Masan Ki Holi: काशी विद्वत परिषद ने मसाने की होली का किया विरोध, कहा- श्मशान में त्योहारों की कोई जगह नहीं

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Masan Ki Holi: काशी विद्वत परिषद ने मसाने की होली का किया विरोध, कहा- श्मशान में त्योहारों की कोई जगह नहीं: ताजा अपडेट

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Masan: मुख्य समाचार और अपडेट

Masan: सनातन रक्षक दल के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा ने दावा किया कि यह रिवाज 2014 में साधुओं को ठंडाई परोसने के बहाने शुरू हुआ था और बाद में इसे सदियों पुरानी परंपरा के तौर पर पेश किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि मसाने की होली के नाम पर लोग नशा करते हैं और गलत व्यवहार करते हैं। उन्होंने कहा कि शास्त्र बिना वजह श्मशान जाने से मना करते हैं और ऐसे कामों से रीति-रिवाजों में गंदगी फैलती है।

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पंडित छन्नूलाल मिश्रा से जुड़े पॉपुलर मसाने की होली गाने का जिक्र करते हुए अजय शर्मा ने कहा कि मशहूर हिंदुस्तानी क्लासिकल सिंगर ने साफ किया था कि उनका गाना भक्ति से जुड़ा था, न कि इस रिवाज का सपोर्ट करने के लिए था। यह आरोप लगाते हुए कि यह आयोजन शहर की क्षवि खराब करने की कोशिश है। मांग की कि इस आयोजन को रोका जाए।

हालांकि आयोजन का संचालन करने वाले गुलशन कपूर ने उत्सव का बचाव करते हुए कहा कि आलोचकों को स्थानीय परंपरा और धर्मग्रंथों की जानकारी नहीं है। कपूर ने दावा किया कि धार्मिक ग्रंथों में अंतिम संस्कार की राख से होली खेलने का जिक्र मिलता है। मुगल राज में यह रिवाज कम हो गया था, लेकिन बाद में इसे फिर से शुरू कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग उत्सव से जुड़े दान पाने में नाकाम रहने के बाद पैसे के फायदे के लिए आयोजन का विरोध कर रहे थे।

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