ED: शरीर में छिपाकर एक साल में लाए 127 किलो सोना, लोकल ज्वैलर्स को बेचा; इंडिया-दुबई रूट पर हवाला सेटलमेंट

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ED: शरीर में छिपाकर एक साल में लाए 127 किलो सोना, लोकल ज्वैलर्स को बेचा; इंडिया-दुबई रूट पर हवाला सेटलमेंट: ताजा अपडेट

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ED: शरीर: मुख्य समाचार और अपडेट

ED: शरीर: ईडी ने राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत सीबीआई, एसी-II, नई दिल्ली द्वारा 07.03.2025 को दर्ज एफआईआर संख्या आरसी 2172025ए0006 के आधार पर इस केस की जांच शुरू की थी। एफआईआर में डीआरआई द्वारा लगभग 14.213 किलोग्राम विदेशी मूल के सोने की ज़ब्ती का उल्लेख है, जिसका मूल्य लगभग 2 करोड़ रुपये है। 3 मार्च 2025 को बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हर्षवर्दिनी रान्या से 12.56 करोड़ रुपये जब्त किए गए। बाद में की गई तलाशी में 2.06 करोड़ रुपये के सोने के आभूषण और 2.67 करोड़ रुपये की भारतीय मुद्रा बरामद हुई।पीएमएलए के तहत ईडी की जांच में पता चला कि मार्च 2024 से मार्च 2025 की अवधि के दौरान लगभग 102.55 करोड़ रुपये मूल्य का कुल 127.287 किलोग्राम सोना भारत में तस्करी करके लाया गया था। तस्करी किए गए सोने को दलालों और जौहरियों के एक नेटवर्क के माध्यम से घरेलू बाजार में बेचा गया। बिक्री से प्राप्त धनराशि नकद में प्राप्त की गई। भारत और विदेश में हवाला चैनलों के माध्यम से इसका निपटान किया गया। इन निधियों को वैध व्यावसायिक लेनदेन के रूप में दिखाने के लिए कई बैंक खातों और संस्थाओं के माध्यम से आगे बढ़ाया गया। ईडी ने 21 और 22 मई, 2025 को कर्नाटक में 16 स्थानों पर छापेमारी की।सर्च के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, भारतीय मुद्रा और विदेशी मुद्रा जब्त की गई। जांच के दौरान पीएमएलए की धारा 50 के तहत कई व्यक्तियों के बयान दर्ज किए गए। हर्षवर्दिनी रान्या के नाम पर दर्ज 34.12 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को पीएमएलए, 2002 की धारा 5(1) के तहत अनंतिम कुर्की आदेश संख्या 16/2025 दिनांक 04.07.2025 द्वारा अस्थायी रूप से कुर्क किया गया। इस केस में संगठित और सुनियोजित तंत्र का खुलासा हुआ है। विदेशों से सोने की खरीद, भारत में अवैध आयात, नकद में निपटान और हवाला तथा बैंकिंग चैनलों के माध्यम से प्राप्त धनराशि का मनी लॉन्ड्रिंग शामिल है। इस तरह की गतिविधियां न केवल कानूनी व्यापार और वित्तीय प्रणालियों को कमजोर करती हैं बल्कि सीमा पार लेनदेन को विनियमित करने के लिए गठित संस्थानों में जनता के विश्वास को भी कम करती हैं।ईडी के मुताबिक आरोपी, विदेशों में पहले सोने की खरीद करते थे। सोने का सोर्स दुबई था। इसके लिए जो कीमत चुकाई गई, वह औपचारिक बैंक चैनल के माध्यम से नहीं, बल्कि हवाला चैनल के जरिए होती थी। दूसरे चरण में सोने को स्मगलिंग कर भारत लाया गया। तीसरे चरण में सोने को लोकल हैंडलर को देते थे। वहां से इसे ज्वैलरों को बेचा जाता था। इससे भारी मात्रा में कैश एकत्रित हो गया। चौथे चरण में कैश को विभाजित किया जाता। उसे हवाला सेटलमेंट के जरिए इंडिया दुबई रूट पर डाला जाता। उसके बाद थर्ड पार्टी खातों के जरिए उसे ट्रांसफर करते थे। इसका मकसद, कैश को कानूनी तौर पर सही दिखाना था।

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