Maharashtra: मुस्लिम आरक्षण रद्द करने पर महाराष्ट्र में सियासी संग्राम, गायकवाड़ बोलीं- लोकतंत्र के लिए खतरनाक

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Maharashtra: मुस्लिम आरक्षण रद्द करने पर महाराष्ट्र में सियासी संग्राम, गायकवाड़ बोलीं- लोकतंत्र के लिए खतरनाक: ताजा अपडेट

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Maharashtra:: मुख्य समाचार और अपडेट

Maharashtra:: महाराष्ट्र में मुस्लिम समुदाय को मिलने वाला पांच प्रतिशत आरक्षण एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में है। ऐसे में अब इस मामले में मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने राज्य की भाजपा सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आरक्षण रद्द करने का फैसला सामाजिक न्याय और समान अवसरों की भावना के खिलाफ है। बुधवार को उन्होंने कहा कि भाजपा की अगुवाई वाली सरकार की तरफ से मुस्लिम समुदाय को मिलने वाला पांच प्रतिशत आरक्षण रद्द करना लोकतंत्र के लिए हानिकारक है। उनका कहना है कि इस फैसले से मुस्लिम समाज मुख्यधारा से दूर हो सकता है।

बता दें कि इस मामले में सियासी संग्राम की शुरुआत तब हुई जब मंगलवार देर रात महाराष्ट्र सरकार के सामाजिक न्याय विभाग की तरफ से मंगलवार देर रात जारी इस आदेश के मुताबिक अब मुस्लिम समुदाय के लोगों को पांच फीसदी आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि, कानूनी रूप से यह आदेश करीब एक दशक से अमान्य था, लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार के आदेश पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है।

Maharashtra:: घटना का पूरा विवरण

गायकवाड़ ने राज्य सरकार पर लगाए आरोप

मुंबई नॉर्थ-सेंट्रल से सांसद वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि सरकार ने हाईकोर्ट के अंतरिम स्थगन आदेश और अध्यादेश की अवधि समाप्त होने का हवाला देकर पहले की प्रक्रिया को ही रद्द कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ आरक्षण से जुड़े जरूरी दस्तावेजों और प्रक्रियाओं को आगे नहीं बढ़ने देती। इस दौरान गायकवाड़ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अदालत ने मुस्लिम समुदाय को शिक्षा में 5 प्रतिशत आरक्षण को बरकरार रखा था, लेकिन राज्य सरकार ने इसे पूरी तरह लागू नहीं किया।

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इसके साथ ही गायकवाड़ ने इस मामले में राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। साथ ही सहयोगी दलों शिवसेना और एनसीपी से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।गायकवाड़ ने यह भी साफ किया कि यह आरक्षण धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को लाभ देने के लिए था। उनके मुताबिक, भाजपा का यह कदम उसके आरक्षण विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।गौरतलब है कि साल 2014 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की सरकार ने मुस्लिम समुदाय के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में पांच प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की थी।हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में विगत एक दशक से अधिक समय से यह आदेश अमान्य था। पुराने सरकारी आदेश के मुताबिक मुस्लिम समुदाय के लोगों को विशेष पिछड़ा वर्ग-ए (एसबीसी-ए) श्रेणी में रखा गया था। इसके तहत सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण के लाभ का दावा किया जा सकता था, लेकिन तत्कालीन सरकार के इस अध्यादेश को मुंबई उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, जिस पर लगभग 12 साल पहले ही रोक लगा दी गई थी। 14 नवंबर 2014 को हाईकोर्ट ने अध्यादेश पर रोक लगाने का आदेश पारित किया था।

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