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Meta Description: Mars: News: Mars: मंगल ग्रह तय कर रहा पृथ्वी का जलवायु चक्र, इसके बिना अस्थिर हो सकता था धरती का अक्षीय झुकाव – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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Mars:: मुख्य समाचार और अपडेट
Mars:: वैज्ञानिकों ने पाया कि मंगल का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के झुकाव और उसकी कक्षा को प्रभावित करता है, जिससे लाखों वर्षों तक चलने वाले जलवायु चक्र निर्धारित होते हैं। दशकों से वैज्ञानिक यह मानते आए हैं कि पृथ्वी की लंबी अवधि की जलवायु मिलनकोविच चक्र से प्रभावित होती है। ये चक्र पृथ्वी की कक्षा और उसके अक्षीय झुकाव में होने वाले बेहद धीमे बदलाव हैं, जो सौर मंडल के अन्य ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण के कारण होते हैं। अब तक माना जाता था कि शुक्र (अपनी निकटता के कारण) और बृहस्पति (अपने विशाल आकार के कारण) इसके मुख्य कारक हैं।हालांकि, मंगल की भूमिका को हमेशा कम करके आंका गया था, लेकिन इस नए शोध ने इसकी वास्तविक शक्ति को स्पष्ट कर दिया है। यह अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के स्टीफन केन, बर्मिंघम यूनिवर्सिटी की पाम वेरवोर्ट व यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न क्वींसलैंड के जोनाथन हॉर्न ने किया है। इस अध्ययन में मंगल के प्रभाव को गहराई से परखा गया। शोधकर्ताओं ने जब सिमुलेशन से मंगल को पूरी तरह हटा दिया, तो चौंकाने वाले परिणाम सामने आए।अध्ययन के अनुसार, लगभग एक लाख वर्ष और 24 लाख वर्ष की अवधि वाले दो महत्वपूर्ण जलवायु चक्र मंगल के बिना पूरी तरह समाप्त हो गए। स्टीफन केन के अनुसार, ये चक्र मंगल के बिना टिक नहीं सकते। यदि मंगल का द्रव्यमान बढ़ाया जाए, तो ये चक्र और भी छोटे हो जाएंगे, जो यह साबित करता है कि मंगल पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र का एक अदृश्य नियंत्रक है।इस शोध ने एक और पुरानी धारणा को चुनौती दी है कि केवल चंद्रमा ही पृथ्वी के अक्षीय झुकाव को स्थिर रखता है। सिमुलेशन से पता चला कि मंगल का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के झुकाव (जो 21.5 से 24.5 डिग्री के बीच रहता है) को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मंगल की स्थिति सौर मंडल में ऐसी जगह है जहाँ से उसका गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी पर उसके आकार की तुलना में कहीं अधिक प्रभाव डालता है।वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि ये मिलनकोविच चक्र लाखों वर्षों के भूगर्भीय समय पैमाने पर काम करते हैं। इनका वर्तमान मानवीय गतिविधियों के कारण हो रही ग्लोबल वार्मिंग से कोई सीधा संबंध नहीं है। ये चक्र हिमयुगों के आने और जाने के लिए जिम्मेदार होते हैं, जबकि वर्तमान जलवायु परिवर्तन की गति इसकी तुलना में अत्यंत तीव्र है।
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