Justice BV Nagarathna: ‘जटिल नियम सेंसरशिप से ज्यादा घातक’, जस्टिस नागरत्ना ने प्रेस की स्वतंत्रता पर दिया जोर

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Justice BV Nagarathna: 'जटिल नियम सेंसरशिप से ज्यादा घातक', जस्टिस नागरत्ना ने प्रेस की स्वतंत्रता पर दिया जोर: ताजा अपडेट

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Justice: मुख्य समाचार और अपडेट

Justice: आईपीआई इंडिया अवार्ड फॉर एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म 2025 के कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रेस को नियंत्रित करने के हालिया प्रयासों के पीछे केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक कारण भी हो सकते हैं। उन्होंने समझाया कि कोई मीडिया संस्थान कानून के तहत सरकार की आलोचना करने के लिए स्वतंत्र हो सकता है, लेकिन आर्थिक दबाव ऐसा माहौल बना सकता है कि उसके लिए आलोचना करना बहुत महंगा या मुश्किल हो जाए।उन्होंने यह भी कहा कि भारत में प्रेस की स्वतंत्रता का संवैधानिक आधार बहुत महत्वपूर्ण है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क), जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, और अनुच्छेद 19(1)(घ), जो किसी भी पेशे या व्यवसाय को करने की स्वतंत्रता देता है, से मिलकर बनता है।गौरतलब है कि जस्टिस नागरत्ना सितंबर 2027 में भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बनने वाली हैं। इस कार्यक्रम में पूर्व जस्टिस एमबी लोकुर और पीटीआई के प्रधान संपादक विजय जोशी ने भी अपने विचार रखे।

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