GlobE Network: भारत अपने क्षेत्र का उपयोग अपराध की आय छिपाने के लिए नहीं होने देगा, ग्लोबई नेटवर्क में ED-CBI

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GlobE Network: भारत अपने क्षेत्र का उपयोग अपराध की आय छिपाने के लिए नहीं होने देगा, ग्लोबई नेटवर्क में ED-CBI: ताजा अपडेट

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Meta Description: GlobE News: GlobE Network: भारत अपने क्षेत्र का उपयोग अपराध की आय छिपाने के लिए नहीं होने देगा, ग्लोबई नेटवर्क में ED-CBI – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।

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GlobE: मुख्य समाचार और अपडेट

GlobE: भ्रष्टाचार के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत की बढ़ती भूमिका और 12वीं ग्लोबई संचालन समिति की बैठक की मेजबानी करना, अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार-विरोधी व्यवस्था में देश के बढ़ते कद का प्रमाण है। भारत अपने अधिकार क्षेत्र का उपयोग अपराध की आय को छिपाने के लिए नहीं होने देगा। ईडी और सीबीआई, इन दोनों जांच एजेंसियों के निदेशकों ने सोमवार को भ्रष्टाचार-विरोधी कानून प्रवर्तन प्राधिकरणों के वैश्विक परिचालन नेटवर्क (ग्लोबई नेटवर्क) की 12वीं संचालन समिति की बैठक में यह बात कही है। 12वीं संचालन समिति की बैठक की मेजबानी भारत कर रहा है।

पिछले एक दशक में, भारत ने अपने घरेलू प्रवर्तन ढांचे को काफी मजबूत किया है। इसमें ईडी और सीबीआई, वित्तीय अपराधों व भ्रष्टाचार की जांच में वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय प्रतिष्ठा वाली एजेंसियों के रूप में उभरी हैं।

GlobE: घटना का पूरा विवरण

संपत्ति वसूली में, भारत का उत्कृष्ट प्रदर्शन इसे चोरी की गई संपत्तियों को राज्य और पीड़ितों को लौटाने में विश्व स्तर पर सबसे सक्रिय न्यायक्षेत्रों में से एक बनाता है। सीबीआई और ईडी अपनी आवाज, अपना अनुभव और अपनी संस्थागत विश्वसनीयता उस वैश्विक प्रयास को दे रहे हैं, जो आम नागरिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भ्रष्टाचार, सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग करता है, संस्थानों को कमजोर बनाता है। इसके माध्यम से सबसे कमजोर वर्गों को नुकसान पहुंचाया जाता है। ग्लोबई नेटवर्क उस चुनौती का विश्वव्यापी समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। 23 से 25 मार्च तक चलने वाली तीन दिवसीय बैठक में संचालन समिति के पंद्रह सदस्य देश, नेटवर्क की रणनीतिक दिशा, परिचालन प्राथमिकताओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए विकसित हो रहे ढांचों पर विचार-विमर्श करने के लिए एकत्रित हुए हैं।

ग्लोबई नेटवर्क भ्रष्टाचार-विरोधी कानून प्रवर्तन प्राधिकरणों का एक वैश्विक मंच है। इसकी स्थापना सऊदी अरब की जी20 अध्यक्षता के दौरान रियाद पहल के तहत की गई थी। संयुक्त राष्ट्र भ्रष्टाचार-विरोधी कन्वेंशन (यूएनसीएसी) के ढांचे के तहत काम करते हुए, यह नेटवर्क सदस्य एजेंसियों के बीच भ्रष्टाचार की जांच, अभियोजन और उससे प्राप्त धन की वसूली के लिए प्रत्यक्ष, व्यावहारिक स्तर पर सहयोग को सक्षम बनाता है। इस नेटवर्क में 135 सदस्य देश और 250 सदस्य प्राधिकरण शामिल हैं। साथ ही यूरोपोल, विश्व बैंक और भ्रष्टाचार-विरोधी प्राधिकरणों के अंतर्राष्ट्रीय संघ सहित 18 पर्यवेक्षक भी हैं। ग्लोबई नेटवर्क, विभिन्न एजेंसियों के बीच त्वरित, अधिक लचीले और प्रत्यक्ष जुड़ाव को सक्षम बनाकर औपचारिक कानूनी सहायता तंत्रों का पूरक है। ग्लोबई संचालन समिति में वर्तमान में 15 देश हैं। अजरबैजान, ब्राजील, चीन (हांगकांग और मकाऊ एसएआर सहित), इथियोपिया, ग्रेनाडा, भारत, इटली, नाइजीरिया, रोमानिया, रूस, सऊदी अरब, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात।

ग्लोबई नेटवर्क में भारत की भूमिका

GlobE: निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

भारत 2022 में ग्लोबई नेटवर्क में शामिल हुआ, जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (डीईआर) इसके दो नामित सदस्य एजेंसियां थीं। इसके बाद, सितंबर 2024 में बीजिंग में एक पूर्ण सत्र के दौरान भारत को पंद्रह सदस्यीय संचालन समिति के लिए चुना गया, जो वैश्विक भ्रष्टाचार-विरोधी ढांचे में इसकी बढ़ती स्थिति को दर्शाता है। ग्लोबई नेटवर्क के साथ भारत की भागीदारी इसकी औपचारिक सदस्यता से पहले की है। सऊदी अरब की अध्यक्षता में जी20 प्रक्रिया के दौरान भ्रष्टाचार-विरोधी कार्य समूह की चर्चाओं में भारत शामिल था, जब रियाद में ग्लोबई की अवधारणा को पहली बार आकार दिया जा रहा था। भारत ने 2023 में जी20 की अध्यक्षता संभाली, तो भ्रष्टाचार-विरोधी और संपत्ति वसूली को प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ाया गया। इसमें परिचालन सहयोग का एजेंडा भ्रष्टाचार-विरोधी कार्य समूह की चर्चाओं का केंद्र बना रहा।

5.6 अरब अमेरिकी डॉलर की संपत्ति वापस दिलाई

प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक ने कहा, सीबीआई, भारत की प्राथमिक भ्रष्टाचार-विरोधी जांच और अभियोजन एजेंसी है, और ईडी धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत अपराध की आय का पता लगाने, उसे रोकने, जब्त करने और वापस लौटाने के लिए अधिकृत एजेंसी है। यूएनसीएसी में निहित आधुनिक भ्रष्टाचार-विरोधी ढांचे के तहत, संपत्ति की वसूली कोई गौण बात नहीं है, बल्कि प्रवर्तन की सफलता का सबसे सच्चा मापदंड है। उन्होंने बताया कि ईडी ने भ्रष्टाचार के मामलों सहित लगभग 5.6 अरब अमेरिकी डॉलर की संपत्ति वापस दिलाई है, जिसमें से एक महत्वपूर्ण हिस्सा पिछले कुछ वर्षों में ही हासिल किया गया है। ईडी के निदेशक ने भारतीय जांचकर्ताओं के लिए ग्लोबई उपकरणों के व्यावहारिक महत्व को भी स्वीकार किया, विशेष रूप से स्पेन द्वारा एक मामले में दी गई सहायता का उल्लेख किया, जहां नेटवर्क के माध्यम से साझा की गई जानकारी के आधार पर औपचारिक चैनलों के माध्यम से संपत्तियों को जब्त किया गया। उन्होंने जांच के प्रारंभिक चरणों में तेजी लाने में ओपन सोर्स रजिस्ट्रियों की निर्देशिका की उपयोगिता को रेखांकित किया।

अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाना

केंद्रीय जांच ब्यूरो के निदेशक ने ग्लोबई नेटवर्क के सुरक्षित संचार मंच को सदस्य प्राधिकरणों के बीच एन्क्रिप्टेड, वास्तविक समय सूचना आदान-प्रदान के लिए एक अत्यंत प्रभावी उपकरण बताया है। उन्होंने सभी सदस्य एजेंसियों से सीबीआई के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने, कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी साझा करने और उपलब्ध सहयोग तंत्रों का पूर्ण उपयोग करने का आह्वान किया। निदेशक ने सीबीआई की व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका पर बल दिया। समय पर और समन्वित कार्रवाई से अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने और अवैध संपत्तियों की बरामदगी सुनिश्चित करने में निर्णायक अंतर आ सकता है।

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