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Meta Description: IAF: News: IAF: ‘आर्थिक ताकत काफी नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सैन्य शक्ति जरूरी’, वायुसेना प्रमुख का बयान – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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IAF:: मुख्य समाचार और अपडेट
IAF:: दिल्ली में सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज की ओर से आयोजित 22वें सुब्रतो मुखर्जी सेमिनार को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि आर्थिक रूप से मजबूत होने के बावजूद यदि सैन्य शक्ति कमजोर हो, तो देश को अधीनता का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि एक समय भारत-चीन मिलकर दुनिया की जीडीपी का बड़ा हिस्सा नियंत्रित करते थे, फिर भी सैन्य कमजोरी के कारण उपनिवेश बनना पड़ा।एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा, राष्ट्रीय शक्ति का अंतिम निर्धारक सैन्य क्षमता होती है। आर्थिक रूप से सक्षम होना पर्याप्त नहीं, सुरक्षा के लिए मजबूत सेना और उसे इस्तेमाल करने की इच्छाशक्ति जरूरी है। उन्होंने हालिया घटनाक्रम का जिक्र करते हुए बताया कि 3 जनवरी को अमेरिकी कार्रवाई के बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी हुई, जबकि इराक पर 2003 में अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन ने हथियारों के आधार पर हमला किया था, जिससे वहां की सत्ता बदल गई।वायुसेना प्रमुख ने सैन्य शक्ति के साथ-साथ संयम और दृढ़ संकल्प के संतुलन पर जोर दिया। उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियां उद्धृत करते हुए कहा कि ताकत के बिना संयम को कमजोरी समझा जाता है, जबकि शक्ति के साथ संयम क्षमता का परिचायक होता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सुरक्षा जरूरतें अक्सर पड़ोसी क्षेत्रों के घटनाक्रम से प्रभावित होती हैं, जिससे कभी-कभी त्वरित फैसलों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्वदेशी परियोजनाओं, अगली पीढ़ी के इंजनों और हथियार प्रणालियों के लिए रणनीतिक साझेदारियों पर तेज निर्णय जरूरी हैं।एयर चीफ मार्शल सिंह ने भारतीय वायुसेना के संस्थापक सुब्रतो मुखर्जी की सराहना करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने दूरदर्शिता के साथ वायुसेना को सही दिशा दी। उन्होंने कहा कि आज वायुसेना बेहतर संसाधनों के साथ लगातार मजबूत हो रही है। सीएपीएसएस को सेमिनार के आयोजन के लिए बधाई देते हुए वायुसेना प्रमुख ने कहा कि ऐसे मंच तेजी से बदलते वैश्विक माहौल में सशस्त्र बलों को बौद्धिक रूप से तैयार रखते हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले साल भारतीय वायुसेना ने अपने 100 वर्ष पूरे किए और देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए मजबूत वायुसेना का निर्माण निरंतर आवश्यक है।
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