Dhurandhar 2 Review: ‘धुरंधर 2’ पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का बयान, पीएम मोदी पर दागे कई सवाल!

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Dhurandhar 2 Review: 'धुरंधर 2' पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का बयान, पीएम मोदी पर दागे कई सवाल!: ताजा अपडेट

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Dhurandhar: मुख्य समाचार और अपडेट

Dhurandhar: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, “यह बकवास कौन देखेगा? कौन इस पर यकीन करेगा? प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की और इसने देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी। प्रधानमंत्री मोदी के ऐसे बेवकूफी भरे फैसलों की वजह से देश को नुकसान हुआ। आप इसकी बड़ाई कर रहे हैं… अगर आपको कुछ बड़ाई करना ही है, तो दिखाएं कि इंदिरा जी ने निक्सन को कैसे जवाब दिया था। प्रधानमंत्री मोदी अडानी और खुद को बचाने के लिए ट्रंप के सामने हाथ जोड़कर खड़े हैं। उन्हें पता है कि देश को नुकसान हो रहा है, लेकिन फाइलें हैं इसलिए वे मजबूर हैं

उत्तर प्रदेश के Saharanpur से कांग्रेस सांसद Imran Masood ने फिल्म Dhurandhar: The Revenge को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की फिल्मों में जो घटनाएं और कथानक दिखाए जा रहे हैं, वे वास्तविकता से काफी दूर हैं और आम जनता इन्हें सच मानकर स्वीकार नहीं करेगी। मसूद का मानना है कि सिनेमा का समाज पर प्रभाव जरूर पड़ता है, लेकिन दर्शक अब पहले से अधिक जागरूक हो चुके हैं और वे वास्तविकता तथा काल्पनिक प्रस्तुति के बीच फर्क समझते हैं।

Dhurandhar: घटना का पूरा विवरण

उन्होंने यह भी कहा कि फिल्मों को मनोरंजन के दृष्टिकोण से देखना चाहिए, न कि उन्हें समाज की सच्चाई का प्रतिबिंब मान लेना चाहिए। उनके अनुसार, अगर किसी फिल्म में अतिरंजित या एकतरफा चित्रण किया जाता है, तो वह समाज में भ्रम फैलाने का काम कर सकता है, लेकिन आज के समय में लोग ऐसी चीजों को आसानी से परख लेते हैं।

इमरान मसूद ने आगे कहा कि देश की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को समझे बिना किसी भी विषय को फिल्मी रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं है। उन्होंने फिल्म निर्माताओं से अपील की कि वे संवेदनशील विषयों पर काम करते समय संतुलन और जिम्मेदारी का परिचय दें। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि फिल्मों के जरिए किसी विशेष वर्ग या विचारधारा को गलत तरीके से प्रस्तुत करना उचित नहीं है।

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब फिल्म को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे मनोरंजक बता रहे हैं, तो कुछ इसके कथानक और प्रस्तुति पर सवाल उठा रहे हैं। मसूद के बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि सिनेमा की सामाजिक जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए और उसे किस हद तक वास्तविकता के करीब रहना चाहिए।

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