्नति के अवसर कम होते जा रहे हैं। सीआरपीएफ के पूर्व एसी और अधिवक्ता सर्वेश त्रिपाठी बताते हैं कि पिछले दिनों गृह मंत्रालय ने एसपी/डीआईजी रैंक के आईपीएस के लिए केंद्र में आईजी के पद पर नियुक्ति के लिए दो साल की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति अनिवार्य कर दी है। यह आदेश 2011 बैच से आगे के आईपीएस पर लागू होगा। इससे केंद्र में आईपीएस ज्यादा संख्या में आने लगेंगे, जिसके चलते केंद्रीय बलों में कैडर अफसरों की पदोन्नति के अवसर सीमित होते चले जाएंगे। सरकार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने का कोई अवसर नहीं छोड़ रही।

संबंधित जानकारी (Background):
इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए उत्तर प्रदेश (UP News) का विकिपीडिया पेज देखें।


ताजा खबरों के लिए upkhabarhindi.com के साथ बने रहें।

मूल खबर यहाँ पढ़ें (Read Original)

Exit mobile version