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Meta Description: Police News: Police Diary: बदली पुलिस की भाषा, गायब हो रहे हस्बतलविदा-माल मसरूका जैसे शब्द – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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Police: मुख्य समाचार और अपडेट
Police: यूपी पुलिस के कामकाज में एक बड़ा बदलाव चुपचाप आकार ले रहा है। अरबी-फारसी और उर्दू के वे जटिल शब्द, जो दशकों से पुलिस डायरी और केस फाइलों का हिस्सा रहे हैं, अब धीरे-धीरे गायब होते जा रहे हैं। शत-प्रतिशत कंप्यूटराइजेशन और उच्च शिक्षित युवाओं की भर्ती के बाद पुलिस की भाषा भी बदल रही है।
अरबी-फारसी या उर्दू शब्दों का प्रयोग करना कोई बाध्यता नहीं है। अब स्टाफ खुद ही सामान्य हिंदी शब्दों का प्रयोग कर रहा है। धीरे-धीरे जटिल शब्दों का इस्तेमाल कम हो रहा है।-नीरज जादौन, एसएसपी, अलीगढ़
इसी तरह पुलिस की डायरी में कभी आम होने वाले शब्द हस्बतलविदा (पूछताछ के लिए बुलाना), माल मसरूका (चोरी का सामान), तफ्तीश (जांच), जामा तलाशी (व्यक्ति की तलाशी), फर्द (दस्तावेज), मुजरिम (अपराधी), दबिश (छापामारी) जैसे सैकड़ों शब्द पुलिस कामकाज में आम थे, जो अब धीरे-धीरे चलन से बाहर हो रहे हैं।उत्तर प्रदेश पुलिस के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी बताते हैं कि एक समय था जब थानों में रोजनामचा (जीडी), एफआईआर और केस डायरी पूरी तरह हाथ से लिखी जाती थी। नए सिपाही और विवेचक अपने वरिष्ठों से वही पारंपरिक भाषा सीखते और आगे बढ़ाते थे, लेकिन अब सीसीटीएनएस सिस्टम लागू होने के बाद एफआईआर से लेकर केस डायरी तक सब कुछ ऑनलाइन हो गया है। कंप्यूटर पर लिखते समय नए कर्मियों को अरबी-फारसी के कठिन शब्द समझ नहीं आते, ऐसे में वे सीधे उनका हिंदी रूप इस्तेमाल कर रहे हैं।
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