Iran-Israel War: 15 हजार में मिल रहा ये सिलिंडर!

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Iran-Israel War: 15 हजार में मिल रहा ये सिलिंडर!: ताजा अपडेट

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Iran-Israel: मुख्य समाचार और अपडेट

Iran-Israel: क्या युद्ध का असर अब आपकी थाली तक पहुंचने वाला है? क्या महंगी हो रही अमोनिया गैस से आलू और सब्जियों का भंडारण संकट में है? और क्या उत्तर प्रदेश के हजारों कोल्ड स्टोरेज इस बढ़ती लागत के दबाव में टिक पाएंगे?

युद्ध के बढ़ते असर का दायरा अब केवल पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव कृषि अर्थव्यवस्था और कोल्ड स्टोरेज उद्योग पर भी साफ दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अमोनिया गैस की कीमतों में तेज उछाल ने करीब 2500 कोल्ड स्टोरेज के संचालन को प्रभावित कर दिया है। खासकर आलू उत्पादन वाले इलाकों में इसका असर अधिक गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।

Iran-Israel: घटना का पूरा विवरण

कोल्ड स्टोरेज में अमोनिया गैस का उपयोग शीतलन प्रक्रिया के लिए बेहद जरूरी होता है। कीमतों में अचानक आई इस बढ़ोतरी ने संचालकों के सामने लागत का संकट खड़ा कर दिया है। आगरा में संचालित 327 शीतगृहों में एक सीजन के दौरान औसतन 1.5 से 2 टन अमोनिया गैस की खपत होती है। आगरा कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के अध्यक्ष भुवेश अग्रवाल के अनुसार, मार्च के आसपास अमोनिया की कमी के कारण दाम 300-350 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए थे। हालांकि अब आपूर्ति सामान्य हो गई है, लेकिन कीमतें अभी भी 100-130 रुपये प्रति किलो के बीच बनी हुई हैं, जो सामान्य दिनों की तुलना में काफी ज्यादा है।

मैनपुरी में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है, जहां कोल्ड स्टोरेज संचालक पियूष चंदेल के मुताबिक एक सीजन में करीब 1800 किलो अमोनिया गैस की जरूरत पड़ती है। जिले में 67 कोल्ड स्टोरेज हैं और यहां गैस की कीमतों में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी देखी गई है। फिरोजाबाद में भी पिछले साल 70 रुपये प्रति किलो मिलने वाली अमोनिया इस बार 140 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।

कानपुर में अमोनिया के दाम करीब 20 फीसदी तक बढ़ गए हैं, जिससे कोल्ड स्टोरेज संचालकों के साथ-साथ सब्जी आढ़तियों और किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। हालांकि अभी तक स्टोरेज किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, लेकिन यदि यही स्थिति बनी रहती है तो आने वाले समय में इसका असर किसानों पर पड़ना तय है।

Iran-Israel: निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

फर्रुखाबाद में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है। यहां पहले जहां अमोनिया गैस 24 घंटे में उपलब्ध हो जाती थी, अब 48 घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं इटावा में गैस तीन से चार गुना महंगी हो गई है। कन्नौज में भी कुछ समय पहले तक आपूर्ति संकट था, जो अब दूर हो चुका है, लेकिन कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं।

अलीगढ़ में तो अमोनिया गैस के दामों में आई तेजी ने संचालन लागत का पूरा गणित ही बिगाड़ दिया है। 60 किलो का सिलेंडर, जो पहले 7200 रुपये में मिलता था, अब 15000 रुपये तक पहुंच गया है। कोल्ड स्टोरेज ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गिर्राज गोदानी का कहना है कि कोल्ड स्टोरेज को उद्योग नहीं, बल्कि कृषि से जुड़ी आवश्यक सेवा के रूप में देखा जाना चाहिए। बढ़ती लागत से पूरा तंत्र प्रभावित हो रहा है।

हालांकि कुछ जिलों में स्थिति थोड़ी बेहतर है। मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर, शामली, मुजफ्फरनगर और बागपत में अमोनिया गैस की कोई कमी नहीं है और कोल्ड स्टोरेज सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं। बुलंदशहर में भी दिल्ली से नियमित सप्लाई होने के कारण संचालन प्रभावित नहीं हुआ है।

बरेली में बीच में अमोनिया का भाव 220 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था, जो अब घटकर 152 रुपये प्रति किलो हो गया है। वहीं प्रयागराज में भी अधिकांश कोल्ड स्टोरेज में पर्याप्त मात्रा में अमोनिया उपलब्ध है।

कुल मिलाकर, अमोनिया गैस की कीमतों में उछाल ने कोल्ड स्टोरेज उद्योग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। यदि जल्द ही कीमतों पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो इसका सीधा असर किसानों की आय और कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

संबंधित जानकारी (Background):
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